Neemuch Police Arrest: कानून के हाथ हुए लंबे, पुणे में छिपा बैठा 6 वारंटों का आरोपी 3 साल बाद गिरफ्तार

Neemuch Police Arrest
नीमच : कानून के हाथ न केवल लंबे होते हैं, बल्कि उनकी पकड़ भी बेहद मजबूत होती है। अपराधी चाहे शहर बदलकर दूसरे राज्य में जाकर छिप जाए, पुलिस की नजरों से उसका बचना नामुमकिन है। इस बात को एक बार फिर सच साबित कर दिखाया है नीमच जिले की बघाना पुलिस ने। Neemuch Police Arrest के आंकड़ों में एक और बड़ी सफलता जुड़ गई है, जिसकी चर्चा अब महकमे के साथ-साथ आम जनता में भी हो रही है।
तीन साल का लंबा वक्त, 6 स्थाई वारंट और पुलिस की आंखों में धूल झोंककर महाराष्ट्र के पुणे में ऐशो-आराम से रह रहा एक शातिर वारंटी आखिरकार पुलिस के शिकंजे में आ ही गया।
एसपी के विशेष अभियान का दिखा असर
नीमच जिले में कानून व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने और फरार अपराधियों की धरपकड़ के लिए पुलिस अधीक्षक (SP) श्री अंकित जायसवाल (IPS) ने एक विशेष अभियान छेड़ रखा है। इस Neemuch Police Arrest अभियान का स्पष्ट उद्देश्य है—लंबे समय से फरार वारंटियों को सलाखों के पीछे पहुंचाना। इस अभियान के तहत सभी थाना प्रभारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्र के पुराने और पेंडिंग वारंटों की समीक्षा करें।
इसी कड़ी में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) श्री नवलसिंह सिसोदिया और नगर पुलिस अधीक्षक (CSP) सुश्री किरण चौहान के मार्गदर्शन में बघाना थाना प्रभारी श्री राधेश्याम दांगी ने एक विशेष रणनीति तैयार की।
चेक बाउंस के 6 मामलों में थी तलाश
पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी का नाम ओमप्रकाश पिता ज्ञानीराम अग्रवाल है। यह मूल रूप से नीमच का रहने वाला है लेकिन पिछले लंबे समय से फरार चल रहा था। ओमप्रकाश के खिलाफ धारा 138 एनआई एक्ट (चेक बाउंस) के तहत कोर्ट द्वारा एक नहीं, बल्कि 6 स्थाई वारंट जारी किए गए थे। कानूनी पचड़ों और Neemuch Police Arrest से बचने के लिए आरोपी ने नीमच छोड़ दिया था और महाराष्ट्र के पुणे शहर में जाकर बस गया था।
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मुखबिर तंत्र और सटीक सूचना: ऐसे बिछाया जाल
किसी भी अपराधी को दूसरे राज्य से पकड़ना पुलिस के लिए आसान नहीं होता। इसके लिए सटीक सूचना और पुख्ता मुखबिर तंत्र की आवश्यकता होती है। थाना प्रभारी राधेश्याम दांगी ने अपने विश्वसनीय मुखबिरों को सक्रिय किया। खबर मिली कि आरोपी ओमप्रकाश पुणे (महाराष्ट्र) में कहीं छिपा हुआ है।
सूचना पक्की होते ही पुलिस ने बिना वक्त गंवाए एक विशेष टीम का गठन किया। टीम को पुणे रवाना किया गया। वहां पहुंचकर पुलिस ने स्थानीय स्तर पर जानकारी जुटाई और आरोपी की लोकेशन को ट्रेस किया। जैसे ही आरोपी की पुष्टि हुई, पुलिस ने घेराबंदी कर उसे धर दबोचा। यह Neemuch Police Arrest इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि आरोपी 3 साल से पुलिस को चकमा दे रहा था।
इस टीम की भूमिका रही सराहनीय
पुलिस की इस सफलता के पीछे एक पूरी टीम की मेहनत और समर्पण है। अपराधी को पकड़ने और उसे कानून के हवाले करने में निम्नलिखित पुलिसकर्मियों का योगदान अत्यंत सराहनीय रहा:
निरीक्षक: राधेश्याम दांगी (थाना प्रभारी, बघाना)
सहायक उप-निरीक्षक (ASI): कैलाश सोलंकी
प्रधान आरक्षक: मनोज ओझा
प्रधान आरक्षक: कैलाश चौधरी
आरक्षक: अनिल प्रजापति
आम जनता में बढ़ा पुलिस पर विश्वास
इस तरह के Neemuch Police Arrest एक्शन आम जनता में पुलिस के प्रति विश्वास को गहरा करते हैं। जब तीन साल पुराना अपराधी, जिसके खिलाफ 6 वारंट हों, पकड़ा जाता है, तो यह संदेश जाता है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है। आरोपी की गिरफ्तारी से अब न्यायालयीन प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी और पीड़ित पक्ष को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है।
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