Mandsaur Daughter Civil Judge: पिता चलाते हैं किराना दुकान, बेटी ने 3rd प्रयास में पाई 9वीं रैंक, इंटरव्यू में दिए इन सवालों के जवाब

Mandsaur Daughter Civil Judge

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मंदसौर (The Times of MP): कहते हैं कि अगर इरादे मजबूत हों और हौसलों में उड़ान हो, तो सीमित संसाधन कभी भी सफलता के आड़े नहीं आते। इस बात को सच कर दिखाया है मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले की एक होनहार बेटी ने। Mandsaur Daughter Civil Judge प्रकृति घाटिया ने राजस्थान न्यायिक सेवा (RJS) परीक्षा में न केवल सफलता प्राप्त की है, बल्कि पूरे प्रदेश में 9वीं रैंक हासिल कर अपने परिवार और जिले का नाम रोशन किया है।

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एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार से आने वाली प्रकृति की यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि उनके पिता एक छोटी सी किराने की दुकान चलाते हैं। सुविधाओं के अभाव के बावजूद, प्रकृति ने अपने पिता के संघर्ष और अपनी मेहनत को अपनी ताकत बनाया और आज वे सिविल जज की कुर्सी तक पहुँचने में सफल रहीं।

पिता किराने की दुकान पर, बेटी किताबों में ढूंढती रही भविष्य

मंदसौर जिले के मल्हारगढ़ विधानसभा क्षेत्र के पिपलिया मंडी की रहने वाली प्रकृति घाटिया का बचपन साधारण परिवेश में बीता। उनके पिता सुनील घाटिया कस्बे में ही एक किराने की दुकान संचालित करते हैं। मध्यमवर्गीय परिवार होने के नाते संसाधन सीमित थे, लेकिन पिता ने बेटी की पढ़ाई में कभी कोई कमी नहीं आने दी।

बचपन से ही न्यायपालिका के प्रति आकर्षित प्रकृति ने जज बनने का सपना देखा था। इस सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने दिन-रात एक कर दिया। पिता दुकान पर ग्राहकों को सामान देते रहे, और बेटी घर के कोने में बैठकर कानून की किताबों में अपना भविष्य तलाशती रही। आज जब रिजल्ट आया और प्रकृति का चयन सिविल जज के रूप में हुआ, तो पिता की आँखों से खुशी के आंसू छलक पड़े।

तीसरे प्रयास में मिली मंजिल: असफलता से नहीं मानी हार

सफलता का रास्ता प्रकृति के लिए आसान नहीं था। यह उनका पहला प्रयास नहीं था। इससे पहले वे दो बार राजस्थान न्यायिक सेवा परीक्षा (RJS) के रण में उतर चुकी थीं। दोनों बार उन्होंने प्रारंभिक (Prelims) और मुख्य परीक्षा (Mains) पास की और साक्षात्कार (Interview) तक का सफर तय किया। लेकिन किस्मत को शायद कुछ और मंजूर था; दोनों बार वे अंतिम चयन सूची में जगह बनाने से चूक गईं।

दो बार फाइनल स्टेज पर पहुँचकर असफल होना किसी भी अभ्यर्थी को तोड़ सकता था, लेकिन प्रकृति ने इसे चुनौती के रूप में लिया। उन्होंने अपनी कमियों का विश्लेषण किया, रणनीति बदली और तीसरे प्रयास में दोगुनी ताकत के साथ मैदान में उतरीं। इस बार उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने टॉप-10 में जगह बनाते हुए 9वीं रैंक हासिल की।

इंटरव्यू रूम का वो माहौल: जब पूछे गए तीखे सवाल

सिविल जज बनने के लिए सिर्फ किताबी ज्ञान काफी नहीं होता, बल्कि व्यक्तित्व और त्वरित निर्णय क्षमता की भी परख होती है। Mandsaur Daughter Civil Judge प्रकृति घाटिया ने बताया कि साक्षात्कार बोर्ड ने उनसे कानून की गहराइयों से जुड़े कई अहम सवाल पूछे।

प्रकृति ने बताया कि इंटरव्यू में उनसे संविधान और वर्तमान कानूनी मुद्दों पर चर्चा की गई। उनसे पूछे गए प्रमुख सवाल इस प्रकार थे:

  1. संविधान का अनुच्छेद 14: समानता के अधिकार और इसके व्यावहारिक प्रयोग पर सवाल।

  2. अनुच्छेद 141: सुप्रीम कोर्ट द्वारा घोषित कानून सभी अदालतों पर बाध्यकारी है, इस पर विस्तृत चर्चा।

  3. लिव-इन रिलेशनशिप: बदलते सामाजिक परिवेश में लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े कानूनी प्रावधान और सुप्रीम कोर्ट का दृष्टिकोण।

  4. कार्यस्थल पर महिलाओं का उत्पीड़न (POSH Act): विशाखा गाइडलाइंस और नए कानूनों के तहत महिलाओं की सुरक्षा।

  5. प्रोटेस्ट पिटीशन: जब पुलिस क्लोजर रिपोर्ट लगाती है, तो पीड़ित के पास क्या अधिकार हैं?

  6. न्यायाधीश बनने की प्रेरणा: आप इस क्षेत्र में क्यों आना चाहती हैं?

प्रकृति ने इन सभी सवालों का सटीकता और आत्मविश्वास के साथ जवाब दिया, जिसने चयनकर्ताओं को प्रभावित किया।

शिक्षा और तैयारी की रणनीति

प्रकृति की प्रारंभिक शिक्षा मंदसौर के दशपुर विद्यालय से हुई। स्कूल के दिनों से ही वे मेधावी छात्रा थीं। इसके बाद उन्होंने कानून की बारीकियां सीखने के लिए जयपुर का रुख किया और एमिटी यूनिवर्सिटी से बीबीए एलएलबी (BBA LLB) की डिग्री हासिल की।

कॉलेज के अंतिम वर्ष में ही उन्होंने तय कर लिया था कि उन्हें न्यायिक सेवा में जाना है। उन्होंने कोचिंग और सेल्फ स्टडी का एक संतुलित मिश्रण तैयार किया। वे कहती हैं, “निरंतरता (Consistency) ही सफलता की कुंजी है। मैंने घंटों की गिनती करने के बजाय विषयों को समझने पर जोर दिया।”

परिवार और शहर में जश्न का माहौल

जैसे ही प्रकृति के चयन की खबर पिपलिया मंडी पहुँची, पूरे कस्बे में खुशी की लहर दौड़ गई। घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया। रिश्तेदारों और स्थानीय लोगों ने प्रकृति का फूल-मालाओं से स्वागत किया। माँ-पिता ने बेटी को मिठाई खिलाकर अपना आशीर्वाद दिया।

यह सफलता सिर्फ प्रकृति की नहीं है, बल्कि मंदसौर जिले की उन सभी बेटियों के लिए एक मिसाल है जो अभावों के बावजूद बड़े सपने देखती हैं। प्रकृति ने साबित कर दिया है कि अगर लगन सच्ची हो, तो एक किराने वाले की बेटी भी न्याय की कुर्सी पर बैठकर समाज को दिशा दे सकती है।


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