Neemuch MD Drugs Factory Busted: पुलिस की रेड, 30 करोड़ की ड्रग्स और 3 तस्कर गिरफ्तार – पढ़ें इनसाइड स्टोरी

Neemuch MD Drugs Factory

Neemuch MD Drugs Factory

(दिलीप बोराना की विशेष रिपोर्ट)

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मनासा/नीमच | मध्य प्रदेश की धरती से नशे के काले कारोबार को जड़ से उखाड़ने के लिए पुलिस ने अब आर-पार की लड़ाई शुरू कर दी है। इसी कड़ी में शुक्रवार को नारकोटिक्स विंग ने एक ऐसी कार्रवाई को अंजाम दिया है, जिसकी गूंज पूरे प्रदेश में सुनाई दे रही है। पुलिस ने खुफिया सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए एक बड़ी Neemuch MD Drugs Factory का भंडाफोड़ किया है।

हैरानी की बात यह है कि यह अवैध फैक्ट्री किसी सुनसान औद्योगिक क्षेत्र में नहीं, बल्कि रामपुरा थाना क्षेत्र के एक खेत में बने रिहायशी मकान के अंदर चल रही थी। ग्रामीणों को जरा भी अंदाजा नहीं था कि उनके पड़ोस में एक अवैध Neemuch MD Drugs Factory चल रही है। पुलिस ने मौके से करीब 30 करोड़ रुपये की तैयार और अर्ध-निर्मित (Semi-finished) एमडी ड्रग्स बरामद की है। इस Neemuch MD Drugs Factory का संचालन बेहद शातिर तरीके से किया जा रहा था ताकि पुलिस को शक न हो। इस कार्रवाई ने यह साबित कर दिया है कि ड्रग माफिया अब शहरों से निकलकर गांवों के खेतों में अपनी लैब स्थापित कर रहे हैं।

खेत में चल रही थी हाई-टेक Neemuch MD Drugs Factory

नीमच और मंदसौर का क्षेत्र पारंपरिक रूप से अफीम की खेती के लिए जाना जाता है, लेकिन अब यहाँ सिंथेटिक ड्रग्स (Synthetic Drugs) का निर्माण एक नया और खतरनाक ट्रेंड है। पुलिस को मुखबिर से सटीक सूचना मिली थी कि ग्राम लसूड़िया (हस्तमुगरार) में अवैध गतिविधियां चल रही हैं।

सूचना मिलते ही नारकोटिक्स विंग की टीम ने जाल बिछाया। 28 नवंबर 2025 को जब पुलिस टीम ने खेत में बने मकान पर दबिश दी, तो वहां का मंजर देखकर अधिकारी भी सन्न रह गए। बाहर से साधारण दिखने वाला मकान अंदर से एक पूरी केमिकल लैब में तब्दील हो चुका था। वहां बड़े-बड़े ड्रम, बर्नर, और केमिकल प्रोसेस करने वाले उपकरण लगे हुए थे। यह जगह पूरी तरह से Neemuch MD Drugs Factory के रूप में काम कर रही थी, जहाँ दिन-रात मौत का पाउडर (Mephedrone) तैयार किया जा रहा था।

30 करोड़ का जखीरा: क्या-क्या मिला लैब से?

इस रेड के दौरान पुलिस ने जो सामग्री जब्त की है, वह बताती है कि यह कोई छोटा-मोटा काम नहीं, बल्कि एक बड़ा सिंडिकेट था। नारकोटिक्स विंग ने मौके से निम्नलिखित सामग्री जब्त की:

  1. ठोस एमडी (Solid MD Powder): 02 किलो 700 ग्राम। यह पूरी तरह से तैयार माल था जिसे सप्लाई के लिए पैक किया जाना था।

  2. लिक्विड एमडी (Liquid MD): 16 किलो। यह ड्रग्स निर्माण की आखिरी स्टेज में था। अगर पुलिस कुछ घंटे और देर करती, तो यह भी पाउडर बनकर बाजार में पहुंच जाता।

  3. केमिकल और रॉ मटीरियल: लैब से 70 किलो से अधिक विभिन्न प्रकार के खतरनाक केमिकल मिले हैं, जिनका उपयोग ड्रग्स बनाने में होता है।

  4. संसाधन: तीन मोटरसाइकिलें, तीन मोबाइल फोन और ड्रग्स बनाने के आधुनिक उपकरण।

अंतर्राष्ट्रीय बाजार में एमडी ड्रग्स (Meow Meow) की कीमत बहुत ज्यादा होती है। पुलिस के आकलन के अनुसार, जब्त किए गए कुल माल की कीमत 30 करोड़ रुपये से अधिक है।

