नीमच SIR-2025: मतदाता सूची शुद्धिकरण या ‘गायब’ नामों की चुनौती? हज़ारों वोटरों के नाम हटने से अभियान पर सवाल

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नीमच: भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार जिले में चल रहा विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR–2025) अभियान एक तरफ जहाँ तेज़ी से डिजिटलाइजेशन कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ हजारों पात्र मतदाताओं के नाम सूची से गायब होने की शिकायतें इस प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं।

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कलेक्टर हिमांशु चंद्रा के मार्गदर्शन में अभियान में अब तक लगभग 46% फॉर्म का डिजिटलाइजेशन पूरा कर लिया गया है, जिसमें 2003 की SIR सूची को आधार बनाकर वर्तमान मतदाताओं और उनके परिवारों को लिंक किया जा रहा है। एसडीएम संजीव साहू लगातार फील्ड में सक्रिय हैं और शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने का दावा कर रहे हैं।

हजारों नाम गायब होने का आरोप

हालांकि, इस शुद्धिकरण अभियान को लेकर स्थानीय निवासियों और विपक्षी दलों के बीच चिंताएं बढ़ गई हैं। कई नागरिकों का आरोप है कि पिछले पुनरीक्षण कार्यों के दौरान हजारों पात्र लोगों के नाम मतदाता सूची से त्रुटिवश हटा दिए गए हैं, जिससे वे मतदान के अधिकार से वंचित हो सकते हैं।

कांग्रेस पार्षद हरगोविंद दीवान ने निर्वाचन टीम को सहयोग देने की बात दोहराई, लेकिन साथ ही ज़ोर देकर कहा कि उनकी पार्टी ऑनलाइन-ऑफलाइन माध्यम से लोगों की सहायता इसलिए कर रही है, ताकि ‘2003 की सूची के आधार पर नाम जोड़ते समय यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी पात्र मतदाता वंचित न रह जाए,’ जो कि पहले हुई त्रुटियों की ओर इशारा करता है।

प्रशासन का पक्ष और शुद्धिकरण का उद्देश्य

प्रशासन का कहना है कि अभियान का मुख्य उद्देश्य सूची को शुद्ध करना है—जिसमें मृतकों के नाम हटाना और डुप्लीकेट नामों को समाप्त करना शामिल है।

एसडीएम संजीव साहू ने स्वीकार किया कि 2003 की सूची को आधार बनाने का कारण यही है कि पहले की त्रुटियों को सुधारा जा सके। उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि वे बीएलओ को सही जानकारी देकर सहयोग करें, ताकि छूटे हुए नाम जोड़े जा सकें और सूची में हुई पुरानी गलतियों को सुधारा जा सके।

नीमच नगरपालिका अध्यक्ष स्वाति चोपड़ा ने कहा कि यह अभियान चुनावी प्रक्रिया के लिए एक अद्यतन और शुद्ध मतदाता सूची तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

देश के 12 राज्यों में चल रहा यह SIR अभियान, एक शुद्ध सूची तैयार करने का लक्ष्य रखता है, लेकिन नीमच में ‘गायब’ मतदाताओं को वापस सूची में लाना निर्वाचन विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

 

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