नीमच में वहशी आवारा कुत्तों का जानलेवा हमला: 4 साल की बच्ची को आंगन से खींचकर नोचा

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  • नपा अध्यक्ष स्वाति चोपड़ा के नेतृत्व पर गंभीर सवाल

नीमच, मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश के नीमच जिले में बुधवार दोपहर को हुई एक दिल दहला देने वाली घटना ने नगर पालिका प्रशासन और उसकी प्रमुख, अध्यक्ष स्वाति चोपड़ा के नेतृत्व पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कैंट थाना क्षेत्र की शालीमार कॉलोनी में घर के आंगन में खेल रही 4 साल की मासूम अलशिफा पर तीन से चार आवारा कुत्तों के झुंड ने अचानक हमला कर दिया। इस वहशी हमले में बच्ची को आंगन से खींचकर बाहर निकाला गया और उसके चेहरे व आंख के पास बुरी तरह नोच डाला गया।

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मासूम अलशिफा मौत के मुंह से लौटी; ICU में भर्ती

पीड़ित बच्ची अलशिफा (4) को उसके चीखने-चिल्लाने पर पड़ोसियों ने शोर मचाकर कुत्तों के चंगुल से छुड़ाया। तत्काल उसे जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसके चेहरे पर आए गहरे जख्मों पर करीब 10 टांके लगाए।

बच्ची का इलाज कर रहे डॉक्टर योगेश धाकड़ ने मामले की गंभीरता बताते हुए कहा, “यह मामला रेबीज की हाई कैटेगरी में आता है, क्योंकि कुत्तों ने बच्ची को दिमाग के पास काटा है।” उन्होंने बताया कि अलशिफा को रेबीज इंजेक्शन के साथ-साथ अमोग्लोबिन भी लगाया गया है। वर्तमान में, उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे अस्पताल के सघन चिकित्सा इकाई (ICU) में विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है।

नपा अध्यक्ष स्वाति चोपड़ा पर उठे सवाल: नसबंदी अभियान सिर्फ ‘कागजी’ कार्रवाई?

स्थानीय नागरिकों में इस घटना के बाद आक्रोश चरम पर है और सीधे तौर पर नगर पालिका अध्यक्ष स्वाति चोपड़ा को प्रशासनिक निष्क्रियता के लिए जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।

नागरिकों का सीधा आरोप है:

  1. नसबंदी अभियान की विफलता: नगर पालिका द्वारा आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रण के लिए चलाए गए नसबंदी अभियान की सफलता केवल ‘कागजों तक सीमित’ है। जनता का कहना है कि यह अभियान असल में निष्क्रिय रहा या फिर इसमें भारी अनियमितताएं हुईं, जिसका प्रमाण शहर में कुत्तों की अनियंत्रित और बढ़ती संख्या है।
  2. शिकायतों की अनदेखी: शालीमार कॉलोनी सहित पूरे कैंट इलाके में पहले भी आवारा कुत्तों द्वारा एक बच्ची और एक महिला पर हमले हो चुके हैं। बार-बार शिकायतें करने के बावजूद, अध्यक्ष महोदया के नेतृत्व में प्रशासन ने जन सुरक्षा जैसे गंभीर विषय पर कोई ठोस और त्वरित कार्रवाई नहीं की।
  3. जवाबदेही का अभाव: जन सुरक्षा सुनिश्चित करने की प्राथमिक जिम्मेदारी नगर पालिका प्रमुख की होती है। लेकिन लगातार होते हमलों और फंड्स के कथित दुरुपयोग के आरोपों (जिन पर पूर्व में घोटाले की बात उठी थी) पर भी अध्यक्ष महोदया जनता को कोई संतोषजनक जवाब या कार्ययोजना पेश नहीं कर पाई हैं। यह प्रशासनिक मुखिया की घोर लापरवाही और सिस्टम की विफलता को दर्शाता है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की सरेआम अवहेलना

यह घटना उस समय हुई है जब सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में सख्त आदेश दिए थे कि स्कूल, अस्पताल, और बस स्टैंड जैसे सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाकर शेल्टर होम में रखा जाए। कोर्ट ने इसे “सिस्टम की विफलता” करार दिया था और राज्यों के मुख्य सचिवों को आदेशों का सख्ती से पालन करने को कहा था।

नीमच नगर पालिका अध्यक्ष स्वाति चोपड़ा के कार्यकाल में हुई यह घटना साफ दर्शाती है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की सरेआम अवहेलना की जा रही है, जिससे आम नागरिकों की जान जोखिम में पड़ रही है और देश की वैश्विक छवि को भी नुकसान पहुंच रहा है।

स्थानीय निवासियों ने तत्काल प्रभाव से एक पारदर्शी और प्रभावी नसबंदी अभियान चलाने, साथ ही सभी आक्रामक कुत्तों को सार्वजनिक क्षेत्रों से हटाकर शेल्टर होम में रखने की मांग की है।

 

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