‘हारे का सहारा’ बने श्याम बाबा! नीमच में कल से 3 दिवसीय विराट उत्सव

Neemuch Naresh

देवउठनी एकादशी पर मनेगा बाबा श्याम का जन्मोत्सव!

नीमच (म.प्र.)। नीमच के भक्तों के लिए इस साल की देवउठनी एकादशी दोगुनी खुशी लेकर आई है। शहर के तिलक मार्ग स्थित प्राचीन श्री श्याम मंदिर में 31 अक्टूबर 2025 से 02 नवंबर 2025 तक तीन दिवसीय भव्य महोत्सव आयोजित किया जा रहा है, जिसका मुख्य कारण देवउठनी एकादशी के साथ-साथ खाटू श्याम बाबा का जन्मोत्सव (पाटोत्सव) भी है।

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आयोजकों, श्री प्राचीन श्री श्याम मंदिर, श्री बावड़ी वाले बालाजी मंदिर समिति ने पुष्टि की कि यह आयोजन बाबा श्याम के अवतरण दिवस को समर्पित है, जो इसे नीमच का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन बना रहा है।

उत्सव का महासंगम: देवउठनी और जन्मोत्सव (01 नवंबर)

कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवउठनी एकादशी के रूप में मनाया जाता है, जब भगवान विष्णु चार माह की योगनिद्रा से जागते हैं। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इसी शुभ तिथि पर महाभारत काल के वीर बर्बरीक (जिन्हें भगवान श्रीकृष्ण से कलियुग में श्याम नाम से पूजे जाने का वरदान मिला) का जन्म हुआ था।

इस ऐतिहासिक अवसर पर मंदिर में होने वाले मुख्य कार्यक्रम:

तीन दिवसीय भक्तिमय कार्यक्रम:

  1. शुभारंभ (31 अक्टूबर, शुक्रवार): महोत्सव की शुरुआत 31 अक्टूबर की रात ढोल-ढमाकों और डीजे के साथ भव्य आतिशबाजी से होगी। मंदिर परिसर में भक्तों द्वारा जन्मोत्सव का शुभारंभ किया जाएगा। 
  2. जन्मोत्सव (01 नवंबर, शनिवार): मुख्य दिवस पर मंदिर में होगा अलौकिक श्रृंगार दर्शन
    मंदिर परिसर को वृंदावन की तर्ज पर फूल बंगले और विद्युत साज-सज्जा से सजाया जाएगा।
    शाम 7 बजे से होगी संध्या महाआरती, जिसके पश्चात श्रद्धालुओं को फलाहारी प्रसाद एवं महाभोज का वितरण किया जाएगा
  3. समापन (02 नवंबर, रविवार): महोत्सव के अंतिम दिन मंदिर परिसर में बारस की पावन ज्योत प्रज्वलित की जाएगी। इसके पश्चात भक्तिरस से ओत-प्रोत श्री श्याम संकीर्तन कार्यक्रम का आयोजन होगा। इस अवसर पर प्रसिद्ध भजन गायक नवीन जी वैष्णव (प्रतापगढ़) और संजय जी व्यास (प्रतापगढ़) अपने भजनों से वातावरण को श्याममय बनाएंगे।


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धार्मिक पृष्ठभूमि एवं तिथि का महत्व:

खाटू श्याम जी को वरदान देने की निश्चित तिथि विभिन्न धार्मिक मान्यताओं में अलग-अलग बताई गई है, परंतु इसका मूल संबंध महाभारत युद्ध के उस प्रसंग से है, जब बर्बरीक ने भगवान श्रीकृष्ण के कहने पर अपना शीश दान किया था।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार:

  • फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी या द्वादशी को कुछ मान्यताओं में वह तिथि माना गया है, जब बर्बरीक ने अपना शीश दान किया था। इसी बलिदान से प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण ने उन्हें वरदान दिया कि वे कलियुग में ‘श्याम नाम’ से पूजे जाएंगे।

  • वहीं कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी (देवउठनी एकादशी) को बाबा श्याम का अवतरण दिवस या जन्मोत्सव माना जाता है, क्योंकि इसी दिन उनका शीश खाटू धाम में सुशोभित किया गया था।
    यह दिन श्याम भक्तों के लिए अत्यंत पवित्र और शुभ माना जाता है।

उल्लेख :

इस कथा का उल्लेख पौराणिक ग्रंथों, लोक कथाओं और महाभारत की उपकथाओं में मिलता है, जहाँ बर्बरीक को भीम के पौत्र और घटोत्कच के पुत्र के रूप में वर्णित किया गया है।
कथा के अनुसार, बर्बरीक के पास तीन अचूक बाण थे और वे युद्ध में ‘हारे हुए पक्ष’ का साथ देने का वचन निभा रहे थे। तब श्रीकृष्ण ने ब्राह्मण वेश में उनसे उनका शीश दान माँगा, और उनके इस बलिदान से प्रसन्न होकर उन्हें यह वरदान दिया कि कलियुग में वे हारे का सहारा श्याम कहलाएँगे।

मंदिर का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व:

नीमच का प्राचीन श्री बावड़ी वाले बालाजी मंदिर क्षेत्र में गहरी आस्था का केंद्र है। मान्यता है कि यह मंदिर दशकों पुराना है, जहाँ सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूरी होती है। मंदिर परिसर में स्थित प्राचीन बावड़ी का भी विशेष महत्व है, जिसके कारण बालाजी को ‘बावड़ी वाले’ कहा जाता है। यह महोत्सव न केवल धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि भक्तों के लिए बाबा श्याम और बालाजी की कृपा प्राप्त करने का एक महासंगम है।

श्री प्राचीन श्री श्याम मंदिर, श्री बावड़ी वाले बालाजी मंदिर समिति ने सभी श्याम प्रेमियों से अपील की है कि वे इस ऐतिहासिक जन्मोत्सव में शामिल होकर बाबा श्याम का आशीर्वाद लें, क्योंकि इस दिन बाबा के दरबार में हाजिरी लगाने से भक्तों के सभी कष्ट दूर होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

उपरोक्त जानकारी मंदिर के पुजारी गोपाल कृष्ण शर्मा (मंदिर संचालक एवं प्रबंधक) द्वारा दी गई।

 

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