Rampura Fraud Arrest: बड़ी सफलता, 3 साल से फरार 6 लाख का ठग अहमदाबाद से गिरफ्तार

Rampura Fraud Arrest

Rampura Fraud Arrest

नीमच/रामपुरा: अपराध और अपराधियों के खिलाफ नीमच पुलिस अधीक्षक अंकित जायसवाल (SP Ankit Jaiswal) द्वारा चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत पुलिस को एक महत्वपूर्ण Rampura Fraud Arrest (रामपुरा धोखाधड़ी गिरफ्तारी) में सफलता मिली है। पुलिस ने अंतरराज्यीय गिरोह और ठगी के मामलों में बड़ी कार्रवाई करते हुए, पिछले तीन वर्षों से कानून की आंखों में धूल झोंक रहे एक शातिर ठग को गुजरात के अहमदाबाद से धर दबोचा है। यह मामला 6 लाख रुपये से अधिक की धोखाधड़ी का है, जिसने एक स्थानीय व्यापारी की कमर तोड़ दी थी।

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व्यापारी के भरोसे का उठाया फायदा: क्या है पूरा मामला ?

घटना की जड़ें वर्ष 2022 से जुड़ी हैं। रामपुरा के प्रतिष्ठित ग्रीन मर्चेंट कमीशन (Green Merchant Commission) के संचालक और फरियादी प्रकाशचंद घोटा के साथ एक सुनियोजित साजिश के तहत धोखाधड़ी की गई थी। पुलिस रिकॉर्ड और एफआईआर (अपराध क्रमांक 180/22, धारा 420 भादवि) के अनुसार, अहमदाबाद की एक फर्म ‘धनलक्ष्मी कैनवास’ ने मोबाइल और डिजिटल माध्यमों का सहारा लेकर फरियादी से संपर्क किया।

व्यापार में विश्वास सबसे बड़ी पूंजी होती है, और इसी का फायदा उठाते हुए आरोपियों ने प्रकाशचंद घोटा से 254.20 क्विंटल गेहूं का सौदा किया। सौदा 2405 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से तय हुआ था। माल भेज दिया गया, जिसकी कुल कीमत 6 लाख 11 हजार 351 रुपये थी। लेकिन माल पहुंचने के बाद भुगतान नहीं किया गया। जब फरियादी ने पैसे मांगे, तो आरोपी टालमटोल करने लगे और अंततः गायब हो गए।

3 साल से चल रहा था लुका-छिपी का खेल

इस हाई-प्रोफाइल Rampura Fraud Arrest केस में पुलिस के लिए चुनौती बड़ी थी। मुख्य आरोपी राकेश पिता किरोड़ीलाल शर्मा (49 वर्ष), जो कि 103, योगेश्वर रेसीडेंसी, आरटीओ रोड, वस्त्राल, अहमदाबाद का निवासी है, पिछले तीन सालों से पुलिस को चकमा दे रहा था। वह लगातार अपने ठिकाने बदल रहा था और पुलिस की गिरफ्त से दूर था।

गौरतलब है कि इस मामले में पुलिस ने पूर्व में एक अन्य आरोपी चेतन पिता कन्हैयालाल दामवानी (निवासी अहमदाबाद) को गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन मुख्य सूत्रधार राकेश शर्मा फरार था, जिसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार प्रयास कर रही थी।

कैसे बिछाया गया गिरफ्तारी का जाल?

नीमच एसपी अंकित जायसवाल के सख्त निर्देशों के बाद, एएसपी नवल सिंह सिसोदिया और मनासा एसडीओपी (SDOP) श्रीमती शबेरा अंसारी के मार्गदर्शन में एक विशेष टीम का गठन किया गया। रामपुरा थाना प्रभारी (TI) विजय सागरिया ने इस ऑपरेशन का नेतृत्व किया।

इस Rampura Fraud Arrest को अंजाम देने के लिए टीम को तकनीकी साक्ष्यों (Technical Surveillance) का सहारा लेना पड़ा। साइबर सेल नीमच ने आरोपी की डिजिटल लोकेशन ट्रेस की, जिसमें उसकी मौजूदगी गुजरात में पाई गई। इसके बाद, रामपुरा पुलिस की टीम ने तत्काल गुजरात कूच किया। वहां पहुंचकर स्थानीय क्राइम ब्रांच और अहमदाबाद पुलिस के साथ समन्वय स्थापित किया गया।

सटीक सूचना और संयुक्त प्रयास से पुलिस ने अहमदाबाद के वस्त्राल इलाके में दबिश दी और आरोपी राकेश शर्मा को गिरफ्तार कर लिया। यह गिरफ्तारी न केवल रामपुरा पुलिस की सतर्कता का प्रमाण है, बल्कि यह उन व्यापारियों के लिए भी राहत की खबर है जो ऑनलाइन ठगी का शिकार हो रहे हैं।

व्यापारियों के लिए सबक: डिजिटल सौदों में बरतें सावधानी

इस घटना से मन्डी व्यापारियों और आम जनता को भी सबक लेने की जरूरत है। आज के डिजिटल दौर में मोबाइल पर होने वाले सौदे जोखिम भरे हो सकते हैं। पुलिस ने अपील की है कि किसी भी अज्ञात फर्म या व्यक्ति के साथ लाखों का लेनदेन करने से पहले उसकी भौतिक पुष्टि (Physical Verification) अवश्य करें। केवल फोन पर हुई बातचीत के आधार पर माल भेजना आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है।

सराहनीय भूमिका: इन पुलिसकर्मियों ने किया कमाल

इस सफल ऑपरेशन और Rampura Fraud Arrest में निम्नलिखित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका महत्वपूर्ण रही:

  • निरीक्षक विजय सागरिया (थाना प्रभारी रामपुरा)

  • सउनि हरिसिंह सिसोदिया

  • सउनि नसीम अहमद

  • प्रधान आरक्षक 396 प्रदीप तिवारी

  • आरक्षक 597 विजय बारीवाल

  • आरक्षक 129 रघुवीर सिंह

  • आरक्षक 434 मुकेश मछार

  • आरक्षक 286 जितेन्द्र प्रजापत

  • विशेष सहयोग: साइबर सेल नीमच से प्र.आर. प्रदीप शिंदे, आर. लखन प्रताप सिंह और क्राइम ब्रांच अहमदाबाद।

पुलिस की इस मुस्तैदी ने साबित कर दिया है कि अपराधी चाहे दूसरे राज्य में ही क्यों न छिपा हो, कानून के हाथ उस तक पहुंच ही जाते हैं।


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