पुरानी कार खरीदने-बेचने से पहले अलर्ट! लाल-किला ब्लास्ट ने सिखाईं ये 19 ज़रूरी बातें

नीमच: हाल ही में दिल्ली में लाल किला के पास एक कार विस्फोट की भयावह घटना ने 13 लोगों की जान ले ली। जांच में यह खुलासा हुआ कि विस्फोट में इस्तेमाल हुई कार कई बार हाथों-हाथ बेची गई थी, जिसके चलते पुलिस को उसके सभी पूर्व मालिकों की जांच करनी पड़ी। यह घटना उन सभी लोगों के लिए एक गंभीर चेतावनी है जो पुरानी कार के लेन-देन को सिर्फ एक डील मानते हैं और कानूनी प्रक्रिया को गंभीरता से नहीं लेते।
कार का मालिकाना हक़ सिर्फ एक लेन-देन नहीं, बल्कि एक गंभीर कानूनी ज़िम्मेदारी है। रजिस्ट्रेशन ट्रांसफर में ज़रा सी लापरवाही भी पुराने मालिक को किसी दुर्घटना, अपराध या जुर्माने की स्थिति में कानूनी पचड़ों में फंसा सकती है।
आज हम मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के तहत पुराने वाहनों की खरीद-बिक्री के लिए ज़रूरी कानूनी नियम और सावधानियों पर एक विस्तृत गाइड प्रस्तुत कर रहे हैं।
पुरानी कार बेचते समय 11 कानूनी सावधानियां (लापरवाही पड़ सकती है भारी)
कार बेचने के बाद निश्चिंत न हों। जब तक RC ट्रांसफर नहीं हो जाती, कानूनी जिम्मेदारी आपकी है।
- RC ट्रांसफर अनिवार्य: कार बेचने के 14 दिन (दूसरे राज्य में 45 दिन) के भीतर RTO में फॉर्म 29 और 30 जमा करके RC (रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट) नए मालिक के नाम ट्रांसफर कराएं।
- हाइपोथिकेशन क्लियरेंस: अगर कार लोन पर थी, तो बैंक से NOC लें और RTO में जाकर RC से हाइपोथिकेशन (गिरवी) की एंट्री हटवाएं।
- बीमा पॉलिसी ट्रांसफर: इंश्योरेंस पॉलिसी को नए मालिक के नाम पर ट्रांसफर करवाना अनिवार्य है, वरना क्लेम या कानूनी जिम्मेदारी पुराने मालिक पर आ सकती है।
- सेल लेटर/लिखित एग्रीमेंट: कार हैंडओवर करने से पहले गाड़ी की डिटेल (मॉडल, चेसिस/इंजन नंबर, कीमत) और जिम्मेदारी की तारीख स्पष्ट रूप से दर्ज करते हुए ‘सेल लेटर’ या ‘डिलीवरी नोट’ पर दोनों पक्षों के हस्ताक्षर कराएं।
- डीलर एग्रीमेंट: अगर डीलर के माध्यम से बेच रहे हैं, तो लिखित एग्रीमेंट में RTO ट्रांसफर की जिम्मेदारी और समय सीमा साफ-साफ लिखें।
- ऑनलाइन स्टेटस चेक: कार बेचने के बाद तुरंत parivahan.gov.in पर जाकर RC ट्रांसफर का स्टेटस चेक करते रहें।
- लोन की प्रक्रिया: अगर कार पर लोन बाकी है, तो बैंक की लिखित अनुमति के बाद ही ट्रांसफर प्रक्रिया शुरू करें।
- पेंडिंग चालान: सुनिश्चित करें कि गाड़ी पर कोई भी पुराना ट्रैफिक चालान, बकाया टैक्स या जुर्माना पेंडिंग न हो।
- PUC वैधता: पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल (PUC) सर्टिफिकेट वैध होना चाहिए।
- गवाहों के हस्ताक्षर: डील या एग्रीमेंट में दो गवाहों के हस्ताक्षर ज़रूर कराएं।
- दस्तावेजों की कॉपी: सभी हस्ताक्षरित फॉर्म, एग्रीमेंट और खरीदार के पहचान पत्रों की कॉपी अपने पास सुरक्षित रखें।
कार खरीदते समय 8 ज़रूरी दस्तावेज़ों की जांच
पुरानी कार खरीदने से पहले निम्नलिखित 8 दस्तावेज़ों की वैधता और सत्यता की जांच ऑनलाइन ज़रूर करें:
| डॉक्यूमेंट | जांच/पुष्टि बिंदु | ऑनलाइन जांच पोर्टल |
| 1. रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) | ओनर का नाम, रजिस्ट्रेशन डेट, टैक्स डिटेल, RC की वैधता | VAHAN पोर्टल (parivahan.gov.in) |
| 2. इंश्योरेंस पॉलिसी | पॉलिसी की एक्सपायरी डेट, स्टेटस | IIB पोर्टल (iib.gov.in) |
| 3. पॉल्यूशन सर्टिफिकेट (PUC) | PUC की वैधता, टेस्ट रिजल्ट | parivahan.gov.in |
| 4. सर्विस रिकॉर्ड | कार की वास्तविक किलोमीटर रीडिंग | अधिकृत सर्विस सेंटर |
| 5. सेल लेटर/एग्रीमेंट | कीमत, हैंडओवर की तारीख, कानूनी दायित्व | दोनों पक्षों के हस्ताक्षर |
| 6. NOC (यदि लोन था) | बैंक से लोन क्लियरेंस/हाइपोथिकेशन हटाने का सबूत | RC में एंट्री चेक करें |
| 7. चालान रिकॉर्ड | कोई बकाया जुर्माना या चालान पेंडिंग न हो | RTO/यातायात पुलिस पोर्टल |
| 8. रोड टैक्स रसीदें | रोड टैक्स पेमेंट का रिकॉर्ड | VAHAN पोर्टल |
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से खरीदते समय धोखाधड़ी से बचाव
OLX, Cars24 जैसे प्लेटफॉर्म सुविधा देते हैं, पर फर्जीवाड़े का खतरा भी होता है।
फिजिकल वेरिफिकेशन: सिर्फ ऑनलाइन लिस्टिंग पर भरोसा न करें। कार को व्यक्तिगत रूप से देखें और उसका चेसिस/इंजन नंबर भौतिक रूप से डॉक्यूमेंट्स से मिलाएँ।
फेक डॉक्यूमेंट: किसी भी डॉक्यूमेंट की फोटोकॉपी पर भरोसा न करें। मूल (ओरिजिनल) दस्तावेज़ देखें।
RTO ट्रांसफर: प्लेटफॉर्म की बजाय, यह सुनिश्चित करें कि RTO ट्रांसफर प्रक्रिया आपके सामने शुरू हो।
पेमेंट: अंतिम पेमेंट तभी करें जब RC ट्रांसफर की प्रक्रिया शुरू हो जाए, या किसी विश्वसनीय एस्क्रो सेवा का उपयोग करें।

