‘द टाइम्स ऑफ एमपी’ एक्सक्लूसिव: Mama Basti Food Crisis: 4 दिन से भूखे बच्चे प्रधानाध्यापक मोहनलाल धाकड़ घर ले गए बच्चों का निवाला, DEO दे रहे ‘शिफ्ट’ की दलील

Mama Basti Food Crisis
ग्राउंड जीरो से रिपोर्ट: राजेश कोठारी (‘द टाइम्स ऑफ एमपी’)
नीमच/सिंगोली: 21वीं सदी के ‘डिजिटल इंडिया’ के दावों के बीच मध्य प्रदेश के नीमच जिले से जो तस्वीर सामने आई है, वह शर्मनाक है। यहाँ सिंगोली क्षेत्र की एक आदिवासी बस्ती में सिस्टम का जातिवादी और क्रूर चेहरा उजागर हुआ है। आलम यह है कि सिंगोली में Mama Basti Food Crisis 4 दिन से भूखे बच्चे स्कूल आ रहे हैं और खाली पेट वापस लौट रहे हैं, क्योंकि उनके हिस्से का सरकारी राशन प्रधानाध्यापक अपने घर ले गए हैं।
‘द टाइम्स ऑफ एमपी’ (The Times of MP) की ग्राउंड रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि यह महज एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि गरीब बच्चों के निवाले पर डाला गया निर्लज्ज डाका है।
आदिवासी बचपन पर ‘सामंती’ प्रहार: 96 घंटे से चूल्हा बंद
Mama Basti Food Crisis ग्राउंड जीरो पर स्थिति बेहद दयनीय है। शुक्रवार, शनिवार और सोमवार बीत चुके हैं। आज मंगलवार है, यानी पूरे 4 दिन हो चुके हैं। Mama Basti Food Crisis में 4 दिन से भूखे बच्चे रोज अपनी थाली लेकर स्कूल की दहलीज पर उम्मीद लेकर आते हैं, लेकिन उन्हें निराशा हाथ लगती है।
स्कूल के शिक्षक भेरूलाल खाटकी ने जो बताया, वह दमन का सीधा सबूत है। उन्होंने कहा:
“शुक्रवार से ही खाना बनना बंद है। प्रधानाध्यापक मोहनलाल धाकड़ (Mohanlal Dhakad) राशन सामग्री, तेल और बर्तन यहां से अपने घर ले गए हैं।”
यह कृत्य दर्शाता है कि एक सरकारी मुलाजिम को कानून का कोई डर नहीं है, शायद इसलिए क्योंकि पीड़ित पक्ष कमजोर आदिवासी समुदाय से है।
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DEO की संवेदनहीनता: 4 दिन से भूखे बच्चे, अधिकारी दे रहे ‘शिफ्ट’ की दलीलें
जब 4 दिन बीत जाने के बाद भी प्रशासन की नींद नहीं टूटी, तो हमने जिले के सबसे बड़े जिम्मेदार अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) सुजनमल मांगरिया से सवाल किया।
Mama Basti Food Crisis में 4 दिन से भूखे बच्चे हैं, इस पर तत्काल राशन भिजवाने के बजाय DEO साहब ने बेतुका तर्क दिया:
“स्कूल दो शिफ्ट में चल रहा है… वहां पंचायत भवन में शिफ्टिंग को लेकर कुछ विवाद (Controversy) है… हम जांच करवाएंगे।”
हमारा सवाल: DEO साहब, क्या “शिफ्ट” या “विवाद” के नाम पर बच्चों का खाना रोका जा सकता है? जब आपके ही विभाग का हेडमास्टर राशन चोरी कर रहा है, तो आप उसे बचाने के लिए ‘शिफ्ट’ का बहाना क्यों बना रहे हैं? यह जातिवादी मानसिकता को संरक्षण देना नहीं तो और क्या है?
सिस्टम का नकारापन और बर्बाद होता भविष्य
मामा बस्ती के ग्रामीण दिनेश भाबर का आक्रोश फूट पड़ा है। उन्होंने व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा,
“यह सब गंदी राजनीति और प्रशासन की अनदेखी के कारण हो रहा है। पहले हमसे पक्का स्कूल भवन छीना गया,
हमें सुविधाओं से वंचित किया गया और अब हमारे बच्चों को 4 दिन से भूखा मारा जा रहा है। आखिर गरीब के बच्चे जाएं तो जाएं कहाँ?”
यह स्पष्ट है कि सिंगोली की तुच्छ राजनीति और प्रशासनिक भ्रष्टाचार इन बच्चों के भविष्य को निगल रहा है। यह Mama Basti Food Crisis प्रशासन के माथे पर एक कलंक है।
‘द टाइम्स ऑफ एमपी’ के सवाल (जो जवाब मांगते हैं):
FIR क्यों नहीं? प्रधानाध्यापक मोहनलाल धाकड़ द्वारा राशन घर ले जाना सीधा गबन है। उन पर अब तक FIR दर्ज करके उन्हें गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया?
वैकल्पिक व्यवस्था कहाँ है? DEO सुजनमल मांगरिया को जवाब देना होगा कि Mama Basti Food Crisis सिंगोली में 4 दिन से भूखे बच्चे हैं, तो उन्होंने अब तक वैकल्पिक भोजन क्यों नहीं भिजवाया?
जातिवाद पर चुप्पी क्यों? क्या प्रशासन यह मान बैठा है कि आदिवासी बच्चों के साथ कुछ भी किया जा सकता है?

