सिर्फ 250 रुपये की बचत और बालकनी में खेती… आज 90 लाख का साम्राज्य, पढ़िए केरल के इस कपल की अनोखी Mushroom Farming Success Story

Mushroom Farming Success Story

Mushroom Farming Success Story

नीमच/कोट्टायम: Mushroom Farming Success Story बिज़नेस की दुनिया में अक्सर कहा जाता है कि पैसा कमाने के लिए पैसा लगाना पड़ता है, लेकिन केरल के एक दंपत्ति ने इस कहावत को पूरी तरह से बदल कर रख दिया है। कोट्टायम की रहने वाली 57 वर्षीय शीजे और उनके 65 वर्षीय पति टी.जे. थंकाचन ने साबित कर दिया है कि अगर इरादे पक्के हों, तो जेम् में पड़े चंद सिक्के भी करोड़ों का साम्राज्य खड़ा कर सकते हैं। यह कोई फिल्मी पटकथा नहीं, बल्कि एक हकीकत है।

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महज 250 रुपये… जी हाँ, आज के दौर में जितने का एक पिज़्ज़ा आता है, उतनी ही लागत में शुरू हुई उनकी यह यात्रा आज 90 लाख रुपये सालाना टर्नओवर वाली कंपनी ‘कून फ्रेश’ (Coon Fresh) में तब्दील हो चुकी है। आइये, विस्तार से जानते हैं इस Mushroom Farming Success Story के बारे में, जिसने एग्री-टेक सेक्टर में सफलता के नए झंडे गाड़ दिए हैं।

Mushroom Farming Success Story शौक से शुरुआत, बन गया जुनून

Mushroom Farming Success Story सफलता की यह दास्तान साल 2007 में शुरू हुई। उस समय शीजे घर पर अक्सर बोरियत महसूस करती थीं। समय बिताने और कुछ नया करने की चाह में उन्होंने अपनी घर की बालकनी में मशरूम उगाने का फैसला किया। यह केवल एक शौक था। उनके पति थंकाचन, जो उस समय एक प्रतिष्ठित संस्थान में एचआर डिपार्टमेंट में कार्यरत थे, ने अपनी पत्नी के इस विचार का न केवल स्वागत किया बल्कि पूरा सहयोग भी दिया।

दोनों की पृष्ठभूमि कृषि से जुड़ी थी, जिसका उन्हें भरपूर फायदा मिला। उन्होंने बाजार से मशरूम के बीज (स्पॉन) और बेड खरीदने के लिए अपनी जेब से सिर्फ 250 रुपये खर्च किए। उस समय किसी ने सोचा भी नहीं था कि बालकनी के एक कोने में शुरू हुआ यह प्रयोग आगे चलकर दक्षिण भारत की सबसे बड़ी Mushroom Farming Success Story में से एक बनेगा।

‘कून फ्रेश’ का जन्म और संघर्ष के दिन

शुरुआती तीन साल प्रयोग और अनुभव के रहे। उन्होंने खेती की बारीकियों को समझा, असफलताओं से सीखा और अपनी तकनीक में सुधार किया। आखिरकार, साल 2010 में उन्होंने अपने वेंचर को एक औपचारिक नाम दिया- ‘कून फ्रेश’।

लेकिन राह इतनी आसान नहीं थी। उस दौर में मशरूम को लेकर आम लोगों में ज्यादा जागरूकता नहीं थी। लोग इसे खरीदने से कतराते थे। यहाँ थंकाचन का एचआर और मैनेजमेंट का अनुभव काम आया। उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने अखबारों और पत्रिकाओं में लेख लिखकर लोगों को मशरूम के औषधीय गुणों और पोषक तत्वों के बारे में बताना शुरू किया। धीरे-धीरे लोगों की धारणा बदली। उनकी मेहनत तब रंग लाई जब लुली इंटरनेशनल शॉपिंग मॉल जैसे बड़े ब्रांड्स ने उनके प्रोडक्ट्स में दिलचस्पी दिखाई और आर्डर देने शुरू किए।

सिर्फ मशरूम नहीं, पूरा ‘इकोसिस्टम’ बनाया

इस कपल की सफलता का असली राज ‘इनोवेशन’ यानी नवाचार में छिपा है। वे केवल कच्चा मशरूम बेचकर मुनाफा नहीं कमाना चाहते थे। उन्होंने वैल्यू-ऐडेड प्रोडक्ट्स (Value Added Products) पर काम किया।

आज ‘कून फ्रेश’ मशरूम के अलावा मशरूम मोमोज, कटलेट, अचार, चटनी पाउडर और यहाँ तक कि मशरूम फोर्टिफाइड केक भी बनाता है। उनका सबसे खास उत्पाद ‘कून वीटा’ है, जिसे लेकर कंपनी का दावा है कि यह विटामिन-डी की कमी को प्राकृतिक रूप से दूर करने में सक्षम है और यह एक पेटेंट उत्पाद है।

जो सफर 5 बेड से शुरू हुआ था, वह आज 6000 बेड वाले ‘बायो-हाई-टेक फार्म’ में बदल चुका है। यहाँ अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर सालाना 12 टन मशरूम का उत्पादन किया जा रहा है।

भविष्य का लक्ष्य: 1.6 करोड़ का टर्नओवर

Mushroom Farming Success Story
Mushroom Farming Success Story

 मौजूदा समय में शीजे और थंकाचन का यह स्टार्ट-अप सालाना 90 लाख रुपये का रेवेन्यू जनरेट कर रहा है। लेकिन उनकी भूख अभी शांत नहीं हुई है। उन्होंने अगले वित्तीय वर्ष के लिए 1.6 करोड़ रुपये के टर्नओवर का लक्ष्य रखा है।

यह Mushroom Farming Success Story सिर्फ पैसे कमाने तक सीमित नहीं है। यह कपल समाज को वापस देने (Giving back to society) में भी यकीन रखता है। उन्होंने अब तक 10,000 से अधिक छात्रों, गृहणियों और छोटे किसानों को मशरूम की खेती की ट्रेनिंग दी है, ताकि वे भी आत्मनिर्भर बन सकें। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने भी उनके योगदान को सराहा है और उन्हें सम्मानित किया है।

Mushroom Farming Success Story केरल के इस कपल ने दिखा दिया है कि उम्र महज एक नंबर है और निवेश की रकम से ज्यादा मायने रखता है आपका विज़न। उनकी कहानी आज देश भर के हज़ारों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो संसाधनों की कमी का रोना रोते हैं।


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