सीसीआई नयागांव फैसला 30 साल का इंतज़ार खत्म, 40 सुरक्षा गार्ड्स को मिला परमानेंट होने का हक

सीसीआई नयागांव फैसला
नीमच : “भगवान के घर देर है, लेकिन अंधेर नहीं।“ यह कहावत आज नीमच जिले के नयागांव स्थित सीमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) के उन 40 परिवारों के लिए सच साबित हुई है, जो पिछले तीन दशकों से अपने हक की लड़ाई लड़ रहे थे। केंद्रीय सरकार औद्योगिक न्यायाधिकरण (CGIT), जबलपुर ने एक ऐतिहासिक निर्णय सुनाते हुए ठेका सुरक्षा गार्ड्स को नियमित (Permanent) करने का आदेश दिया है। सीसीआई नयागांव फैसला न केवल इन श्रमिकों की जीत है, बल्कि यह उस सिस्टम पर भी एक करारा तमाचा है जो ठेका प्रथा की आड़ में मजदूरों का शोषण करता है।
11 साल की लंबी कानूनी लड़ाई और जीत का जश्न
यह मामला सिर्फ 40 कर्मचारियों का नहीं, बल्कि उनके आत्मसम्मान का था। जबलपुर ट्रिब्यूनल ने 29 दिसंबर 2025 को पारित अपने अवार्ड में स्पष्ट किया कि फैक्ट्री प्रबंधन को इन सुरक्षा कर्मियों को उनकी पात्रता की तिथि से नियमित करना होगा।
इस सीसीआई नयागांव फैसला का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि श्रमिक संगठनों और प्रबंधन के बीच यह रस्साकशी 2014 से कोर्ट में चल रही थी। सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन (सीटू) के नेतृत्व में सुरक्षा कर्मियों ने 2014 में नियमितीकरण का दावा प्रस्तुत किया था। कोर्ट ने पाया कि ये गार्ड्स फैक्ट्री में स्थायी प्रकृति (Permanent Nature) का काम कर रहे थे, लेकिन प्रबंधन ने जानबूझकर उन्हें ठेका श्रमिक बनाए रखा।
ट्रिब्यूनल की सख्त टिप्पणी: प्रबंधन की दलीलें खारिज
अदालत में मामले की पैरवी कर रहे विद्वान अधिवक्ता श्री राजेश कुमार चंद और श्री सुबोध कुमार ने जब पुख्ता सबूत पेश किए, तो प्रबंधन के पास कोई जवाब नहीं था। सीसीआई नयागांव फैसला सुनाते हुए ट्रिब्यूनल ने कई महत्वपूर्ण बिंदुओं को आधार बनाया:
ये सुरक्षा गार्ड पिछले लगभग 30 वर्षों से फैक्ट्री में लगातार सेवाएं दे रहे थे।
सबसे अहम बात यह थी कि इनका जीपीएफ (GPF) सीधे सीमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के खाते में जमा हो रहा था। यह इस बात का सीधा प्रमाण था कि वे मुख्य नियोक्ता (Principal Employer) के अधीन थे।
काम की प्रकृति और जिम्मेदारी पूरी तरह से नियमित कर्मचारियों जैसी थी।
न्यायाधिकरण ने प्रबंधन को कड़े निर्देश दिए हैं कि इस निर्णय की पालना करते हुए जल्द से जल्द ट्रिब्यूनल को सूचित किया जाए।
यूनियन नेताओं ने कहा- यह एकता की मिसाल है
फैसले की खबर मिलते ही श्रमिक नेताओं में भारी उत्साह देखा गया। सीटू (CITU) के प्रदेश सचिव कामरेड शैलेंद्र सिंह ठाकुर ने कहा, “यह सीसीआई नयागांव फैसला साबित करता है कि अगर मजदूर एकजुट हों, तो बड़ी से बड़ी सल्तनत को झुकना पड़ता है। प्रबंधन ने श्रम कानूनों का मखौल उड़ा रखा था, जिसे कोर्ट ने सही किया है।”
इस संघर्ष में जिला कार्यकारी अध्यक्ष किशोर जवेरिया, महासचिव सुनील शर्मा, इंटक काउंसिल के अध्यक्ष भगत वर्मा और सीमेंट श्रमिक संघ के निर्भय राम चौहान ने अहम भूमिका निभाई। संयुक्त ट्रेड यूनियन के शोभाराम धाकड़ ने कहा कि प्रबंधन द्वारा बार-बार अनदेखी किए जाने के बाद ही हमें कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा था।
दिल्ली हाईकोर्ट में चल रहे मामले पर असर
जानकारों का मानना है कि इस फैसले के दूरगामी परिणाम होंगे। गौरतलब है कि सीसीआई नयागांव फैक्ट्री को बंद करने की प्रक्रिया को चुनौती देने वाला एक और महत्वपूर्ण मामला वर्तमान में माननीय उच्च न्यायालय, दिल्ली में विचाराधीन है। श्रमिक संगठनों का कहना है कि जबलपुर ट्रिब्यूनल का यह सीसीआई नयागांव फैसला दिल्ली हाईकोर्ट में चल रहे मामले में भी श्रमिकों का पक्ष बेहद मजबूत करेगा। यह निर्णय प्रबंधन की कार्यप्रणाली और नीयत पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
श्रमिकों के चेहरों पर लौटी मुस्कान
जैसे ही यह खबर मिली, वर्षों से अनिश्चितता और डर के साये में जी रहे सुरक्षा गार्ड्स की आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े। भेरू सिंह राठौड़, बन्नू सिंह, गोपाल सिंह पंवार, भंवर सिंह चुंडावत, भगवत सिंह, रूप सिंह, धनीराम, इंद्रजीत और भंवरलाल सहित सभी 40 सुरक्षा कर्मियों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर बधाई दी। उन्होंने अपने संघर्षरत साथियों से अपील की है कि वे अपनी एकता बनाए रखें और प्रबंधन को निर्णय की प्रति सौंपकर शीघ्र कार्रवाई की मांग करें।
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