Train Toilet में फंसे पूर्व CM के सलाहकार: 1 घंटे तक मौत से लड़े महेंद्र भारद्वाज, दरवाजा तोड़कर निकाला गया बाहर,देखे वीडियो

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टोंक/जयपुर: भारतीय रेलवे के आधुनिक होने के दावों के बीच एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने यात्री सुरक्षा और कोचों के रखरखाव पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के मीडिया सलाहकार और वरिष्ठ पत्रकार महेंद्र भारद्वाज शुक्रवार को एक खौफनाक हादसे का शिकार हो गए। कोटा-श्रीगंगानगर एक्सप्रेस में सफर के दौरान वे Train Toilet में फंस गए और करीब एक घंटे तक जिंदगी और मौत के बीच जद्दोजहद करते रहे। अंततः रेलवे कर्मचारियों ने शौचालय का दरवाजा तोड़कर उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला।
सफर के दौरान अचानक बनी जानलेवा स्थिति
घटना शुक्रवार, 30 जनवरी की शाम की है। टोंक निवासी महेंद्र भारद्वाज कोटा से जयपुर लौटने के लिए ट्रेन संख्या 22981, कोटा-श्रीगंगानगर एक्सप्रेस में सवार हुए थे। ट्रेन अपनी रफ्तार से चल रही थी और सवाई माधोपुर स्टेशन आने से कुछ किलोमीटर पहले भारद्वाज Train Toilet का उपयोग करने गए। जैसे ही उन्होंने अंदर से Train Toilet दरवाजा बंद किया, उसका लॉक पूरी तरह जाम हो गया। उन्होंने काफी कोशिश की, लेकिन पुराना और जर्जर हो चुका Train Toilet का गेट टस से मस नहीं हुआ।

महेंद्र भारद्वाज ने इस घटना की आपबीती शनिवार को सोशल मीडिया पर साझा की। उन्होंने बताया कि शौचालय का आकार महज 2 फीट गुणा 2 फीट था। इतनी संकरी जगह में न तो ठीक से खड़े होने की जगह थी और न ही हवा आने का पर्याप्त रास्ता। देखते ही देखते उनकी घबराहट बढ़ने लगी और सांस फूलने लगी।
2×2 के केबिन में दम घुटने की नौबत
भारद्वाज ने बताया कि जैसे-जैसे समय बीत रहा था, ऑक्सीजन की कमी महसूस होने लगी थी। उन्होंने दरवाजे को कई बार पीटा और चिल्लाकर मदद मांगी, लेकिन ट्रेन के शोर और कोच की बनावट के कारण बाहर किसी ने उनकी आवाज नहीं सुनी। उन्होंने बताया, “उस वक्त ऐसा लग रहा था कि शायद आज यह Train Toilet ही मेरी आखिरी जगह साबित होगा। बेचैनी इतनी बढ़ गई थी कि लग रहा था कि अभी बेहोश होकर गिर जाऊंगा।”
जब उन्हें लगा कि बाहर से कोई मदद नहीं मिल रही है, तो उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। सौभाग्य से उनके पास मोबाइल फोन मौजूद था। उन्होंने तुरंत अपने रिश्तेदार हरीश शर्मा और अपने बेटे दिव्यांश भारद्वाज को फोन लगाया। बता दें कि उनका बेटा दिव्यांश भारद्वाज आवां का सरपंच है।
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बेटे और रेलवे कर्मचारियों की सूझबूझ से बची जान
दिव्यांश और हरीश शर्मा ने तुरंत रेलवे की हेल्पलाइन और संबंधित अधिकारियों को मामले की जानकारी दी। परिजनों के लगातार संपर्क और शिकायत के बाद ट्रेन में मौजूद तकनीकी कर्मचारी हरकत में आए। जब कर्मचारी मौके पर पहुंचे, तो उन्होंने बाहर से लॉक खोलने की कोशिश की, लेकिन मैकेनिकल खराबी इतनी ज्यादा थी कि चाबी या अन्य औजारों से गेट नहीं खुला।
स्थित की गंभीरता को देखते हुए रेलवे कर्मचारियों ने हथौड़े का इस्तेमाल करने का फैसला किया। Train Toilet के दरवाजे पर हथौड़े से जोरदार प्रहार किए गए, जिससे दरवाजा अंदर की ओर टूटकर गिर गया। इस प्रक्रिया में दरवाजा भारद्वाज के हाथों पर जा गिरा, जिससे उन्हें हल्की चोटें भी आईं, लेकिन वे सुरक्षित बाहर निकलने में कामयाब रहे। इस पूरी जद्दोजहद में करीब एक घंटा बीत चुका था।
यात्रियों के लिए जरूरी नसीहत और रेलवे पर सवाल
महेंद्र भारद्वाज ने बाहर आने के बाद रेलवे की कार्यप्रणाली पर गहरा रोष व्यक्त किया। उन्होंने यात्रियों को सलाह देते हुए कहा कि कभी भी Train Toilet में जाते समय अपना मोबाइल साथ रखना न भूलें, क्योंकि आपात स्थिति में यही आपकी जान बचा सकता है। उन्होंने रेलवे प्रशासन से मांग की है कि पुराने कोचों की मरम्मत और रखरखाव पर ध्यान दिया जाए, ताकि किसी अन्य यात्री को इस तरह के मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना से न गुजरना पड़े।
यह घटना दर्शाती है कि रेलवे के स्लीपर और सामान्य कोचों में मेंटेनेंस की स्थिति कितनी दयनीय है। यदि उस समय भारद्वाज के पास फोन नहीं होता या नेटवर्क नहीं मिलता, तो परिणाम घातक हो सकते थे। रेलवे के अधिकारियों ने फिलहाल इस मामले में चुप्पी साध रखी है, लेकिन सोशल मीडिया पर इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद विभाग की काफी किरकिरी हो रही है।
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