दिल दहला देने वाली घटना: लगातार मौतों से टूटकर महिला ने किया सुसाइड, फांसी लगाने से ठीक पहले पति को किया वीडियो कॉल

इंदौर। शहर के एरोड्रम थाना क्षेत्र स्थित आराधना नगर में बुधवार शाम एक 24 वर्षीय महिला ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। पारिवारिक जीवन में लगातार हुई त्रासदियों और मौतों के सदमे ने महिला को इस कदर तोड़ दिया था कि वह लंबे समय से गहरे अवसाद (डिप्रेशन) में थी।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, मृतक महिला का नाम मुस्कान खेडेकर है। आत्महत्या करने से कुछ देर पहले मुस्कान ने अपने पति शिवा खेडेकर को वीडियो कॉल किया था।
वीडियो कॉल पर पति ने देखा खौफनाक मंज़र
पति शिवा खेडेकर उस समय तीन इमली क्षेत्र में काम पर थे। शिवा ने पुलिस को बताया कि जैसे ही उन्होंने डेटा ऑन किया, मुस्कान का वीडियो कॉल आया। कॉल के दौरान मुस्कान ने आवाज़ बंद कर दी और फांसी का फंदा लगाने की कोशिश करने लगी। यह देखते ही घबराए पति ने तुरंत कॉल काटा और अपने मालिक को सूचना दी। मालिक ने तुरंत एक परिचित को मुस्कान के घर भेजा, लेकिन जब तक वे पहुँचे, तब तक मुस्कान की मौत हो चुकी थी।
बच्चे को सुलाकर लगाया फंदा
मुस्कान ने आत्महत्या से पहले अपने 5 साल के मासूम बच्चे को सुला दिया था। पति शिवा ने बताया कि उनकी शादी को दो साल हुए थे। मुस्कान पहले से शादीशुदा थी, लेकिन उसके पहले पति की सड़क हादसे में मौत हो गई थी।
‘जीने का क्या मतलब है?’: पारिवारिक त्रासदी बनी वजह
पति शिवा ने पुलिस को बताया कि मुस्कान पिछले कुछ दिनों से अत्यधिक तनाव में थी। पिछले कुछ समय में उसके परिवार में लगातार कई मौतें हुई थीं, जिसने उसे मानसिक रूप से तोड़ दिया था:
तीन दिन पहले: अशोक नगर (गुना) में रहने वाली बुआ का बीमारी से निधन।
एक साल पहले: एक सगे भाई की सड़क हादसे में मौत।
कुछ समय पहले: दूसरे भाई ने आत्महत्या कर ली थी।
कई साल पहले: पिता का निधन।
इन घटनाओं के कारण मुस्कान अक्सर कहती थी, “जब परिवार के लोग ऐसे ही मर रहे हैं तो मेरे जीने का क्या मतलब है।”
एसआई एम. कुजुर ने बताया कि महिला की मौत फांसी लगाने से हुई है। परिजनों के बयान लिए गए हैं और मामले की विस्तृत जांच की जा रही है ताकि आत्महत्या के सही कारणों की पुष्टि हो सके।
द टाइम्स ऑफ़ एमपी दर्शकों से अपील: जीवन अनमोल है, आशा न खोएं
इस हृदय विदारक घटना ने हम सभी को झकझोर दिया है। हम समझते हैं कि जब जीवन में सब कुछ खत्म होता दिखता है, तो निराशा और अकेलापन बहुत गहरा हो जाता है।
लेकिन, हम आपसे हाथ जोड़कर अपील करते हैं:
- जीवन अनमोल है: कृपया याद रखें, आपका जीवन अमूल्य है। दुःख चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, यह स्थायी नहीं होता। समय के साथ हर घाव भरता है।
- मदद मांगना कमजोरी नहीं: यदि आप गहरे संकट या अवसाद में हैं, तो चुप न रहें। मदद मांगना कमजोरी नहीं, बल्कि हिम्मत का सबसे बड़ा प्रमाण है।
- आप अकेले नहीं हैं: आपके आसपास ऐसे लोग हैं जो आपकी परवाह करते हैं और आपकी मदद करना चाहते हैं—दोस्त, परिवार, या प्रोफेशनल काउंसलर।
अगर आप मुश्किल में हैं, तो तुरंत संपर्क करें:
भारत में उपलब्ध सुसाइड प्रिवेंशन हेल्पलाइन या किसी मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट से बात करें। बस एक कॉल आपको अंधेरे से बाहर निकाल सकती है।
आसरा हेल्पलाइन: 022 2754 6669 (कृपया यह नंबर सेव करें और ज़रूरत पड़ने पर या किसी और की ज़रूरत होने पर उपयोग करें।)
याद रखें, आशा हमेशा बाकी रहती है। कोई भी कदम उठाने से पहले, कृपया एक बार बात ज़रूर करें। हम आपके साथ हैं।
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