फिर खूनी बना Chinese Manjha: मासूम का गला कटने के बाद नींद से जागा प्रशासन, हर साल के प्रतिबंध का उड़ रहा मखौल

Chinese Manjha

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सिंगोली (नीमच)। क्या नीमच जिले में प्रशासन के आदेशों की कीमत सिर्फ कागज के टुकड़ों जितनी रह गई है? यह सवाल बुधवार को सिंगोली कस्बे में फिर से खड़ा हो गया, जब प्रतिबंधित Chinese Manjha (चीनी मांझा) ने एक और मासूम स्कूली बच्चे की जिंदगी खतरे में डाल दी। हर साल मकर संक्रांति से पहले कलेक्टर धारा 144 के तहत प्रतिबंध के आदेश जारी करते हैं, और हर साल यह जानलेवा धागा प्रशासन की नाक के नीचे बेखौफ बिकता है। बुधवार की घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि प्रशासनिक तंत्र इस खूनी खेल को रोकने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहा है।

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मौत के मुंह से बाल-बाल बचा स्कूली छात्र

Chinese Manjha घटना बुधवार दोपहर की है। एक स्कूली बच्चा अपनी धुन में घर जा रहा था, तभी हवा में लहराता हुआ धारदार Chinese Manjha उसके गले में आ फंसा। गनीमत यह रही कि बच्चे ने अद्भुत तत्परता दिखाई और तुरंत मांझे को अपने हाथों से गले से दूर खींच लिया। अगर कुछ सेकंड की भी देरी होती, तो यह मांझा गले की मुख्य नसों को काट सकता था और एक बड़ा हादसा हो सकता था।

हालांकि, मांझे की धार इतनी तेज थी कि बच्चे के गले पर एक लंबा और गहरा कट लग गया। सवाल यह है कि जब इस मांझे पर पूर्ण प्रतिबंध है, तो यह बच्चे के गले तक पहुंचा कैसे? यह सीधे तौर पर सिंगोली में सक्रिय उस माफिया की ओर इशारा करता है जो प्रशासन के डर के बिना मौत का सामान बेच रहा है।

घटना के बाद जागी पुलिस, लकीर पीटती नजर आई

Chinese Manjha से घायल बच्चे को लेकर आक्रोशित पिता कन्हैयालाल जंगम सीधे थाने पहुंचे। उनकी शिकायत प्रशासन के मुंह पर एक तमाचा थी कि शहर में खुलेआम प्रतिबंधित वस्तु कैसे बिक रही है। शिकायत मिलते ही सिंगोली पुलिस हरकत में आई, लेकिन यह कार्रवाई हमेशा की तरह ‘सांप निकल जाने के बाद लकीर पीटने’ जैसी ही नजर आई।

थानाधिकारी भूरालाल भाबर के नेतृत्व में पुलिस टीम ने बाजार में पतंग व्यापारियों की दुकानों की तलाशी ली। जैसा कि अपेक्षित था, देर शाम तक चली इस छापेमारी में किसी भी दुकान से Chinese Manjha बरामद नहीं हुआ। यह इस बात का सबूत है कि मांझा बेचने वाले सौदागर पुलिस की पहुंच से दो कदम आगे हैं और उनका नेटवर्क मुख्य बाजार से हटकर गुप्त स्थानों से संचालित हो रहा है।

सिर्फ बैठकों और हिदायतों का ‘सरकारी रस्म’

Chinese Manjha छापेमारी में असफलता हाथ लगने के बाद, पुलिस ने वही पुराना सरकारी तरीका अपनाया। थानाधिकारी ने कस्बे के सभी पतंग व्यापारियों की एक मीटिंग बुलाई और उन्हें चाइनीज मांझा न बेचने की सख्त हिदायत दी।

जनता का सवाल है कि क्या हर साल सिर्फ हिदायत देने से यह समस्या खत्म हो जाएगी? पिछले वर्षों में भी ऐसी ही बैठकें हुई हैं, लेकिन Chinese Manjha का बिकना बंद नहीं हुआ। यह स्पष्ट करता है कि प्रशासन के पास इस नेटवर्क को तोड़ने के लिए कोई ठोस खुफिया तंत्र या इच्छाशक्ति नहीं है, और कार्रवाई सिर्फ खानापूर्ति तक सीमित रह जाती है।

कलेक्टर के आदेशों का खुला उल्लंघन: किसकी शह पर?

गौरतलब है कि नीमच कलेक्टर हिमांशु चंद्रा ने हाल ही में जिले में चाइनीज मांझे (नायलॉन या सिंथेटिक धागा जिस पर कांच का लेप हो) की बिक्री, भंडारण और उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया है। इसके बावजूद, सिंगोली जैसे सीमावर्ती कस्बों में इसका आसानी से उपलब्ध होना कई गंभीर सवाल खड़े करता है:

  1. क्या स्थानीय प्रशासन और पुलिस की मिलीभगत के बिना यह संभव है?

  2. जब सबको पता है कि मांझा ‘ब्लैक’ में बिकता है, तो पुलिस उन स्रोतों तक क्यों नहीं पहुंच पाती?

  3. क्या कलेक्टर के आदेशों का डर अब अपराधियों के मन से खत्म हो चुका है?

हालांकि पुलिस ने दावा किया है कि यदि किसी के पास चाइनीज मांझा पाया गया तो वह कार्रवाई से बच नहीं पाएगा, लेकिन बुधवार की घटना ने प्रशासन के दावों की पोल खोलकर रख दी है। सिंगोली की जनता अब सिर्फ हिदायतें नहीं, बल्कि उन गोदामों पर बुलडोजर चलते देखना चाहती है जहां यह मौत का सामान छिपाया जाता है।


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