Indore Water Contamination: 14 की मौत, पानी में मिला मानव मल, लैब रिपोर्ट में खौफनाक सच

Indore Water Contamination
इंदौर (The Times of MP): देश के सबसे स्वच्छ शहर का गौरव हासिल करने वाले इंदौर के माथे पर एक कलंक का दाग लग गया है। शहर के भागीरथपुरा इलाके में Indore Water Contamination (दूषित पानी) की वजह से मची तबाही ने पूरे मध्य प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। प्रशासन की घोर लापरवाही और सिस्टम की खामियों के चलते 14 बेगुनाह लोगों की जान चली गई है, जबकि हजारों लोग बीमारी से जूझ रहे हैं। गुरुवार को सामने आई लैब रिपोर्ट ने जो खुलासा किया है, वह न केवल चौंकाने वाला है बल्कि डरावना भी है।
Indore Water Contamination (दूषित पानी) लैब रिपोर्ट में पुष्टि: नलों में बह रहा था ‘जहर’
एमजीएम मेडिकल कॉलेज और नगर निगम की संयुक्त लैब जांच रिपोर्ट ने प्रशासन के दावों की पोल खोल दी है। रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ है कि भागीरथपुरा के रहवासियों को नर्मदा जल के नाम पर मानव मल-मूत्र मिला पानी पिलाया जा रहा था। पानी के सैंपल्स में ई-कोलाई (E. coli) और शिगेला (Shigella) जैसे बेहद घातक बैक्टीरिया पाए गए हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, ये बैक्टीरिया सीधे तौर पर मानव मल (Human Waste) में पाए जाते हैं और शरीर में प्रवेश करते ही आंतों को बुरी तरह संक्रमित कर देते हैं। इस भयावह Indore Water Contamination की पुष्टि स्वयं इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. माधव प्रसाद हसानी ने की है।
पुलिस चौकी के पास से घुली मौत
Indore Water Contamination (दूषित पानी) इस पूरी त्रासदी की जड़ भागीरथपुरा में स्थित एक पुलिस चौकी के पास मिली है। जांच में सामने आया कि पुलिस चौकी के पास बने एक सार्वजनिक शौचालय के ठीक नीचे से पीने के पानी की मुख्य पाइपलाइन गुजर रही थी। इस पाइपलाइन में लीकेज था, जिसके कारण शौचालय की गंदगी और सीवरेज का पानी सीधे पेयजल लाइन में मिल गया।
यही ‘जहर’ युक्त पानी पिछले कई दिनों से लोगों के घरों में सप्लाई हो रहा था। रहवासी अनजाने में जिस पानी को जीवन समझकर पी रहे थे, वही उनकी मौत का कारण बन गया। यह घटना बताती है कि इंफ्रास्ट्रक्चर की देखरेख में किस स्तर की लापरवाही बरती गई है।
डराने वाले आंकड़े: श्मशान से अस्पताल तक हाहाकार
Indore Water Contamination का असर इतना व्यापक है कि अस्पतालों में बेड कम पड़ गए हैं। अब तक के आंकड़े किसी महामारी से कम नहीं हैं:
मौतें: गुरुवार को इलाज के दौरान एक और मरीज ने दम तोड़ दिया, जिससे मरने वालों का सरकारी आंकड़ा 14 पहुंच गया है। स्थानीय लोगों का दावा है कि संख्या इससे अधिक हो सकती है।
गंभीर मरीज: 32 मरीज अभी भी आईसीयू (ICU) में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं। उनकी हालत नाजुक बनी हुई है।
कुल पीड़ित: इलाके में अब तक करीब 2800 मरीज सामने आ चुके हैं। वर्तमान में 201 मरीजों का शहर के विभिन्न सरकारी और निजी अस्पतालों में इलाज चल रहा है।
सर्वे रिपोर्ट: स्वास्थ्य विभाग ने 1714 घरों का सर्वे किया, जिसमें 8571 लोगों की स्क्रीनिंग की गई। इनमें से सैकड़ों लोगों में उल्टी-दस्त और बुखार के लक्षण पाए गए।
मंत्री का घेराव: लोगों का फूटा गुस्सा
कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय जब गुरुवार को पीड़ित परिवारों का दर्द बांटने पहुंचे, तो उन्हें भारी जनआक्रोश का सामना करना पड़ा। मंत्री ने चार मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये की सहायता राशि के चेक सौंपे। लेकिन रहवासियों ने आरोप लगाया कि प्रशासन अपनी नाकामी छिपाने के लिए मौतों के वास्तविक आंकड़े दबा रहा है।
विजयवर्गीय ने माना कि यह एक बड़ी प्रशासनिक चूक है और उन्होंने भरोसा दिलाया कि Indore Water Contamination के दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। हालांकि, जनता का सवाल अब भी वही है कि क्या मुआवजे से अपनों की जान वापस आ सकती है?
हाई कोर्ट और मानवाधिकार आयोग सख्त
Indore Water Contamination (दूषित पानी) मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। आयोग ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि स्वच्छ शहर में ऐसी घटना नागरिकों के मानवाधिकारों का हनन है। दूसरी ओर, इंदौर हाई कोर्ट में लगी जनहित याचिकाओं पर भी शासन को स्टेटस रिपोर्ट पेश करनी है। कोर्ट ने पूछा है कि मरीजों के निशुल्क उपचार के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।
Indore Water Contamination से सबक: पूरे MP के लिए बनेगा नया SOP
इस त्रासदी ने मध्य प्रदेश सरकार को नींद से जगा दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कड़े निर्देशों के बाद अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) संजय दुबे ने प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया। उन्होंने घोषणा की है कि भविष्य में Indore Water Contamination जैसी घटनाओं को रोकने के लिए पूरे राज्य के लिए एक सख्त SOP (Standard Operating Procedure) तैयार किया जाएगा।
इस नए प्रोटोकॉल के तहत यह सुनिश्चित किया जाएगा कि पेयजल पाइपलाइन और सीवरेज लाइन के बीच सुरक्षित दूरी हो और उनकी नियमित जांच की जाए। फिलहाल, भागीरथपुरा में वैकल्पिक माध्यमों से साफ पानी की सप्लाई शुरू कर दी गई है और लोगों को पानी उबालकर पीने की सख्त हिदायत दी गई है।
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