Mandasaur Mandi Update: 72 घंटे बाद भी गतिरोध बरकरार; हम्माल-व्यापारी विवाद में फंसा अन्नदाता, अब आर-पार की लड़ाई की तैयारी

Mandasaur Mandi

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मंदसौर। मध्यप्रदेश की सियासत और कृषि व्यापार का केंद्र रही Mandasaur Mandi (दशपुर मंडी) में पिछले 72 घंटों से सन्नाटा पसरा हुआ है। जिसे महज एक ‘बोरी फटने’ का मामूली विवाद समझा जा रहा था, उसने अब एक बड़े व्यापारिक और मानवीय संकट का रूप ले लिया है। मंडी समिति द्वारा ‘आगामी आदेश तक’ नीलामी बंद करने के फैसले ने न केवल मंदसौर, बल्कि आसपास के जिलों के हजारों किसानों की कमर तोड़ दी है।

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प्रशासनिक बैठकों का दौर बेनतीजा

ताजा अपडेट के अनुसार, जिला प्रशासन और मंडी सचिव ने गुरुवार देर रात और शुक्रवार सुबह भी व्यापारी संघ और हम्माल-तुलावटी संघ के बीच मध्यस्थता की कोशिश की। लेकिन, सूत्रों की मानें तो दोनों ही पक्ष अपनी साख (Ego) की लड़ाई पर अड़े हुए हैं। व्यापारियों का स्पष्ट कहना है कि जब तक मंडी प्रांगण में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होती और अभद्र व्यवहार करने वाले दोषियों पर कठोर कार्रवाई नहीं होती, वे अपनी ‘कलम’ नहीं उठाएंगे। दूसरी ओर, हम्माल संघ का आरोप है कि व्यापारियों का रवैया तानाशाही पूर्ण है। इस खींचतान के बीच Mandasaur Mandi का भविष्य अधर में लटका है।

सड़कों पर किसान: केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा

हाईवे पर हुए चक्काजाम के बाद प्रशासन ने किसानों को यह कहकर शांत कराया था कि जल्द ही समाधान निकलेगा, लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस है। शुक्रवार को भी जब सैकड़ों किसान अपनी ट्रॉलियों के साथ Mandasaur Mandi के गेट पर पहुंचे, तो वहां ताले लटके मिले।

किसानों का कहना है कि वे न केवल कड़ाके की ठंड और खुले आसमान के नीचे रात गुजारने को मजबूर हैं, बल्कि उनकी फसल (लहसुन, सोयाबीन और गेहूं) के खराब होने का खतरा भी बढ़ गया है। एक किसान ने रोष व्यक्त करते हुए कहा, “व्यापारी और हम्माल की लड़ाई में हमारा खून क्यों जलाया जा रहा है? अगर 24 घंटे में मंडी शुरू नहीं हुई, तो हम जिले भर के चक्काजाम के लिए मजबूर होंगे।”

आर्थिक नुकसान का अनुमान: करोड़ों का कारोबार ठप

Mandasaur Mandi केवल एक मंडी नहीं, बल्कि मालवा की अर्थव्यवस्था की धड़कन है। जानकारों का मानना है कि पिछले तीन दिनों में मंडी बंद रहने से करीब 15 से 20 करोड़ रुपये का व्यापार प्रभावित हुआ है। नीलामी बंद होने का असर केवल मंडी शुल्क पर ही नहीं, बल्कि परिवहन, होटल और छोटे व्यापारियों पर भी पड़ रहा है। मंडी समिति को भी लाखों रुपये के राजस्व की हानि हो रही है, फिर भी कोई ठोस समाधान निकलता नहीं दिख रहा।

कानून व्यवस्था और पुलिस का सख्त पहरा

ताजा Mandasaur Mandi अपडेट यह है कि स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मंडी प्रांगण और उसके आसपास पुलिस बल की तैनाती बढ़ा दी गई है। चक्काजाम जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रशासन ‘वेट एंड वॉच’ की स्थिति में है। मंडी सचिव पर्वत सिंह सिसोदिया के अनुसार, “हमारी प्राथमिकता शांति बनाए रखना और दोनों पक्षों को एक मेज पर लाना है। लेकिन जब तक दोनों पक्ष सहमति पत्र पर हस्ताक्षर नहीं करते, नीलामी शुरू करना सुरक्षा की दृष्टि से जोखिम भरा हो सकता है।”

क्या है आगे की राह?

अब सवाल यह उठता है कि आखिर Mandasaur Mandi कब खुलेगी? यदि प्रशासन अगले 24 घंटों में इस विवाद को नहीं सुलझा पाता, तो यह मुद्दा राज्य स्तर पर तूल पकड़ सकता है। किसानों ने अब सीधे कलेक्टर और मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की है। सोशल मीडिया पर भी #MandsaurMandi और #KisanNyay जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं, जो प्रशासन पर दबाव बना रहे हैं।

फिलहाल, Mandasaur Mandi के मुख्य द्वार पर लटका ताला उन हजारों उम्मीदों को चिढ़ा रहा है, जो अपनी मेहनत की कमाई लेकर यहां आए थे। व्यापारियों की जिद और हम्मालों का गुस्सा कब शांत होगा, यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन इस जंग में सबसे ज्यादा हार ‘किसान’ की हो रही है।


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