मनासा के वार्ड 15 में GBS की दहशत ? कलेक्टर ने खुद संभाली कमान , प्रभावित परिवारों के बीच पहुंचे

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मनासा/ नीमच 16 जनवरी: नीमच जिले के मनासा क्षेत्र में बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर पिछले कुछ दिनों से बनी चिंताजनक स्थिति के बाद प्रशासन अब पूरी तरह सक्रिय हो गया है । विशेष रूप से GBS गुइलेन-बैरे सिंड्रोम के संदिग्ध लक्षणों वाले मामले सामने आने के बाद जिला कलेक्टर हिमांशु चंद्रा शुक्रवार सुबह खुद मनासा के वार्ड नंबर 15 रामनगर की गलियों में उतरे ।

कलेक्टर का यह दौरा महज एक औपचारिकता नहीं था , बल्कि उन्होंने सीधे प्रभावित परिवारों के घर जाकर उनकी स्थिति का जायजा लिया और अधिकारियों को सख्त लहजे में काम करने की हिदायत दी ।

बच्ची सिद्धी और बालक यथार्थ की सेहत पर कलेक्टर का ध्यान

कलेक्टर हिमांशु चंद्रा सबसे पहले रामनगर मोहल्ले के उस घर में पहुंचे जहाँ मासूम सिद्धी पिता कमल बडोदिया बीमार है । बच्ची के पैरों में कमजोरी और दर्द की शिकायत के बाद से ही परिवार दहशत में था । कलेक्टर ने परिजनों के साथ बैठकर उनकी पूरी आपबीती सुनी । परिजनों ने प्रशासन को बताया कि उपचार मिलने के बाद अब सिद्धी की स्थिति में काफी सुधार है । इसके तुरंत बाद प्रशासन का काफिला बालक यथार्थ पिता दिनेश नायक के घर पहुँचा ।

यहाँ भी कलेक्टर ने यथार्थ की उपचार व्यवस्था के बारे में जानकारी ली । यथार्थ के परिजनों ने बताया कि अब वह पहले से बेहतर महसूस कर रहा है । मोहल्ले के निवासियों ने चर्चा में स्पष्ट किया कि फिलहाल यथार्थ और सिद्धी ही इस समस्या से प्रभावित थे , बाकी अन्य सदस्य और मोहल्ले के लोग पूरी तरह स्वस्थ हैं ।

पाइपलाइन और पशु सैंपलिंग कलेक्टर के 5 कड़े निर्देश

दौरे के दौरान कलेक्टर हिमांशु चंद्रा का रुख बेहद कड़ा नजर आया । उन्होंने जल आपूर्ति और स्वच्छता व्यवस्था को लेकर स्थानीय नगर परिषद और स्वास्थ्य अधिकारियों की जवाबदेही तय की । पाइपलाइन की खुदाई और जांच कलेक्टर ने सीएमओ को निर्देश दिए कि प्रभावित क्षेत्र में जा रही नल-जल पाइपलाइन की गहराई से जांच की जाए । अगर कहीं भी लीकेज पाया जाता है , तो उसे तत्काल ठीक करें ताकि दूषित जल की आपूर्ति की रत्ती भर भी संभावना न रहे ।

पशुओं की सैंपलिंग GBS के ट्रिगर पॉइंट्स को ध्यान में रखते हुए , कलेक्टर ने उप संचालक पशुपालन को निर्देश दिए कि क्षेत्र में मुर्गी पालन और बकरी पालन कर रहे लोगों के यहाँ से पशुओं के सैंपल लिए जाएं और उनकी लैब टेस्टिंग करवाई जाए । खाद्य सुरक्षा अभियान मनासा शहर में विभिन्न खाद्य संस्थानों और होटलों की जांच के लिए खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को मैदान में उतारा गया है । उन्हें निर्देश दिए गए हैं कि वे खाद्य सामग्रियों के सैंपल लेकर तत्काल जांच के लिए भेजें ।

डोर-टू-डोर सर्वे

स्वास्थ्य विभाग की टीमें पूरे मनासा के वार्डों में घर-घर जाकर सर्वे कर रही हैं ताकि अगर किसी और बच्चे में GBS जैसे लक्षण दिखें , तो समय पर इलाज शुरू किया जा सके । जल स्रोतों का शुद्धीकरण कलेक्टर ने शहर के सभी जल स्रोतों के शुद्धीकरण कार्य में तेजी लाने और क्लोरीन की पर्याप्त मात्रा सुनिश्चित करने को कहा है ।

विशेषज्ञों की राय ‘GBS’ संक्रामक नहीं , पर सावधानी ही समाधान

इस पूरे मामले पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी CMHO डॉ. आर.के. खद्योत ने बताया कि GBS कोई संक्रामक बीमारी नहीं है जो एक से दूसरे व्यक्ति में फैले , इसलिए जनता को घबराने या पैनिक करने की जरूरत नहीं है । उन्होंने कहा कि एहतियात के तौर पर नागरिकों को पानी उबालकर पीना चाहिए । स्वास्थ्य विभाग की टीमें , जिनमें भोपाल IDHP के कंसल्टेंट शैलेंद्र सिंह और उज्जैन के उप संचालक डॉ. सैया शामिल हैं , लगातार स्थिति की मॉनिटरिंग कर रही हैं ।

इस भ्रमण के दौरान एसडीएम सुश्री किरण आंजना , तहसीलदार मुकेश निगम और चिकित्सकों की एक बड़ी टीम मौजूद रही । प्रशासन का संदेश साफ है—लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी । नागरिकों से अपील है कि यदि शरीर में किसी भी तरह की कमजोरी या दर्द महसूस हो , तो उसे नजरअंदाज न करें और तुरंत नजदीकी अस्पताल में डॉक्टर से संपर्क करें । GBS जैसी स्थितियों में समय पर इलाज ही सबसे कारगर हथियार है ।


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