नीमच में नशे के खिलाफ महा-अभियान: नार्कोटिक मीटिंग में लिए गए बड़े फैसले

Narcotic Meeting
नीमच। मध्यप्रदेश का सीमावर्ती जिला नीमच, जो अपनी भौगोलिक स्थिति और अफीम उत्पादन के लिए देशभर में जाना जाता है, अब नशे के कलंक को धोने के लिए एक निर्णायक जंग की ओर बढ़ चला है। सोमवार, 23 फरवरी 2026 को नीमच कलेक्टर कार्यालय के सभाकक्ष में जिला स्तरीय NCORD (नारकोटिक्स समन्वय) समिति की एक अत्यंत महत्वपूर्ण नार्कोटिक मीटिंग (Narcotic Meeting) संपन्न हुई।
इस बैठक की अध्यक्षता जिला कलेक्टर श्री हिमांशु चंद्रा ने की, जबकि पुलिस अधीक्षक श्री अंकित जायसवाल ने समिति के सचिव के रूप में सुरक्षात्मक और दंडात्मक कार्यवाही का पूरा खाका पेश किया। इस उच्च स्तरीय बैठक का एकमात्र उद्देश्य जिले में जड़ें जमा चुके नशे के कारोबार को न केवल रोकना है, बल्कि उसे समूल नष्ट करना है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह Narcotic Meeting?
नीमच जिला राजस्थान की सीमाओं से सटा हुआ है, जिससे यहाँ मादक पदार्थों की तस्करी की संभावना हमेशा बनी रहती है। पिछले कुछ समय में सिंथेटिक ड्रग्स और अवैध डोडाचूरा की तस्करी के नए तरीके सामने आए हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए, कलेक्टर और एसपी ने संयुक्त रूप से सभी विभागों को एक मंच पर लाकर यह नार्कोटिक मीटिंग (Narcotic Meeting) आयोजित की। बैठक में स्पष्ट किया गया कि अब केवल जमीनी स्तर पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि तकनीक और खुफिया तंत्र का समन्वय ही इस नेटवर्क को तोड़ पाएगा।
7-सूत्रीय मास्टर प्लान: अब ऐसे कसेंगे तस्करों पर शिकंजा
बैठक में विस्तृत चर्चा के बाद समिति ने सात ऐसे मुख्य बिंदुओं पर रणनीति बनाई है, जो नीमच में नशे की कमर तोड़ देंगे। नार्कोटिक मीटिंग (Narcotic Meeting) के प्रमुख निर्णय निम्नलिखित हैं:
1. अवैध खेती पर सेटेलाइट की नजर
प्रशासन ने तय किया है कि अफीम और भांग की अवैध खेती को रोकने के लिए अब केवल गश्त पर निर्भर नहीं रहा जाएगा। इसके लिए सेटेलाइट इमेजिंग और ड्रोन का उपयोग किया जाएगा। यदि कहीं भी मादक फसलों की अवैध खेती पाई गई, तो संबंधित भूमि स्वामी पर कठोरतम कार्यवाही होगी।
2. क्रॉस-स्टेट तस्करी का ‘रूट मैप’ ब्लॉक
चूंकि तस्कर राजस्थान के कच्चे रास्तों का उपयोग करते हैं, इसलिए बॉर्डर चेक पोस्ट को ‘स्मार्ट’ बनाया जाएगा। नार्कोटिक मीटिंग (Narcotic Meeting) में निर्देश दिए गए कि संदिग्ध वाहनों की सूची साझा की जाए और अंतरराज्यीय पुलिस समन्वय को और मजबूत किया जाए।
3. ‘नशा मुक्त कैंपस’ और युवा जागरूकता
नशे की मांग (Demand) को कम करने के लिए प्रशासन अब स्कूलों और कॉलेजों को ‘सुरक्षा घेरे’ में लेगा। हर शिक्षण संस्थान में एक नोडल अधिकारी नियुक्त होगा। ड्रग इंस्पेक्टर को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि बिना प्रिस्क्रिप्शन के नशीली दवाएं बेचने वाले मेडिकल स्टोर का लाइसेंस तत्काल निरस्त किया जाए।
4. वैकल्पिक विकास: किसानों को नया रास्ता
बैठक में एक मानवीय पहलू पर भी चर्चा हुई। जिन क्षेत्रों में किसान मादक फसलों की अवैध खेती की ओर आकर्षित होते हैं, वहां कृषि और उद्यानिकी विभाग ‘वैकल्पिक विकास कार्यक्रम’ लागू करेंगे। उन्हें औषधीय खेती या अन्य लाभकारी फसलों की ओर प्रोत्साहित किया जाएगा।
5. नशामुक्ति केंद्रों का कायाकल्प
नीमच में चल रहे पुनर्वास केंद्रों का अब नियमित पर्यवेक्षण (Supervision) होगा। नार्कोटिक मीटिंग (Narcotic Meeting) में सुनील कुमार तिवारी (प्रोजेक्ट डायरेक्टर, नशा मुक्ति केंद्र) को निर्देश दिए गए कि केंद्रों में केवल उपचार ही नहीं, बल्कि काउंसलिंग और कौशल विकास पर भी जोर दिया जाए।
6. हॉटस्पॉट्स का शुद्धिकरण
पुलिस विभाग ने जिले के उन ‘हॉटस्पॉट्स’ की पहचान की है जहाँ नशे की तस्करी या खपत सबसे अधिक है। इन क्षेत्रों में अब पुलिस की गश्त के साथ-साथ ‘एवेयरनेस कैंप’ भी लगाए जाएंगे ताकि वहां के निवासियों को इस दलदल से निकाला जा सके।
7. सामाजिक परिवेश में पुनरुद्धार
जो लोग नशे की आदत छोड़ चुके हैं, उन्हें समाज की मुख्यधारा में लाने के लिए सामाजिक न्याय विभाग विशेष योजना बनाएगा। उन्हें अपराधी नहीं, बल्कि पीड़ित मानकर सहायता प्रदान की जाएगी।
प्रशासनिक दिग्गजों का जमावड़ा
इस नार्कोटिक मीटिंग (Narcotic Meeting) की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें जिले के लगभग सभी महत्वपूर्ण विभागों के प्रमुख शामिल थे। बैठक में अपर पुलिस अधीक्षक श्री नवल सिंह सिसौदिया, फॉरेस्ट एसडीओ श्री दशरथ अखंड, केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN) के अधीक्षक श्री परवीन धुल एवं श्री जे.पी. मीना, मुख्य चिकित्सा अधिकारी श्री डी. प्रसाद, आबकारी अधिकारी श्री बंसल भिटे, जिला शिक्षा अधिकारी श्री एस.एम. मांगरिया, निरीक्षक नारकोटिक्स विंग श्री राजमल दायमा और ड्रग इंस्पेक्टर श्री शोभित कुमार तिवारी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
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