Bhind Cyber Fraud Case: 100 रुपये में खाटू श्याम के VIP दर्शन का लालच और फिर 57 लाख का खेल, भिंड में पकड़ाया अंतरराष्ट्रीय ठगी गिरोह

भिंड (Bhind Cyber Fraud Case)। कहते हैं कि लालच इंसान को अंधा बना देता है, लेकिन जब यह लालच ‘आस्था’ और ‘जरूरत’ के लिबास में आता है, तो अच्छे-अच्छे समझदार मात खा जाते हैं। भिंड जिले में सामने आया Bhind Cyber Fraud Case का यह मामला किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। यह कहानी शुरू होती है राजस्थान की पावन धरा खाटू श्याम मंदिर से और खत्म होती है दुबई के उन आलीशान कमरों में, जहाँ बैठे मास्टरमाइंड भिंड के भोले-भाले युवाओं के बैंक खातों से करोड़ों का खेल खेल रहे हैं।
श्रद्धा के द्वार पर बिछाया गया ‘मायाजाल’

यह कहानी है भिंड के मनदीप सोनी की, जो एक मोबाइल शॉप पर मामूली नौकरी कर अपना गुजारा करता था। सालभर पहले वह दोस्तों के साथ खाटू श्याम के दर्शन करने गया था। मंदिर के बाहर भारी भीड़ थी। इसी भीड़ में उसकी मुलाकात ‘संजय’ नाम के एक शख्स से हुई। संजय ने मनदीप का भरोसा जीतने के लिए एक छोटा सा दांव खेला—उसने 500 रुपये वाली वीआईपी दर्शन की टिकट मात्र 100 रुपये में दिलवा दी। मनदीप को लगा कि भगवान ने खुद उसकी मदद के लिए कोई फरिश्ता भेजा है, लेकिन उसे नहीं पता था कि यह Bhind Cyber Fraud Case के दलदल की पहली सीढ़ी थी।
लोन का झांसा और खातों की ‘डकैती’
दर्शन के बाद बातों का सिलसिला बढ़ा। संजय ने खुद को रसूखदार बताया और मनदीप को खुद का बिजनेस शुरू करने के लिए बड़े लोन का सपना दिखाया। कुछ समय बाद, संजय ने भिंड में ही सक्रिय अपने गुर्गे ‘छोटू यादव’ के जरिए मनदीप का संपर्क करवाया। मनदीप के मन में अपनी मोबाइल शॉप खोलने की उमंग थी, इसी का फायदा उठाकर ठगों ने उसका बैंक ऑफ महाराष्ट्र में नया खाता खुलवा दिया। ठगों ने चालाकी से बैंक खाते के साथ लिंक सिम कार्ड अपने पास रख लिया और मनदीप को यकीन दिलाया कि ‘प्रोसेस’ चल रहा है। असल में, यहाँ से Bhind Cyber Fraud Case का असली खेल शुरू हो चुका था।
जब बैंक मैनेजर ने पूछा- 57 लाख कहाँ से लाए?

महीनों बीत गए। एक दिन मनदीप अपना ‘लोन स्टेटस’ चेक करने बैंक पहुंचा। मैनेजर ने जैसे ही उसका अकाउंट देखा, उनकी आँखें फटी की फटी रह गईं। मैनेजर ने मनदीप से पूछा— “तुम तो मोबाइल शॉप पर काम करते हो, फिर तुम्हारे खाते में ये 57 लाख रुपये कहाँ से आए और कहाँ गए?” मनदीप के पैरों तले जमीन खिसक गई। उसे तब अहसास हुआ कि जिस खाते को उसने अपने भविष्य के लिए खुलवाया था, उसका इस्तेमाल साइबर ठग दुबई तक पैसा भेजने के लिए कर रहे थे। यह Bhind Cyber Fraud Case का वह चेहरा था जिसने मनदीप को अपराधी की श्रेणी में लाकर खड़ा कर दिया।
15 युवाओं की जिंदगी से खिलवाड़
पुलिस की तफ्तीश में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि मनदीप अकेला शिकार नहीं था। उसके भाई बद्री प्रसाद और दोस्त चेतन श्रीवास्तव समेत भिंड के करीब 15 युवाओं को इसी तरह फंसाया गया था। बद्री के खाते से 28 लाख और चेतन के खाते से 35 लाख का ट्रांजैक्शन हुआ। इन सभी युवाओं को सरकारी योजनाओं और फर्जी लोन के नाम पर ठगा गया। उमरी थाना पुलिस ने जब तकनीकी जांच की, तो पता चला कि यह पूरा Bhind Cyber Fraud Case नेटवर्क राजस्थान के सीकर से संचालित हो रहा था, जिसके तार सीधे दुबई से जुड़े हैं।
पुलिस का ‘सर्च ऑपरेशन’ और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन
उमरी थाना प्रभारी टीआई शिवप्रताप सिंह राजावत ने बताया कि पुलिस ने राजस्थान से 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। ये आरोपी केवल ‘मोहरे’ (मीडिएटर) हैं। इनका काम केवल जरूरतमंद युवाओं के दस्तावेज और बैंक खाते कलेक्ट करना था। असली मास्टरमाइंड दुबई में बैठकर ऑनलाइन गेमिंग और साइबर ठगी के पैसों को इन खातों के जरिए ‘लॉन्ड्रिंग’ कर रहा था। पुलिस की इस कार्रवाई ने Bhind Cyber Fraud Case के एक बड़े अंतरराष्ट्रीय मॉड्यूल को बेनकाब कर दिया है।
आस्था और पहचान को रखें सुरक्षित
यह मामला सबक है उन लोगों के लिए जो किसी अनजान पर तुरंत भरोसा कर लेते हैं। Bhind Cyber Fraud Case ने यह साबित कर दिया है कि ठग अब भगवान के दरबार को भी अपना ‘हंटिंग ग्राउंड’ बना रहे हैं। पुलिस अब उन मुख्य सप्लायरों की तलाश में है जिन्होंने छोटू यादव और अभिषेक जैसे स्थानीय एजेंटों को तैयार किया था। फिलहाल, मनदीप और उसके साथियों के खाते फ्रीज हैं और वे अब पुलिस स्टेशन और बैंकों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
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