खबर का असर : धानुका सोया प्लांट पर बड़ी कार्रवाई: MPPCB टीम को मिले दूषित पानी और खामियाँ, किसान बोले- हमारी जीत!

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यह ख़बर ‘टाइम्स ऑफ एमपी’ की पहल और लगातार प्रयासों का परिणाम है, जिसने धानुका सोया प्लांट द्वारा प्रदूषण के नियमों के उल्लंघन के मामले को प्रमुखता से उठाया।

टाइम्स ऑफ एमपी कई दिनों से इस गंभीर प्रदूषण के मुद्दे पर सक्रिय था। प्लांट द्वारा खुले में दूषित केमिकल युक्त पानी छोड़े जाने और पर्यावरण नियमों की अनदेखी की शिकायतें PMO (प्रधानमंत्री कार्यालय) से लेकर CPCB (केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड) तक की गई थीं। आज नीमच के धानुका सोया प्लांट पर मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) की उज्जैन टीम का निरीक्षण इसी लगातार दबाव और रिपोर्टिंग का असर है।

नीमच, मध्य प्रदेश: नियमों को ताक पर रखकर प्रदूषण फैला रहे नीमच स्थित धानुका सोया प्लांट पर आखिरकार शिकंजा कस गया है। मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB), उज्जैन की तीन सदस्यीय टीम ने सोमवार को जमुनियाकलाँ स्थित प्लांट का अचानक निरीक्षण किया। इस कार्रवाई में मौके पर जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (ZLD) सिस्टम के नियमों का घोर उल्लंघन और खुले में दूषित पानी पाए जाने की गंभीर खामियाँ सामने आईं।

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मौके पर क्या-क्या पाया गया?

MPPCB उज्जैन के वरिष्ठ वैज्ञानिक (सीनियर साइंटिस्ट) और लैब हेड प्रद्युम्न खरे के नेतृत्व में आई टीम ने प्लांट परिसर और उससे प्रभावित बाहरी क्षेत्रों का बारीकी से निरीक्षण किया।

  • दूषित पानी: प्लांट की स्वामित्व वाली जमीन पर बड़े पैमाने पर पानी भरा हुआ मिला, जो फैक्ट्री से निकला दूषित पानी प्रतीत होता है। निरीक्षण दल को एक स्थान पर इंप्रेशन (निशान) भी मिला, जिससे यह स्पष्ट होता है कि पहले भी यहाँ दूषित पानी छोड़ा गया था।

  • सैंपल कलेक्शन: टीम ने फैक्ट्री से बाहर आए नाले, गांव के तालाब, और किसानों के दूषित हो चुके कुओं से पानी के नमूने एकत्र किए। इन नमूनों की जाँच उज्जैन की प्रयोगशाला में की जाएगी।

  • हरित क्षेत्र की कमी: पर्यावरण नियमों के अनुसार आवश्यक ग्रीन स्पेस डेवलपमेंट (हरित क्षेत्र) यानी पौधारोोपण भी नियमों के अनुसार नहीं पाया गया।

  • फैक्ट्री बंद: शिकायत की सूचना मिलते ही फैक्ट्री पूरे दिन बंद रही। किसानों और स्थानीय लोगों के अनुसार, प्रदूषण की स्थिति को छिपाने के लिए आनन-फानन में भरे हुए पानी को हटाने का प्रयास भी किया गया था।

अधिकारियों और किसानों का बयान

वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रद्युम्न खरे ने मीडिया को बताया कि शिकायतों और समाचार माध्यमों की ख़बरों के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। उन्होंने पुष्टि की कि फैक्ट्री परिसर के बाहर दूषित पानी पाया गया है। उन्होंने प्लांट प्रबंधन को व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के लिए टाइम-बाउंड प्रोग्राम (समयबद्ध कार्यक्रम) देने का निर्देश दिया है। जाँच रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को सौंपी जाएगी, जिसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

किसान और समाजसेवी नवीन खारोल ने पीसीबी टीम और मीडिया का धन्यवाद किया। उन्होंने आरोप लगाया कि धानुका सोया द्वारा छोड़ा गया केमिकल युक्त पानी उनके कुओं और खेतों को दूषित कर रहा है, जिससे फसलें प्रभावित हो रही हैं और बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। उन्होंने कलेक्टर हिमांशु चंद्रा और पीसीबी से सख्त कार्रवाई की उम्मीद जताई है।

आगे की रणनीति

MPPCB टीम ने पंचनामा बनाया है और जाँच रिपोर्ट जल्द ही उज्जैन मुख्यालय को सौंपी जाएगी। अब सबकी निगाहें पीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी दीपक काले और कलेक्टर पर टिकी हैं कि वे नियमों का उल्लंघन करने वाली इस फैक्ट्री पर कितनी सख्त कार्रवाई करते हैं। 

 

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