About Us

हमारे बारे में (About Us) — सच, साहस और सरोकार

“कहते हैं जो बाकी छुपाते हैं”

हमारी कहानी और सोच (Our Story & Vision): पत्रकारिता (Journalism) का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं, बल्कि समाज को आईना दिखाना होता है। लेकिन आज के दौर में, जब खबरों का बाज़ार सज चुका है, और सच को शोर में दबा दिया जाता है, तब जन्म होता है The Times of MP Media Network का।

हमने इस न्यूज़ पोर्टल की शुरुआत एक बहुत बड़े सवाल के साथ की थी— “क्या आपको वो सब बताया जा रहा है, जो जानना आपका हक़ है?”
जवाब अक्सर ‘नहीं’ होता था। इसी खालीपन को भरने के लिए और दबी हुई आवाज़ों को मंच देने के लिए हम आए हैं।
जैसा कि हमारी टैगलाइन कहती है— “कहते हैं जो बाकी छुपाते हैं”

 

हम दूसरों से अलग क्यों हैं? (Why We Are Different): मुख्यधारा का मीडिया (Mainstream Media) अक्सर उन मुद्दों पर खामोश रहता है जो रसूखदारों को चुभते हैं। लेकिन हमारी पत्रकारिता की कलम किसी के दबाव में नहीं रुकती।

  • हम तह तक जाते हैं: जब बाकी चैनल हेडलाइन बताकर आगे बढ़ जाते हैं, हम वहां रुकते हैं और खबर की तह (Depth) तक जाते हैं।

  • सवाल पूछने की हिम्मत: हम सत्ता से, सिस्टम से और समाज के ठेकेदारों से वो सवाल पूछते हैं जिनसे बाकी लोग कतराते हैं।

  • जनता की अदालत: हमारा एजेंडा किसी पार्टी या विचारधारा को खुश करना नहीं, बल्कि जनता के हित (Public Interest) में सच को सामने लाना है।

     

हमारा मिशन (Our Mission): हमारा मकसद साफ है— पत्रकारिता के गिरते स्तर को फिर से उठाना। हम चाहते हैं कि हमारा पाठक जब हमारी खबर पढ़े, तो उसे यकीन हो कि यह सत्य (Truth), तथ्य (Facts) और प्रमाण (Evidence) पर आधारित है। हम अफवाहों का नहीं, असली खबरों का व्यापार करते हैं।

हम क्या कवर करते हैं? (What We Cover): हम समाज के हर उस पहलू पर नज़र रखते हैं जो आपसे जुड़ा है:

  • राजनीति (Politics): बयानों के पीछे की असली राजनीति।

  • अपराध और भ्रष्टाचार (Crime & Corruption): वो स्कैम और क्राइम जो फाइलों में दबे रह जाते हैं।

  • युवा और रोजगार: छात्रों और बेरोजगारों की आवाज़।

  • सामाजिक मुद्दे: वो समस्याएं जो टीवी डिबेट का हिस्सा नहीं बन पातीं।

     

आपसे हमारा वादा (Our Promise to You): The Times of MP Media Network वादा करता है कि हम कभी भी टीआरपी (TRP) के लिए झूठ नहीं परोसेंगे। हमारी खबरें कड़वी हो सकती हैं, चुभने वाली हो सकती हैं, लेकिन वो सच्ची होंगी।

संपादक की कलम से (From the Editor’s Desk):

“सच कहना बगावत है तो हम बागी हैं। अगर आप भी झूठ और प्रोपेगेंडा से थक चुके हैं, तो The Times of MP को अपना हमसफ़र बनाइए। हम खामोश नहीं रहेंगे, क्योंकि हम वो कहते हैं, जो बाकी छुपाते हैं।


— आकाश शर्मा
 (Founder & Editor-in-Chief, The Times of MP Media Network)

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