सरकारी जमीन को निजी बताकर 5.64 लाख की चपत, जनसुनवाई में अधिकारियों के उड़े होश

Land Fraud

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नीमच( MP NEWS)। जमीन धोखाधड़ी मामला (Land Fraud) जिला कलेक्टर कार्यालय में मंगलवार को आयोजित साप्ताहिक जनसुनवाई उस समय एक गंभीर चर्चा का केंद्र बन गई, जब हनुमान नगर निवासी विष्णु शर्मा हाथ में दस्तावेजों का पुलिंदा लेकर अधिकारियों के समक्ष पेश हुए। उनके चेहरे पर छाई मायूसी और आक्रोश ने वहां मौजूद हर शख्स का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए उन्होंने भरे गले से पूछा— “साहब, न्याय नहीं तो यह जनसुनवाई कैसी? इस जमीन धोखाधड़ी मामला (Land Fraud) केस में मैं पीड़ित हूं या अपराधी?”

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5.64 लाख की धोखाधड़ी का सनसनीखेज आरोप

फरियादी विष्णु शर्मा ने जनसुनवाई में प्रस्तुत अपने आवेदन में विस्तार से बताया कि उनके साथ 5 लाख 64 हजार रुपये की बड़ी धोखाधड़ी की गई है। शर्मा का आरोप है कि अमृतलाल खारोल और उनके पिता ने मिलकर एक सोची-समझी साजिश रची। उन्होंने एक जमीन को अपनी निजी संपत्ति बताकर विष्णु शर्मा के साथ उसका सौदा किया और किश्तों में पूरी राशि वसूल ली।

धोखाधड़ी का खुलासा तब हुआ जब रजिस्ट्री और अन्य दस्तावेजों की जांच के बाद यह तथ्य सामने आया कि जिस भूमि का विक्रय पत्र (Sale Deed) तैयार करवाया गया था, वह असल में शासकीय भूमि है। पीड़ित का कहना है कि उसे अंधेरे में रखकर सरकारी जमीन का सौदा कर लिया गया, जो सीधे तौर पर एक बड़ा जमीन धोखाधड़ी मामला (Land Fraud) है।

विवाद की जड़: शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा?

आवेदन के अनुसार, यह केवल पैसों के लेन-देन का मामला नहीं है, बल्कि सरकारी जमीन को हड़पने का एक ‘मास्टर प्लान’ भी है। विष्णु शर्मा ने आरोप लगाया कि हीराबाई खारोल और रेखाबाई पाटीदार के नाम दर्ज निजी भूमि की आड़ लेकर, उससे लगी हुई कीमती सरकारी जमीन पर अवैध रूप से कब्जा जमाया गया है।

उन्होंने इस पूरे जमीन धोखाधड़ी मामला (Land Fraud) के पीछे मुख्य सूत्रधार के रूप में अमृतलाल खारोल और मुकेश पाटीदार का नाम लिया है। शर्मा ने प्रशासन से मांग की है कि मौके का सीमांकन कराया जाए ताकि सरकारी जमीन को भू-माफियाओं के चंगुल से मुक्त कराया जा सके।

पुलिस की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल

विष्णु शर्मा का दर्द तब और बढ़ गया जब उन्होंने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने अधिकारियों को बताया कि जब उन्होंने इस ठगी की शिकायत थाने में दर्ज कराई, तो दोषियों पर शिकंजा कसने के बजाय, पुलिस ने रसूख के दबाव में आकर खुद उनके (विष्णु शर्मा) खिलाफ ही FIR दर्ज कर ली। शर्मा का कहना है कि वे आर्थिक नुकसान के साथ-साथ अब मानसिक प्रताड़ना भी झेल रहे हैं, क्योंकि उन्हें ही अपराधी साबित करने की कोशिश की जा रही है।

दूसरे पक्ष का दावा: “मुझसे अवैध वसूली की कोशिश की जा रही है”

इस मामले में दूसरा पक्ष भी चुप नहीं बैठा। आरोपी बताए जा रहे अमृतलाल खारोल ने जनसुनवाई में अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को पूरी तरह से मिथ्या, झूठा और निराधार करार दिया है। खारोल का कहना है कि विष्णु शर्मा और उनके कुछ साथी उन पर अनैतिक दबाव बनाकर अवैध रूप से रुपयों की मांग कर रहे हैं।

अमृतलाल खारोल ने भी प्रशासन को एक जवाबी शिकायती आवेदन सौंपते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका तर्क है कि उन्हें बदनाम करने के लिए यह पूरा जाल बुना गया है।

प्रशासनिक मांगें और आगामी कार्यवाही

विष्णु शर्मा ने कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक से इस जमीन धोखाधड़ी मामला (Land Fraud) मामले में निम्नलिखित कार्यवाही की गुहार लगाई है:

  • मामले की निष्पक्ष जांच कर आरोपियों पर संयुक्त FIR दर्ज की जाए।

  • सरकारी जमीन का सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार सीमांकन कर उसे मुक्त कराया जाए।

  • धोखाधड़ी के माध्यम से ली गई 5.64 लाख रुपये की राशि वापस दिलाई जाए।

प्रशासन ने दोनों पक्षों के आवेदनों को संज्ञान में लेते हुए संबंधित विभाग को जांच सौंप दी है। अब देखना यह होगा कि इस ‘जमीन की जंग’ में सच किसके पक्ष में आता है।


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