Neemuch: 21 साल की उम्र में देश पर कुर्बान, हेमू कालानी शहादत दिवस पर नम आँखों से याद किया गया बलिदान

हेमू कालानी शहादत दिवस
नीमच: भारत माँ की आजादी की कीमत चुकाने के लिए न जाने कितने वीरों ने अपने प्राणों की आहुति दी है, लेकिन कुछ बलिदान ऐसे होते हैं जो सदियों तक दिलों में धड़कते रहते हैं। मंगलवार को नीमच शहर में एक ऐसा ही भावुक और गर्व से भरा माहौल देखने को मिला। मौका था अमर शहीद हेमू कालानी शहादत दिवस का, जिसे सिंधी समाज और शहर के नागरिकों ने पूरी श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया।
पूज्य सिंधी पंचायत के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में देशभक्ति का ऐसा ज्वार उठा कि वहां मौजूद हर शख्स की आँखें नम और सीना गर्व से चौड़ा हो गया। शहर के मुख्य हेमू कालानी चौराहे पर आयोजित इस श्रद्धांजलि सभा ने साबित कर दिया कि नीमच के लोग अपने शहीदों को कभी नहीं भूलते।
हेमू कालानी शहादत दिवस पर गूंजे ‘अमर रहे’ के नारे
मंगलवार की सुबह जैसे ही सूरज की किरणें धरती पर पड़ीं, नीमच का हेमू कालानी चौराहा देशभक्ति के रंग में रंगना शुरू हो गया। हेमू कालानी शहादत दिवस के अवसर पर समाज के बच्चे, बूढ़े और नौजवान बड़ी संख्या में एकत्रित हुए। कार्यक्रम की शुरुआत शहीद हेमू कालानी की आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण और पुष्प वर्षा के साथ हुई।
ढोल-नगाड़ों की जगह आज फिजाओं में ‘इंकलाब जिंदाबाद’ और ‘हेमू कालानी अमर रहे’ के नारे गूंज रहे थे। सिंधी समाज के वरिष्ठ जनों ने प्रतिमा पर फूल चढ़ाकर उस वीर सपूत को नमन किया, जिसने अपनी जवानी के सुनहरे दिन जेल की कालकोठरी और फांसी के फंदे को समर्पित कर दिए।
वक्ताओं ने बयां की 21 जनवरी की वो दास्तां
श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने इतिहास के पन्नों को पलटा और बताया कि आखिर क्यों हेमू कालानी शहादत दिवस हमारे लिए इतना महत्वपूर्ण है। वक्ताओं ने भावुक होते हुए बताया, “जब हेमू कालानी को फांसी दी गई, तब उनकी उम्र मात्र 21 वर्ष थी। यह वह उम्र होती है जब युवा अपने करियर और सपनों के पीछे भागते हैं, लेकिन हेमू कालानी ने देश की आजादी के सपने को अपना सब कुछ मान लिया था।”
अंग्रेजों की क्रूरता का जिक्र करते हुए बताया गया कि 21 जनवरी 1943 को उन्हें फांसी दी गई थी। इतनी कम उम्र में देश के लिए प्राण न्योछावर करने का यह जज्बा आज की पीढ़ी के लिए एक मिसाल है। वक्ताओं ने कहा कि उनका बलिदान पूरे देश के लिए प्रेरणा है और सिंधी समाज हर साल 21 जनवरी को उनकी याद में नतमस्तक होता है।
युवा शक्ति ने ली प्रेरणा: समाज हित सर्वोपरि
इस बार के हेमू कालानी शहादत दिवस कार्यक्रम की सबसे खास बात यह रही कि इसमें युवाओं की भागीदारी देखते ही बन रही थी। कार्यक्रम में मौजूद वक्ताओं ने युवाओं से सीधा संवाद किया। उन्होंने कहा कि असली श्रद्धांजलि केवल फूल चढ़ाना नहीं है, बल्कि शहीद के दिखाए रास्ते पर चलना है।
सिंधी पंचायत के पदाधिकारियों ने कहा, “हेमू कालानी की वीरता और देशभक्ति को याद करते हुए हमें यह संकल्प लेना होगा कि हम समाज और देश के हित में काम करेंगे। देश की एकता और अखंडता ही हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए।”
देश सेवा और समाज उत्थान का संकल्प
कार्यक्रम के अंत में एक सामूहिक संकल्प लिया गया। उपस्थित जनसमूह ने हाथ आगे बढ़ाकर शहीद हेमू कालानी की प्रतिमा के सामने कसम खाई कि वे अपने वीर पूर्वजों के बलिदान को व्यर्थ नहीं जाने देंगे। समाज के वरिष्ठ लोगों ने युवाओं को प्रेरित किया कि वे शिक्षा, सेवा और समर्पण के क्षेत्र में आगे बढ़ें।
नीमच में मनाए गए इस हेमू कालानी शहादत दिवस ने एक बार फिर यह सन्देश दिया कि जब तक भारतवर्ष है, हेमू कालानी जैसे वीरों का नाम सुनहरे अक्षरों में चमकता रहेगा। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान और भारत माता के जयकारों के साथ हुआ।
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