नीमच में बड़ा भूमि घोटाला: कांग्रेस नेत्री मधु बंसल पर बुजुर्ग महिला के 25 लाख हड़पने का सनसनीखेज आरोप

Land Scam
नीमच । मध्य प्रदेश के नीमच जिले से एक बेहद चौंकाने वाला और गंभीर मामला सामने आया है। यहां भादवामाता क्षेत्र की रहने वाली एक गरीब और बुजुर्ग आदिवासी महिला ने स्थानीय राजनीति और प्रशासन में हड़कंप मचा दिया है। इस कथित भूमि घोटाला (Land Scam) में आरोप किसी आम व्यक्ति पर नहीं, बल्कि इलाके की एक जानी-मानी कांग्रेस नेत्री मधु बंसल और उनके पति पर लगे हैं।
महिला का सीधा और स्पष्ट आरोप है कि नेत्री ने उनकी बेशकीमती जमीन को धोखे से अपने नाम करवा लिया और वादे के मुताबिक उन्हें एक रुपया तक नहीं दिया गया। एक गरीब आदिवासी महिला के साथ हुए इस धोखे ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है।
25 लाख का सौदा, लेकिन हाथ में नहीं आई एक ‘फूटी कौड़ी’

पीड़ित बुजुर्ग महिला, जिनका नाम कमली बाई भील है, ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट पहुंचकर भारी मन से न्याय की गुहार लगाई। उनकी आँखों में बेबसी के आंसू थे और हाथों में अपनी शिकायत का पुलिंदा। कमली बाई का आरोप है कि उनके साथ 25 लाख रुपये की साफ और सोची-समझी धोखाधड़ी हुई है। इस भूमि घोटाला (Land Scam) की शुरुआत तब हुई जब कांग्रेस नेता मधु बंसल और उनके पति ने कमली बाई की जमीन खरीदने का प्रस्ताव रखा।
दोनों पक्षों के बीच यह सौदा 25 लाख रुपये में तय हुआ था। लेकिन, बुजुर्ग महिला का सबसे बड़ा और गहरा दर्द यह है कि जब तहसील दफ्तर में जमीन की रजिस्ट्री करवाई गई, तो उनके हाथ में नकद राशि के रूप में एक रुपया भी नहीं रखा गया।
पैसों की हेराफेरी और बैंक खाते का शातिर खेल
इस हाई-प्रोफाइल भूमि घोटाला (Land Scam) में जो सबसे हैरान करने वाली बात सामने आ रही है, वह है पैसों के लेनदेन का शातिर तरीका। कमली बाई ने प्रशासन को दिए अपने लिखित शिकायती आवेदन में बताया कि आरोपियों ने साजिश के तहत उनके नाम पर शहर के एक बैंक में नया खाता खुलवाया था। सबसे बड़ी हैरानी की बात यह है कि इस बैंक खाते की पासबुक और एटीएम कार्ड कथित तौर पर मधु बंसल ने अपने पास ही रख लिए।
बुजुर्ग महिला का सीधा आरोप है कि रजिस्ट्री के नाम पर खाते में जो भी पैसा जमा करवाया गया था, वह बाद में चुपचाप निकाल लिया गया। आज उस बैंक खाते में महज 11 हजार रुपये बचे हैं। बात सिर्फ जमीन की धोखाधड़ी तक ही सीमित नहीं है; महिला का यह भी दावा है कि उनके आधार कार्ड से कोई दूसरा अज्ञात मोबाइल नंबर लिंक करवा दिया गया है, ताकि उनकी वृद्धावस्था पेंशन के पैसे भी आसानी से हड़पे जा सकें।
सिस्टम से उठ रहा भरोसा: तीन महीने से काट रहीं सरकारी दफ्तरों के चक्कर
आखिर एक अशिक्षित, बेबस और गरीब आदिवासी महिला न्याय मांगने के लिए जाए तो कहां जाए? कमली बाई का कहना है कि वह पिछले तीन महीनों से लगातार सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रही हैं। उनका दावा है कि इस भूमि घोटाला (Land Scam) की शिकायत उन्होंने पहले भी कई बार वरिष्ठ अधिकारियों से की, लेकिन मधु बंसल के मजबूत राजनीतिक रसूख और ऊंची पहुंच के आगे उनकी आवाज को हमेशा दबा दिया गया।
पुलिस और प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस और निष्पक्ष कार्रवाई न होने के कारण पीड़िता बुरी तरह टूट चुकी हैं। उन्होंने नीमच कलेक्टर से पुरजोर मांग की है कि इस फर्जी रजिस्ट्री को तुरंत प्रभाव से रद्द किया जाए और कांग्रेस नेत्री व उनके पति के खिलाफ धोखाधड़ी (धारा 420) का सख्त आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाए।
कांग्रेस नेत्री मधु बंसल का पलटवार: “यह मुझे ब्लैकमेल करने की गहरी साजिश है”

पत्रकारिता का सबसे बड़ा उसूल है दोनों पक्षों की बात को निष्पक्षता के साथ जनता के सामने रखना। जब इस चर्चित भूमि घोटाला (Land Scam) मामले में कांग्रेस नेता मधु बंसल से उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई, तो उन्होंने इन सभी गंभीर आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। मधु बंसल का स्पष्ट कहना है कि यह उन्हें राजनीतिक और सामाजिक रूप से बदनाम करने की एक सोची-समझी साजिश है।
उन्होंने अपना पक्ष मजबूती से रखते हुए कहा कि जमीन की खरीद-फरोख्त पूरी तरह से कानूनी प्रक्रिया और नियमों के तहत हुई है। चूँकि यह जमीन एक आदिवासी महिला की थी, इसलिए सरकारी नियमानुसार सबसे पहले कलेक्टर महोदय से विधिवत अनुमति प्राप्त की गई थी।
मधु बंसल का दावा है कि उनके पास बैंक ट्रांजेक्शन के पुख्ता सबूत, रजिस्ट्री के समय की वीडियोग्राफी और गवाहों के हस्ताक्षर मौजूद हैं, जो यह साबित करते हैं कि पूरे पैसे दिए गए थे। नेत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने वह जमीन अब किसी तीसरे व्यक्ति को बेच दी है, जिसके बाद जमीन की लगातार बढ़ती कीमतों का लालच देकर उन्हें ब्लैकमेल करने के लिए यह झूठी मनगढ़ंत कहानी रची जा रही है।
आगे क्या? अब प्रशासन के पाले में है पूरी गेंद
मध्य प्रदेश राज्य में आदिवासी वर्ग की जमीनों की सुरक्षा को लेकर काफी सख्त कानून लागू हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और अशिक्षित लोगों को ऐसे ही फर्जीवाड़े और भू-माफियाओं से बचाना है। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है
कि क्या वाकई यह एक बहुत बड़ा भूमि घोटाला (Land Scam) है, जिसमें एक गरीब आदिवासी महिला को सत्ता, पैसे और रसूख के बल पर कुचला जा रहा है? या फिर कांग्रेस नेत्री का दावा सच है और यह महज एक ब्लैकमेलिंग का प्रयास है?
सच जो भी हो, जिला प्रशासन को इस संवेदनशील मामले की एक निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच (SIT द्वारा) करवानी चाहिए। सभी संबंधित दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच और बैंक खातों के विस्तृत स्टेटमेंट से ही जल्द दूध का दूध और पानी का पानी हो सकेगा। फिलहाल, नीमच शहर के लोगों की निगाहें कलेक्टर और एसपी के अगले सख्त कदम पर टिकी हैं।
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