Karni Sena Harda Protest: 21 सूत्रीय मांगों का रण, 11 घंटे का हाई-वोल्टेज ड्रामा और नई सियासी पार्टी का उदय; जानें हरदा आंदोलन की पूरी इनसाइड स्टोरी

Karni Sena Harda Protest
हरदा। मध्य प्रदेश के हरदा जिले में स्थित नेहरू स्टेडियम 21 दिसंबर को एक बड़े सामाजिक और राजनीतिक बदलाव का केंद्र बना। Karni Sena Harda Protest के बैनर तले जुटे हजारों युवाओं और पदाधिकारियों ने प्रशासन की चूलें हिला दीं। करीब 20 हजार लोगों की मौजूदगी में 11 घंटे तक चले इस Karni Sena Harda Protest ने अंततः प्रशासन को झुकने पर मजबूर कर दिया। हालांकि, यह आंदोलन केवल एक प्रमुख मांग के पूरा होने पर समाप्त हुआ, लेकिन जाते-जाते संगठन ने मध्य प्रदेश की राजनीति में एक नया ‘तीसरा मोर्चा’ खोलने का ऐतिहासिक ऐलान कर दिया है।
Karni Sena Harda Protest की शुरुआत और प्रमुख चेहरे
शनिवार सुबह 7 बजे से ही हरदा के नेहरू स्टेडियम में करणी सैनिकों का सैलाब उमड़ने लगा था। इस Karni Sena Harda Protest को सफल बनाने के लिए राजस्थान से महिपाल सिंह मकराना और उत्तर प्रदेश से सूरजपाल अम्मू जैसे दिग्गज नेता हरदा पहुंचे थे। करणी सेना परिवार के प्रमुख जीवन सिंह शेरपुर ने सुबह 11 बजे आमरण अनशन शुरू किया। उन्होंने मंच से दहाड़ते हुए कहा कि यह Karni Sena Harda Protest केवल किसी एक जाति का नहीं, बल्कि सर्व समाज की उन 21 मांगों के लिए है जिन्हें सरकार लंबे समय से अनसुना कर रही है।
जुलाई लाठीचार्ज का वो जख्म और आक्रोश
इस पूरे Karni Sena Harda Protest का मुख्य केंद्र बिंदु इसी साल जुलाई में हरदा पुलिस द्वारा किया गया लाठीचार्ज था। उस दौरान पुलिस ने जीवन सिंह शेरपुर सहित कई पदाधिकारियों को गिरफ्तार किया था और उन पर लाठियां भांजी थीं। तभी से करणी सेना दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग कर रही थी। पदाधिकारियों का कहना था कि जब तक दोषियों पर गाज नहीं गिरेगी, यह Karni Sena Harda Protest थमेगा नहीं।
3 बजे की डेडलाइन और प्रशासनिक हलचल
जीवन सिंह शेरपुर ने प्रशासन को दोपहर 3 बजे तक का समय दिया था। जब तय समय तक कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ, तो Karni Sena Harda Protest में शामिल युवाओं का गुस्सा बढ़ने लगा। राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना ने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर विचार नहीं हुआ, तो वे दिल्ली और भोपाल को घेर लेंगे। स्थिति को बिगड़ता देख जिला प्रशासन ने आनन-फानन में करणी सेना के 7 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को चर्चा के लिए होटल बुलाया। इस बीच स्टेडियम में हजारों कार्यकर्ताओं ने हनुमान चालीसा का पाठ शुरू कर दिया, जिससे माहौल और अधिक गंभीर हो गया।
भोपाल के ‘विश्वासघात’ की कहानी
आंदोलन के दौरान पूर्व संगठन महामंत्री शैलेंद्र सिंह झाला ने याद दिलाया कि कैसे 8 जनवरी 2023 को भोपाल के जंबूरी मैदान में हुए आंदोलन को सरकार ने धोखे से खत्म कराया था। उन्होंने बताया कि तत्कालीन मंत्री अरविंद भदौरिया ने 18 मांगों पर सहमति जताई थी और एक कमेटी बनाई थी, लेकिन बाद में सरकार अपने वादों से पलट गई। यही कारण था कि इस बार Karni Sena Harda Protest में कार्यकर्ता लिखित आश्वासन और ठोस कार्रवाई पर अड़े रहे।
समझौता: 5 पुलिसकर्मी लाइन अटैच, मजिस्ट्रियल जांच शुरू
रात 8 बजे तक चली जद्दोजहद के बाद प्रशासन ने घुटने टेक दिए। प्रशासन ने जुलाई लाठीचार्ज के मामले में मजिस्ट्रियल जांच के आदेश जारी किए और 5 पुलिस अधिकारियों को लाइन हाजिर (PHQ भोपाल) कर दिया। जीवन सिंह शेरपुर ने कहा, “प्रशासन ने हमारी एक बड़ी मांग मान ली है, जो उनके अधिकार क्षेत्र में थी। बाकी 20 मांगों के लिए राज्य और केंद्र सरकार से लड़ाई जारी रहेगी।” इसी आश्वासन के साथ 11 घंटे से चला आ रहा यह Karni Sena Harda Protest समाप्त हुआ।
नई राजनीतिक पार्टी का ऐतिहासिक ऐलान
इस Karni Sena Harda Protest का सबसे चौंकाने वाला परिणाम तब सामने आया जब मंच से नई राजनीतिक पार्टी बनाने की घोषणा की गई। जीवन सिंह शेरपुर ने कार्यकर्ताओं से पूछा कि क्या अब हमें अपना दल बनाना चाहिए? सर्वसम्मति से मिले समर्थन के बाद उन्होंने कहा कि अब करणी सेना चुनाव लड़ेगी और अपनी बात सदन में खुद उठाएगी। उन्होंने आरएसएस और भाजपा का उदाहरण देते हुए कहा कि अब करणी सैनिक अपनी बुद्धि और बल से सत्ता की दिशा बदलेंगे।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
हरदा एसपी शशांक जैन ने पुष्टि की कि Karni Sena Harda Protest के दौरान शांति व्यवस्था बनी रही। उन्होंने बताया कि प्रदर्शनकारियों की मांग पर जुलाई की घटना की मजिस्ट्रियल जांच शुरू कर दी गई है और जांच प्रभावित न हो, इसके लिए संबंधित पुलिसकर्मियों को पीएचक्यू में लाइन अटैच किया गया है।

