Singoli Road Update: भव्य उद्घाटन के 30 दिन बाद भी काम ‘शून्य’, धूल और गड्ढों ने तोड़ी जनता की कमर, ठेकेदार नदारद

Singoli Road
सिंगोली (राजेश कोठारी): सरकारी दावों और जमीनी हकीकत में कितना फर्क होता है, इसका जीता-जागता उदाहरण जावद विधानसभा के सिंगोली नगर में देखने को मिल रहा है। यहाँ विकास के नाम पर हुए वादे अब धूल के गुबार में खोते नजर आ रहे हैं।
मामला शहर की लाइफलाइन कहे जाने वाले Singoli Road (तिलस्वा चौराहे से पेट्रोल पंप तक) का है। हैरानी की बात यह है कि जिस सड़क का निर्माण कार्य शुरू करने के लिए खुद क्षेत्रीय विधायक और पूर्व मंत्री ओमप्रकाश सकलेचा ने एक महीने पहले भव्य समारोह आयोजित किया था, वहां आज तक एक ईंट भी नहीं हिली है। Singoli Road का यह प्रोजेक्ट अब जनता के लिए सिरदर्द और प्रशासन के लिए शर्मिंदगी का सबब बन चुका है।
30 दिन पहले हुआ था शिलान्यास, अब तक मशीनरी नदारद
तारीख थी 8 नवंबर 2025। स्थान था स्थानीय तिलस्वा चौराहा। भाजपा कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों और शहर के गणमान्य नागरिकों की भारी भीड़ के बीच विधायक ओमप्रकाश सकलेचा ने पूरे विधि-विधान के साथ Singoli Road के निर्माण कार्य का शुभारंभ किया था। जनता को उम्मीद बंधी थी कि अब उन्हें हिचकोले खाने से मुक्ति मिलेगी और शहर की सूरत बदल जाएगी।
समारोह में बड़े-बड़े वादे किए गए, लेकिन आज, जब इस आयोजन को पूरा एक महीना बीत चुका है, जमीनी हकीकत यह है कि सड़क निर्माण तो दूर, ठेकेदार ने वहां कार्य शुरू करने की सुध तक नहीं ली है। यह स्थिति न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि यह भी सवाल खड़ा करती है कि क्या उद्घाटन केवल फोटो खिंचवाने और अखबारों की सुर्खियां बटोरने के लिए किया गया था?
धूल के गुबार और उड़ते पत्थरों के बीच जिंदगी
तिलस्वा चौराहे से लेकर पेट्रोल पंप तक का यह Singoli Road मार्ग शहर का मुख्य प्रवेश द्वार है। यहाँ से प्रतिदिन सैकड़ों भारी वाहन, बसें और हजारों दोपहिया वाहन गुजरते हैं। सड़क पूरी तरह से उधड़ चुकी है और बड़े-बड़े गड्ढों में तब्दील हो गई है।
स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि वे इस सड़क के बनने का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे, लेकिन अब उनकी उम्मीदें टूट रही हैं।
व्यापारियों की पीड़ा: दिन भर उड़ने वाली धूल दुकानों के अंदर जमा हो रही है, जिससे उनका लाखों का सामान खराब हो रहा है। ग्राहक धूल और गंदगी के डर से दुकानों पर आने से कतराने लगे हैं, जिससे व्यापार चौपट हो रहा है।
राहगीरों का दर्द: वाहनों के टायरों से उछलने वाली गिट्टी और कंकड़ पैदल चलने वालों को चोटिल कर रहे हैं। दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह Singoli Road अब किसी ‘मौत के कुएं’ से कम नहीं रह गया है।
कीचड़ और फिसलन ने बढ़ाई मुसीबत
जनता के गुस्से को शांत करने के लिए, या यूं कहें कि औपचारिकता निभाने के लिए, सड़क पर पानी के टैंकरों से छिड़काव किया जा रहा है। लेकिन यह ‘जुगाड़’ अब समस्या बन गया है। पानी के कारण सड़क पर जमा मिट्टी कीचड़ में बदल जाती है, जिससे भयंकर फिसलन पैदा हो रही है।
आए दिन दोपहिया वाहन चालक फिसलकर गिर रहे हैं और चोटिल हो रहे हैं। एक तरफ धूल की मार है तो दूसरी तरफ कीचड़ की फिसलन। जनता जाए तो जाए कहाँ? Singoli Road निर्माण में हो रही यह देरी अब आम जनजीवन के लिए खतरा बनती जा रही है।
ठेकेदार की मनमानी और धूमिल होती जनप्रतिनिधि की छवि
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल सड़क ठेकेदार की भूमिका पर है। विधायक द्वारा कार्य का शुभारंभ करने के बाद भी ठेकेदार का मौके पर न पहुंचना यह दर्शाता है कि उसे न तो प्रशासन का डर है और न ही जनप्रतिनिधि के आदेश की परवाह।
नगरवासियों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि 8 नवंबर को केवल औपचारिकता पूरी की गई थी। ठेकेदार की इस लापरवाही का खामियाजा अब क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि को भी भुगतना पड़ रहा है। जनता के बीच यह संदेश जा रहा है कि विधायक के निर्देशों का पालन नहीं हो रहा है, जिससे उनकी राजनीतिक छवि धूमिल हो रही है। Singoli Road की दुर्दशा अब चुनावी चर्चा का विषय भी बन सकती है।
जिम्मेदार मौन, जनता त्रस्त
एक महीना बीतने के बावजूद, किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने यह जानने की कोशिश नहीं की कि आखिर काम शुरू क्यों नहीं हुआ। क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? शहरवासी, व्यापारी और राहगीर अब मजबूर और लाचार महसूस कर रहे हैं। उनकी मांग है कि Singoli Road का कार्य युद्ध स्तर पर तत्काल शुरू किया जाए, अन्यथा वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। अब देखना यह होगा कि कुंभकर्णी नींद में सोए ठेकेदार और प्रशासन की नींद कब खुलती है।

