नीमच (Neemuch News): मध्यप्रदेश का मालवा अंचल, और विशेष रूप से नीमच व मंदसौर जिले, अपनी विशिष्ट भौगोलिक स्थिति और अफीम उत्पादन के लिए पूरे देश में जाने जाते हैं। लेकिन इसी काले सोने की आड़ में पनपता मादक पदार्थों की तस्करी और नशे का अवैध कारोबार प्रशासन के लिए एक लंबे समय से नासूर बना हुआ है।
अब इस गंभीर चुनौती को जड़ से उखाड़ फेंकने और युवा पीढ़ी का भविष्य सुरक्षित करने के लिए नीमच प्रशासन ने कमर कस ली है। इसी कड़ी में 26 मार्च 2026 को नीमच कलेक्टर सभा गृह में एक बेहद महत्वपूर्ण और उच्च स्तरीय NCORD Meeting (नारकोटिक्स कोऑर्डिनेशन) का आयोजन किया गया।
मध्यप्रदेश शासन के सख्त निर्देशों के अनुपालन में गठित इस जिला स्तरीय समिति की अहम बैठक की अध्यक्षता नीमच के कलेक्टर श्री हिमांशु चन्द्रा ने की। वहीं, इस पूरी कार्ययोजना का खाका सचिव एवं पुलिस अधीक्षक (SP) श्री अंकित जायसवाल के नेतृत्व में तैयार किया गया।
इस NCORD Meeting का मुख्य उद्देश्य जिले में नारकोटिक्स और अन्य नशीली दवाओं की तस्करी पर पूरी तरह से लगाम कसना, विभागों के बीच बेहतर समन्वय (Better Coordination) स्थापित करना और ग्राउंड लेवल पर एक ठोस एक्शन प्लान लागू करना था।
NCORD Meeting में लिए गए 7 ऐतिहासिक और कड़े फैसले
इस NCORD Meeting में जिले की वर्तमान स्थिति, तस्करी के नए रूट और तस्करों के काम करने के तरीकों का गहराई से विश्लेषण किया गया। सभी आला अधिकारियों ने एक सुर में माना कि नशे के सौदागरों के खिलाफ अब सिर्फ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति ही काम करेगी। लंबी चर्चा के बाद प्रशासन ने एक 7 सूत्रीय कड़ा एक्शन प्लान तैयार किया है, जिसे तत्काल प्रभाव से लागू किया जाएगा:
1. अवैध अफीम और भांग की खेती पर ‘तीसरी आंख’ से निगरानी:
नीमच जिले के कई सुदूर और ग्रामीण अंचलों में, जहां पुलिस की पहुंच मुश्किल होती है, वहां मादक फसलों की अवैध खेती की सूचनाएं मिलती रहती हैं। प्रशासन ने कड़ा फैसला लिया है कि अब ऐसे संभावित क्षेत्रों की कड़ी निगरानी ड्रोन और सैटेलाइट मैपिंग के जरिए की जाएगी। जमीनी स्तर पर पटवारियों और ग्राम पंचायत सचिवों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। मुखबिर तंत्र को और अधिक मजबूत व सक्रिय किया जाएगा।
2. क्रॉस-स्टेट (अंतर्राज्यीय) तस्करी पर होगी ‘सर्जिकल स्ट्राइक’:
नीमच की सीमाएं सीधे तौर पर राजस्थान से सटी हुई हैं। तस्कर इसी बात का फायदा उठाकर आसानी से बॉर्डर पार कर जाते हैं। इस NCORD Meeting में यह विशेष रूप से तय किया गया कि ऐसे सभी क्रॉस-स्टेट मामलों की जांच की प्रगति की सीधे कलेक्टर और एसपी स्तर पर मॉनिटरिंग की जाएगी।
दोनों राज्यों (एमपी और राजस्थान) की पुलिस और खुफिया एजेंसियों के बीच रियल-टाइम सूचनाएं साझा करने के लिए एक विशेष टास्क फोर्स काम करेगी।
3. शिक्षा के मंदिरों को बचाना: स्कूलों और कॉलेजों में महा-जागरूकता अभियान:
आजकल ड्रग माफियाओं के सबसे आसान शिकार स्कूली बच्चे और कॉलेज के युवा बन रहे हैं। शिक्षा के इन मंदिरों को इस धीमे जहर से बचाने के लिए स्कूलों और कॉलेजों में बड़े पैमाने पर ‘एंटी-ड्रग्स’ जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे। इसमें एनसीसी (NCC), एनएसएस (NSS) के छात्रों, शिक्षकों और सबसे महत्वपूर्ण, अभिभावकों को शामिल कर उन्हें नशे के शुरुआती लक्षणों को पहचानने की ट्रेनिंग दी जाएगी।
