21 साल का ‘फर्जी’ खेल! Neemuch Fraud Case में दुकान हड़पने की बड़ी साजिश बेनकाब, आरोपी पर FIR दर्ज

Neemuch Fraud Case

Neemuch Fraud Case

नीमच। कानून की आँखों में धूल झोंककर दूसरों की मेहनत की कमाई और संपत्ति पर कुंडली मारकर बैठने वालों के लिए नीमच सिटी पुलिस ने एक बड़ा सबक पेश किया है। शहर के मुख्य चौराहे पर स्थित एक बेशकीमती दुकान को हड़पने के लिए बुना गया जालसाजी का ताना-बाना आखिर फॉरेंसिक जांच की कसौटी पर बिखर गया। इस Neemuch Fraud Case ने यह साबित कर दिया है कि अपराधी कितना भी शातिर क्यों न हो, एक छोटा सा दस्तखत उसके पूरे साम्राज्य को ढहा सकता है।

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साजिश का ‘मास्टरमाइंड’ और 21 साल का फर्जी एग्रीमेंट

इस पूरे Neemuch Fraud Case का मुख्य केंद्र बिंदु नीमच सिटी निवासी सुनील कुमार राठौर पिता शिवचंद राठौर है। शिकायतकर्ता अशोक कुमार ऐरन पिता स्व. कन्हैयालाल ऐरन की शिकायत के मुताबिक, आरोपी ने उनकी दुकान पर कब्जा करने की नीयत से एक अत्यंत दुस्साहसी योजना बनाई। सुनील राठौर ने कोर्ट में चल रहे बेदखली के मामले से बचने के लिए एक ‘फर्जी लीज अनुबंध पत्र’ तैयार किया।

हैरानी की बात यह है कि इस फर्जी एग्रीमेंट में दुकान को महज 6000 रुपये प्रति वर्ष के किराए पर, वो भी 21 वर्षों की लंबी अवधि के लिए लीज पर लेना दिखाया गया था। इस Neemuch Fraud Case की गहराई तब पता चली जब यह खुलासा हुआ कि आरोपी ने इस दस्तावेज को असली दिखाने के लिए अशोक कुमार ऐरन के जाली हस्ताक्षर तक कर दिए थे।

इंदौर की फॉरेंसिक रिपोर्ट ने पलट दी बाजी

जालसाजी के इस खेल में आरोपी को भरोसा था कि उसके बनाए दस्तावेज कोर्ट में टिक जाएंगे। लेकिन अशोक कुमार ऐरन की सतर्कता और कानूनी लड़ाई ने इस Neemuch Fraud Case का रुख मोड़ दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच इंदौर की सुप्रसिद्ध हस्तलिपि एवं हस्ताक्षर विशेषज्ञ श्रीमती नूतन सुपेकर से कराई गई।

26 दिसंबर 2025 को आई जांच रिपोर्ट ने इस Neemuch Fraud Case के सारे सबूतों को पुख्ता कर दिया। रिपोर्ट में साफ़ कहा गया कि विवादित लीज पेपर पर किए गए हस्ताक्षर (Q-1 से Q-4) अशोक कुमार ऐरन के असली हस्ताक्षरों (KS-1 से KS-26) से कतई मेल नहीं खाते। यानी, वैज्ञानिक तरीके से यह सिद्ध हो गया कि लीज एग्रीमेंट पूरी तरह से फर्जी था।

7 धाराओं का शिकंजा: पुलिस की सख्त कार्रवाई

जांच रिपोर्ट और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर नीमच सिटी पुलिस ने आरोपी सुनील राठौर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 के तहत एक साथ 7 गंभीर धाराओं में FIR दर्ज की है। इस Neemuch Fraud Case में दर्ज धाराएं आरोपी के बचने के सारे रास्ते बंद करती नजर आ रही हैं:

  • BNS धारा 61(2): आपराधिक षड्यंत्र रचने के लिए।

  • BNS धारा 318(4): धोखाधड़ी और बेईमानी से संपत्ति के लिए प्रेरित करना।

  • BNS धारा 337 और 338: जाली दस्तावेज बनाना और फर्जीवाड़े को अंजाम देना।

  • BNS धारा 340(1) और 340(2): जाली दस्तावेजों को असली बताकर इस्तेमाल करना।

घटना की शुरुआत नवंबर 2025 से हुई थी और अब जाकर इस जालसाजी का पर्दाफाश हुआ है।

भय और धमकी का माहौल

शिकायतकर्ता अशोक कुमार ऐरन ने पुलिस को यह भी बताया कि आरोपी और उसके साथी न केवल संपत्ति हड़पना चाहते हैं, बल्कि उन्हें लगातार धमकियां भी दे रहे हैं। Neemuch Fraud Case में आरोपी पक्ष द्वारा अभद्र व्यवहार और ‘कुछ नहीं बिगड़ पाने’ जैसी शेखी बघारने की बात भी सामने आई है। पुलिस अब इस मामले के अन्य पहलुओं और आरोपी के मददगारों की भी तलाश कर रही है।

कानून के हाथ लंबे हैं

नीमच शहर के इस सनसनीखेज Neemuch Fraud Case ने संपत्ति मालिकों को भी जागरूक किया है। यह मामला दिखाता है कि जमीन और दुकान से जुड़े विवादों में कागजी खानापूर्ति कितनी महत्वपूर्ण है। फिलहाल, पुलिस इस पूरे केस की बारीकी से जांच कर रहे हैं ताकि पीड़ित को न्याय मिल सके।


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