Sanwaliya ji Bhandar पहले दिन 10.65 करोड़ का रिकॉर्ड कैश, जानें 5 मार्च को क्यों होगी अगली गिनती?

Sanwaliya ji Bhandar

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चित्तौड़गढ़ न्यूज़। राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में स्थित सुप्रसिद्ध कृष्ण धाम श्री सांवलिया सेठ मंदिर में हमेशा की तरह भक्तों का सैलाब उमड़ा। इस बार करीब डेढ़ महीने के बाद जब Sanwaliya ji Bhandar (सांवलिया जी भंडार) खोला गया, तो पहले ही दिन 10 करोड़ 65 लाख रुपये से अधिक की रिकॉर्ड नकद राशि प्राप्त हुई। यह आंकड़ा अभी सिर्फ पहले दिन की गिनती का है, और अंतिम राशि इसके मुकाबले काफी बड़ी होने की उम्मीद है।

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कड़ी सुरक्षा और पूरी पारदर्शिता के साथ शुरू हुई गिनती

Sanwaliya ji Bhandar

सोमवार को राजभोग आरती के पश्चात मंदिर की प्राचीन धार्मिक परंपराओं का पालन करते हुए Sanwaliya ji Bhandar (सांवलिया जी भंडार) खोला गया। मंदिर परिसर में सुबह से ही सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रहे। मंदिर मंडल के पदाधिकारियों, प्रशासनिक अधिकारियों और बैंक कर्मियों की उपस्थिति में दानपात्रों से नोटों के बंडल निकाले गए।

Sanwaliya ji Bhandar

चढ़ावे की मात्रा इतनी विशाल थी कि नकदी की गिनती के लिए कर्मचारियों के साथ-साथ कई मशीनों का भी उपयोग करना पड़ा। देर शाम तक चले पहले चरण में ही 10.65 करोड़ रुपये की विशाल राशि गिनी जा चुकी थी। मंदिर प्रशासन के अनुसार, हर महीने बड़ी संख्या में देश-विदेश से श्रद्धालु यहां दर्शन और अपनी श्रद्धा प्रकट करने के लिए पहुंचते हैं, जिसके परिणामस्वरूप भंडार में हमेशा भारी मात्रा में दान जमा होता है।

गिनती में 2 दिन का ब्रेक क्यों? 5 मार्च का इंतजार

आमतौर पर भंडार खुलने के बाद गिनती का काम लगातार चलता रहता है, लेकिन इस बार Sanwaliya ji Bhandar (सांवलिया जी भंडार) की गिनती के बीच में दो दिन का अंतराल रखा गया है। पहले दिन की काउंटिंग पूरी होने के बाद, अब दूसरे चरण की गिनती 5 मार्च को ही शुरू होगी।

मंदिर प्रशासन ने इस ब्रेक के पीछे दो प्रमुख कारण बताए हैं:

  1. चंद्र ग्रहण का प्रभाव (3 मार्च): 3 मार्च को चंद्र ग्रहण और सूतक काल मान्य रहेगा। मंदिर की स्थापित धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं के अनुसार, इस दौरान कोई भी महत्वपूर्ण कार्य या गिनती नहीं की जा सकती।

  2. फूलडोल महोत्सव (4 मार्च): 4 मार्च, बुधवार को मंदिर में भव्य फूलडोल महोत्सव का आयोजन होना है। इस दौरान मंदिर में लाखों भक्तों की भारी भीड़ जुटने का अनुमान है। प्रशासन की प्राथमिकता दर्शनार्थियों की सुविधा और मंदिर में सुचारू व्यवस्था बनाए रखना है, इसलिए गिनती के काम को रोकना आवश्यक था।

मंदिर की सीईओ, प्रभा गौतम ने स्पष्ट किया कि, “श्रद्धालुओं की सुविधा और धार्मिक परंपराओं दोनों को ध्यान में रखते हुए ही गिनती का शेड्यूल तय किया गया है। 5 मार्च को दूसरे चरण की गिनती उसी पारदर्शिता और नियमों के साथ आगे बढ़ाई जाएगी।”

क्या है सांवलिया सेठ का भंडार खुलने की परंपरा?

श्री सांवलिया जी मंदिर में दानपात्र खोलने की व्यवस्था बहुत पुरानी और सुव्यवस्थित है। मंदिर मंडल के अनुसार, Sanwaliya ji Bhandar (सांवलिया जी भंडार) को मुख्य रूप से साल में एक बार और हर महीने एक तय तिथि पर खोला जाता है:

  • मासिक परंपरा: हर महीने अमावस्या से पहले आने वाली चतुर्दशी के दिन भंडार खोला जाता है।

  • वार्षिक विशेष: वर्ष में एक बार, फाल्गुन मास की पूर्णिमा से पहले आने वाली चतुर्दशी के दिन भी विशेष रूप से भंडार खोला जाता है। इस बार भी इसी परंपरा का निर्वहन किया गया है।

भंडार खोलने से पहले हमेशा राजभोग आरती और अन्य आवश्यक धार्मिक प्रक्रियाएं विधि-विधान से संपन्न की जाती हैं।

पिछली बार 35 करोड़ से ज्यादा था आंकड़ा

श्रद्धालुओं की भगवान के प्रति अगाध आस्था का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछली बार जनवरी माह में जब Sanwaliya ji Bhandar (सांवलिया जी भंडार) खुला था, तब कुल 35 करोड़ 40 लाख 93 हजार 313 रुपये की बंपर राशि प्राप्त हुई थी।

इस बार भी पहले दिन 10.65 करोड़ की बड़ी राशि सामने आ चुकी है। 5 मार्च को दूसरे राउंड की गिनती के बाद ही कुल नकद राशि का सही अनुमान लग पाएगा।

इसके अलावा, नकद राशि की पूरी गिनती होने के बाद ही ऑनलाइन माध्यमों से आए दान, सोने-चांदी के आभूषणों का तौल और अन्य सामग्रियों का हिसाब किया जाएगा। जब ये सभी प्रक्रियाएं पूरी हो जाएंगी, तब जाकर मंदिर मंडल द्वारा दान का अंतिम और आधिकारिक आंकड़ा जारी किया जाएगा। भक्तों को अब 5 मार्च का बेसब्री से इंतजार है कि उनके आराध्य के खजाने से इस बार कुल कितना दान प्राप्त होता है।


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