4. किसानों के लिए वैकल्पिक विकास कार्यक्रम :
जो ग्रामीण क्षेत्र मादक फसलों की अवैध खेती से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, वहां प्रशासन सिर्फ दंडात्मक कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगा। ऐसे इलाकों के किसानों को मुख्यधारा में लाने के लिए ‘वैकल्पिक विकास कार्यक्रम’ लागू किया जाएगा।
किसानों को दूसरी लाभप्रद, बागवानी और नकदी फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा तथा उन्हें सरकारी योजनाओं के तहत आर्थिक व तकनीकी मदद दी जाएगी।
5. नशामुक्ति और पुनर्वास केंद्रों की होगी सघन व औचक जांच:
जिले में चल रहे सरकारी और निजी नशामुक्ति व पुनर्वास केंद्रों का अब नियमित और बेहद सख्त पर्यवेक्षण होगा। प्रशासन की विशेष टीमें औचक निरीक्षण कर यह सुनिश्चित करेंगी कि वहां इलाज के नाम पर मरीजों का शोषण न हो रहा हो। नशे के शिकार लोगों को वहां उचित चिकित्सीय सुविधा, पौष्टिक आहार और योग्य मनोवैज्ञानिकों की सहायता अनिवार्य रूप से मिलनी चाहिए।
6. नशे के शिकार लोगों की समाज में सम्मानजनक वापसी:
प्रशासन का स्पष्ट रुख है कि नशे का शिकार हुआ व्यक्ति कोई जन्मजात अपराधी नहीं, बल्कि एक भटका हुआ पीड़ित है। समिति ने यह बड़ा लक्ष्य तय किया है कि नशे के आदी लोगों को वॉर्ड और पंचायत स्तर पर चिन्हित किया जाएगा।
उन्हें इस जानलेवा लत से छुटकारा दिलाने के बाद, उनके कौशल विकास पर काम होगा ताकि वे रोजगार से जुड़कर समाज के मुख्य परिवेश में सम्मान के साथ लौट सकें।
7. ड्रग ‘हॉट स्पॉट’ को नेस्तनाबूद करना:
पुलिस और खुफिया विभाग मिलकर जिले के उन तमाम इलाकों, ढाबों, और कॉलोनियों की एक विस्तृत खुफिया लिस्ट तैयार करेंगे जो नशे के ‘हॉट स्पॉट’ बन चुके हैं या जहां इसकी बिक्री सबसे ज्यादा है।
ऐसे चिन्हित और अति-संवेदनशील स्थानों पर पुलिस की गश्त बढ़ाई जाएगी, लगातार दबिश दी जाएगी और बड़े स्तर पर अवेयरनेस कैंप लगाकर स्थानीय जनता का विश्वास जीता जाएगा ताकि वे बेखौफ होकर तस्करों की जानकारी पुलिस को दें।
तमाम विभागों ने नशे के खिलाफ मिलाया हाथ
नशे के खिलाफ इस महायुद्ध में कोई एक विभाग अकेला जीत हासिल नहीं कर सकता। इसीलिए इस NCORD Meeting में सभी संबंधित विभागों के आला अधिकारी एक मंच पर नजर आए। बैठक में कलेक्टर श्री हिमांशु चन्द्रा और SP श्री अंकित जायसवाल के अलावा, जिला शिक्षा अधिकारी श्री एस.एम. मांगरिया, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. डी. प्रसाद, नारकोटिक्स विंग नीमच से निरीक्षक श्री तेजेन्द्र सिंह सैंगर व निरीक्षक श्री राजमल दायमा, वन विभाग के आरएफओ श्री विशाल खेड़कर और मनोवैज्ञानिक नशा मुक्ति केन्द्र नीमच के विशेषज्ञ श्री जीवन तिवारी उपस्थित रहे और सभी ने अपनी-अपनी विभागीय कार्ययोजनाएं प्रस्तुत कीं।
कुल मिलाकर, नीमच प्रशासन की यह बहुआयामी NCORD Meeting इस बात का स्पष्ट उद्घोष है कि जिले में अब ड्रग माफियाओं, तस्करों और इस काले कारोबार में लिप्त सफेदपोशों के दिन पूरी तरह लद चुके हैं। प्रशासन एक तरफ जहां अपराधियों पर कहर बनकर टूटेगा, वहीं दूसरी ओर भटके हुए युवाओं की उंगली पकड़कर उन्हें सही रास्ता दिखाने का काम भी करेगा।













