Mandsaur Police Honored: 7 पुलिसकर्मियों का सम्मान, मानवता और मुस्तैदी की पेश की अनूठी मिसाल

Mandsaur Police Honored
मंदसौर (Mandsaur Police Honored) : खाकी वर्दी का जिक्र होते ही अक्सर लोगों के जेहन में कड़क मिजाज और रौबदार छवि उभरती है। लेकिन, कानून के रखवालों के सीने में भी एक संवेदनशील दिल धड़कता है, जो न केवल अपराध से लड़ता है बल्कि मानवता की सेवा के लिए भी तत्पर रहता है। इसी जज्बे को सलाम करते हुए मंदसौर पुलिस के इतिहास में एक और गौरवशाली अध्याय जुड़ गया है।
शुक्रवार को मंदसौर पुलिस अधीक्षक (SP) विनोद कुमार मीना ने जिले के उन 7 जांबाज और संवेदनशील पुलिसकर्मियों को सम्मानित किया, जिन्होंने अपनी ड्यूटी से आगे बढ़कर समाज के लिए कुछ खास किया है। Mandsaur Police Honored यानी मंदसौर पुलिस के सम्मान का यह कार्यक्रम पुलिस विभाग में नई ऊर्जा का संचार करने वाला साबित हुआ।
उत्कृष्ट कार्य: दायित्व से बढ़कर सेवा
एसपी कार्यालय में आयोजित एक सादे लेकिन गरिमामय समारोह में एसपी विनोद कुमार मीना ने इन पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशस्ति पत्र सौंपे। इस अवसर पर उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पुलिसिंग केवल डंडा घुमाना नहीं है, बल्कि समाज में सुरक्षा का भाव पैदा करना है।
एसपी मीना ने कहा,
“हमारे पुलिसकर्मी अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा, संवेदनशीलता और व्यावसायिक दक्षता के साथ कर रहे हैं।
जब पुलिस का मानवीय चेहरा सामने आता है, तो आमजन का विश्वास खाकी के प्रति और गहरा हो जाता है।”
मानवता की मिसाल: जब खाकी बनी सहारा

अक्सर चौराहों पर ट्रैफिक के शोर और भागदौड़ के बीच इंसानियत कहीं खो सी जाती है, लेकिन थाना यातायात में पदस्थ आरक्षक मोड़ीराम ने साबित कर दिया कि सेवा ही धर्म है।
घटना 14 दिसंबर 2025 की रात की है। वी.पी.एल. चौराहा वाहनों की रेलमपेल से भरा हुआ था। उसी दौरान एक दिव्यांग महिला सड़क पार करने की कोशिश कर रही थी, लेकिन तेज रफ्तार वाहनों के कारण वह सहमी हुई थी। ड्यूटी पर तैनात आरक्षक मोड़ीराम की नजर जैसे ही उस महिला पर पड़ी, उन्होंने तुरंत ट्रैफिक रोका और बड़े ही सम्मान व सुरक्षा के साथ उस दिव्यांग महिला को चौराहा पार कराया। इस मानवीय कृत्य के लिए आरक्षक मोड़ीराम को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। यह घटना बताती है कि Mandsaur Police Honored होने की असली हकदार क्यों है।
सतर्कता: अपराध होने से पहले ही दबोचे गए अपराधी
कहते हैं अपराध होने के बाद अपराधी को पकड़ना पुलिस का काम है, लेकिन अपराध होने ही न देना ‘स्मार्ट पुलिसिंग’ है। थाना मल्हारगढ़ की टीम ने इसी स्मार्ट पुलिसिंग का परिचय दिया।
16 दिसंबर 2025 की सर्द रात में जब पूरा शहर नींद के आगोश में था, तब मल्हारगढ़ थाने के मोहन सिंगार, आरक्षक कमलेश और कैलाश गश्त पर थे। उनकी पैनी नजर कुछ संदिग्ध व्यक्तियों पर पड़ी जो अंधेरे का फायदा उठाकर किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में थे। पुलिस टीम ने बिना वक्त गंवाए घेराबंदी की और संदिग्धों को हिरासत में ले लिया। पूछताछ में खुलासा हुआ कि वे चोरी की नीयत से घूम रहे थे। इस त्वरित कार्रवाई ने एक संभावित अपराध को घटने से पहले ही रोक दिया। उनकी इस सूझबूझ के लिए उन्हें प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
त्वरित कार्रवाई: 24 घंटे में सुलझाया चोरी का मामला
आम आदमी के लिए उसकी गाड़ी की चोरी होना एक बड़ा झटका होता है, और अक्सर ऐसे मामलों में रिकवरी में लंबा समय लगता है। लेकिन थाना कोतवाली की टीम ने इस धारणा को बदल दिया।
एक फरियादी ने अपनी मोटरसाइकिल चोरी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। मामला दर्ज होते ही थाना कोतवाली के सुधीर राठौर, अरुण पंवार और दीपक पाटीदार की टीम सक्रिय हो गई। तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर तंत्र का इस्तेमाल करते हुए, इस टीम ने न केवल 24 घंटे के भीतर चोर को गिरफ्तार किया, बल्कि चोरी गई मोटरसाइकिल भी बरामद कर ली। Mandsaur Police Honored लिस्ट में इनका नाम शामिल होना यह दर्शाता है कि पुलिस अब हाईटेक और तेजतर्रार हो चुकी है।
भविष्य के लिए प्रेरणा
सम्मान समारोह के अंत में एसपी विनोद कुमार मीना ने सभी पुरस्कृत पुलिसकर्मियों को बधाई देते हुए कहा कि यह सम्मान सिर्फ एक कागज का टुकड़ा नहीं, बल्कि उनकी मेहनत की पहचान है। उन्होंने जिले के अन्य पुलिसकर्मियों से भी आह्वान किया कि वे भविष्य में इसी तरह कानून-व्यवस्था बनाए रखने और जनसेवा के कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें।
इस तरह के सम्मान समारोह निश्चित रूप से पुलिस बल का मनोबल बढ़ाते हैं और जनता को यह संदेश देते हैं कि उनकी पुलिस हर परिस्थिति में उनके साथ खड़ी है। Mandsaur Police Honored होने की यह खबर सोशल मीडिया पर भी खूब सुर्खियां बटोर रही है।
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