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Jawad Police Controversy: क्या रंजिश में जारी हुआ 1 लाख का नोटिस? जावद पुलिस पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप

Jawad Police Controversy

नीमच (जावद) (Jawad News): Jawad Police Controversy के तहत नीमच जिले की जावद तहसील में पुलिस और जनता के बीच का टकराव अब एक बेहद गंभीर मोड़ ले चुका है। जावद निवासी सुनील माली ने स्थानीय पुलिस प्रशासन, विशेष रूप से थाना प्रभारी विकास पटेल पर भ्रष्टाचार, अवैध वसूली और पद के दुरुपयोग के सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। मामला केवल एक नोटिस तक सीमित नहीं है, बल्कि अब इसमें 1,00,000/- रुपये के मुचलके और पुलिस की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।

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‘The Times of MP’ की विशेष पड़ताल में सामने आया है कि Jawad Police Controversy किस तरह एक आम नागरिक खाकी की हनक और रंजिश का शिकार होने का दावा कर रहा है।

1 लाख रुपये का मुचलका और नोटिस का पूरा सच

Jawad Police Controversy की शुरुआत तब हुई जब न्यायालय कार्यपालिक दण्डाधिकारी, जावद द्वारा सुनील माली के विरुद्ध भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 130 के अंतर्गत एक ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किया गया। इस Jawad Police Controversy नोटिस में सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि सुनील माली को अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए 1,00,000/- (एक लाख) रुपये की भारी-भरकम जमानत और उतनी ही राशि का मुचलका पेश करने का निर्देश दिया गया है।

सुनील माली ने इस कार्यवाही को पूरी तरह से मनगढ़ंत और द्वेषपूर्ण करार दिया है। पुलिस द्वारा प्रस्तुत इस्तगासा क्रमांक 101/2026 के अनुसार, 27 फरवरी 2026 को किसी घटना का होना बताया गया है। हालांकि, सुनील माली ने पुख्ता सबूतों के साथ दावा किया है कि उस दिन वे जावद में मौजूद ही नहीं थे। वे अपनी पत्नी के साथ राजस्थान के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल सांवलियाजी में दर्शन करने गए हुए थे और रात को करीब 7 बजे अपने घर वापस लौटे थे। ऐसे में बिना किसी ठोस आधार के 1 लाख रुपये का मुचलका मांगना पुलिस की नीयत पर संदेह पैदा करता है।

रंजिश की कहानी: अवैध वसूली का विरोध पड़ा भारी?

सुनील माली ने पुलिस महानिदेशक (DGP), डीआईजी (DIG), आईजी (IG) और पुलिस अधीक्षक (SP) नीमच को भेजे गए शिकायती पत्रों में गंभीर खुलासा किया है उनका Jawad Police Controversy मामले में आरोप है कि उन्होंने पूर्व में पुलिस को मिट्टी और रेत के डंपर चालकों से अवैध रूप से वसूली करते हुए देख लिया था, जिसके बाद से ही थाना प्रभारी विकास पटेल उनसे व्यक्तिगत रंजिश रखने लगे हैं।

पीड़ित का कहना है कि थाना प्रभारी द्वारा उन्हें बार-बार डराया-धमकाया जा रहा है और अनुचित रुपयों की मांग की जा रही है। सुनील माली का कोई पिछला आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और वे समाज में एक शांतिप्रिय व्यक्ति के रूप में जाने जाते हैं, लेकिन इसके बावजूद उन पर झूठे मुकदमे दर्ज करने का भय दिखाया जा रहा है। यह Jawad Police Controversy अब मानवाधिकारों के उल्लंघन का एक बड़ा मामला बनता जा रहा है।

‘The Times of MP’ का रियलिटी चेक: TI विकास पटेल का पक्ष

इस Jawad Police Controversy की गहराई तक जाने के लिए ‘The Times of MP’ की टीम ने जावद थाना प्रभारी विकास पटेल से संपर्क साधा। जब उनसे सुनील माली द्वारा लगाए गए वसूली के आरोपों और 1 लाख रुपये के नोटिस के बारे में सवाल किया गया, तो उनका जवाब बेहद औपचारिक और टालने वाला था।

जब रिपोर्टर ने सुनील माली के आवेदन और उन पर हुई कार्रवाई के बारे में सवाल किया, तो थाना प्रभारी विकास पटेल ने स्वीकार किया कि उनके विरुद्ध धारा 107/116 (BNSS) के तहत प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई है और उन्हें ‘बाउंड ओवर’ (Bound Over) करने के लिए नोटिस जारी किया गया है।

हालांकि, जब रिपोर्टर ने इस कार्रवाई का ठोस आधार और अपराध का रिकॉर्ड पूछा, तो थाना प्रभारी ने फोन पर जानकारी देने से स्पष्ट मना कर दिया। उन्होंने कहा,“मैं फोन पर सारी चीजें नहीं बता सकता, आप थाने आइए, रिकॉर्ड देखिए, तब मैं आपको समझा पाऊंगा।” पुलिस का यह टालमटोल वाला रवैया सवाल खड़ा करता है कि यदि कार्रवाई नियमानुसार है, तो उसे सार्वजनिक करने या प्रेस को जानकारी देने में हिचकिचाहट क्यों?

क्या कहता है कानून और आगे की राह?

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के तहत धारा 107/116 का उपयोग तब किया जाता है जब किसी व्यक्ति से शांति भंग होने की प्रबल आशंका हो। लेकिन Jawad Police Controversy मामले में सुनील माली, जहाँ वे खुद को निर्दोष बता रहे हैं और पुलिस रिकॉर्ड दिखाने में आनाकानी कर रही है, यह मामला मानवाधिकारों के उल्लंघन की ओर इशारा करता है।

पीड़ित ने मांग की है कि थाना प्रभारी के विरुद्ध IPC की धाराओं (166, 167, 211, 220) के तहत जांच होनी चाहिए, जो सरकारी कर्मचारी द्वारा गलत दस्तावेज तैयार करने और किसी को अवैध रूप से फंसाने से संबंधित हैं

अब देखना यह होगा कि नीमच पुलिस अधीक्षक और अन्य वरिष्ठ अधिकारी इस Jawad Police Controversy में हस्तक्षेप कर सुनील माली को न्याय दिलाते हैं या खाकी की हनक के आगे एक आम आदमी की आवाज दब कर रह जाएगी।


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