मौके से 3 मास्टरमाइंड गिरफ्तार

पुलिस ने घेराबंदी कर मौके से तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों ने पूछताछ में इस Neemuch MD Drugs Factory के बारे में कई अहम राज उगले हैं। ये तीनों आरोपी लैब के अंदर ड्रग्स पकाने (Cooking) और प्रोसेस करने का काम कर रहे थे। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इस प्रकार हुई है:

  • निरंजन पिता भीमा बंजारा (32 वर्ष): निवासी खेड़ी दायमा, थाना मनासा। इसे मुख्य कारीगर माना जा रहा है।

  • अर्जुन पिता शंकर लाल बंजारा (30 वर्ष): निवासी लसूड़िया हस्तमुगरार। यह स्थानीय लॉजिस्टिक्स संभाल रहा था।

  • रमेश पिता शंकर लाल (27 वर्ष): निवासी लसूड़िया हस्तमुगरार।

ये तीनों आरोपी पुलिस की पूछताछ में बड़े खुलासे कर सकते हैं। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि इन्होंने ड्रग्स बनाने की विधि (Recipe) कहाँ से सीखी और इन्हें फंडिंग कौन कर रहा था।

‘नशे पर प्रहार’: पुलिस अधिकारियों की भूमिका

यह पूरी कार्रवाई मध्य प्रदेश पुलिस के विशेष अभियान “नशे पर प्रहार” का हिस्सा है। इस ऑपरेशन की सफलता के पीछे पुलिस के शीर्ष अधिकारियों का कुशल मार्गदर्शन रहा। पुलिस महानिदेशक (DGP) कैलाश मकवाणा के सख्त निर्देशों के बाद नारकोटिक्स विंग एक्टिव मोड में है।

इस रेड का पूरा खाका अति. पुलिस महानिदेशक (ADG) नारकोटिक्स के.पी. वेंकटेश्वर राव और उप पुलिस महानिरीक्षक (DIG) नारकोटिक्स महेश चंद जैन ने तैयार किया था। उन्होंने टीम को निर्देश दिए थे कि रेड पूरी तरह गोपनीय रहनी चाहिए ताकि आरोपी भाग न सकें।

जमीनी स्तर पर इस ऑपरेशन को सफल बनाने में नारकोटिक्स विंग के जांबाज अधिकारियों ने जान की बाजी लगा दी। इनमें निरीक्षक राकेश चौधरी, निरीक्षक भारतसिंह चावड़ा, निरीक्षक हरीश सोलंकी, निरीक्षक तेजेन्द्र सिंह सेंगर और निरीक्षक मलय महत का योगदान सराहनीय रहा। साथ ही, नीमच के पुलिस अधीक्षक (SP) अंकित जायसवाल ने स्थानीय पुलिस बल के साथ मिलकर इस ऑपरेशन को बैकअप प्रदान किया।

राजस्थान और मुंबई से जुड़ सकते हैं तार

Neemuch MD Drugs Factory का भंडाफोड़ होने के बाद अब पुलिस की जांच का दायरा बढ़ गया है। एमडी ड्रग्स का सबसे बड़ा बाजार मुंबई और बड़े महानगर हैं। साथ ही, राजस्थान की सीमा नीमच से लगी हुई है। पुलिस को शक है कि यहाँ तैयार होने वाला माल राजस्थान के रास्ते अन्य राज्यों में सप्लाई किया जाने वाला था। विशेषज्ञों का मानना है कि इस Neemuch MD Drugs Factory से तैयार माल राजस्थान और मुंबई भेजा जा रहा था।

विवेचना अधिकारी अब आरोपियों के मोबाइल कॉल डिटेल्स (CDR) खंगाल रहे हैं। “फॉरवर्ड और बैकवर्ड लिंकेज” (Forward and Backward Linkages) की जांच की जा रही है—यानी कच्चा माल (Chemicals) कहाँ से आया और तैयार माल कहाँ जाना था। आने वाले दिनों में इस मामले में कई और सफेदपोश लोगों के नाम सामने आ सकते हैं जो इस काले कारोबार को पर्दे के पीछे से चला रहे थे। 

नीमच पुलिस और नारकोटिक्स विंग की यह संयुक्त कार्यवाही उन सभी अपराधियों के लिए एक चेतावनी है जो युवाओं की नसों में जहर घोलने का काम कर रहे हैं।


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