नीमच (Neemuch News): कहते हैं कि धरती पर डॉक्टर भगवान का ही दूसरा रूप होते हैं, और इस बात को मध्य प्रदेश के नीमच अस्पताल (Neemuch Hospital) के चिकित्सकों ने एक बार फिर सच साबित कर दिखाया है। एक ऐसी मेडिकल इमरजेंसी, जिसमें मरीज के बचने की उम्मीद ना के बराबर थी, वहां डॉक्टरों की सूझबूझ और त्वरित निर्णय ने एक महिला को मौत के जबड़े से सुरक्षित बाहर निकाल लिया। यह पूरा मामला ‘रप्चरड इक्टोपिक प्रेगनेंसी’ (Ruptured Ectopic Pregnancy) का है, जो किसी भी गर्भवती महिला के लिए सबसे खतरनाक और जानलेवा स्थितियों में से एक मानी जाती है।
क्या था पूरा घटनाक्रम?
मूल रूप से मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले की रहने वाली गेंदाबाई अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए राजस्थान के कनेरा में मजदूरी करने गई हुई थीं। रोजमर्रा की तरह काम चल रहा था, तभी अचानक गेंदाबाई के पेट में असहनीय दर्द उठने लगा।
दर्द इतना भयानक था कि उनकी हालत पल-पल बिगड़ने लगी और वह बेहोशी की हालत में जाने लगीं। घबराए हुए परिजन बिना कोई देरी किए उन्हें लेकर सीधे नीमच अस्पताल (Neemuch Hospital) पहुंचे। जब शुरुआती जांच की गई, तो जो सच सामने आया उसने डॉक्टरों के भी होश उड़ा दिए।
गर्भाशय के बाहर फटी नली और शरीर में बचा सिर्फ 2 पॉइंट ब्लड

सोनोग्राफी और अन्य क्रिटिकल मेडिकल जांचों में पता चला कि गेंदाबाई ‘रप्चरड इक्टोपिक प्रेगनेंसी’ का शिकार हो गई हैं। आसान भाषा में समझें तो भ्रूण गर्भाशय (Uterus) में विकसित होने के बजाय फैलोपियन ट्यूब (नली) में ही ठहर गया था। जैसे-जैसे भ्रूण का आकार बढ़ा, वैसे-वैसे नली पर दबाव पड़ा और वह नली पेट के अंदर ही फट गई। नली फटने की वजह से महिला के पूरे पेट में भारी मात्रा में खून फैल गया था।
मेडिकल रिपोर्ट्स के मुताबिक, अत्यधिक आंतरिक रक्तस्राव (Internal Bleeding) के कारण गेंदाबाई का ब्लड लेवल (हीमोग्लोबिन) गिरकर मात्र 2 पॉइंट (2 gm/dL) रह गया था। इसके साथ ही उनका ब्लड प्रेशर (BP) भी इतने खतरनाक स्तर तक नीचे जा चुका था कि नब्ज मिलना भी मुश्किल हो रहा था। शरीर सफेद पड़ चुका था और सांसें उखड़ने लगी थीं।
रास्ते में ही टूट सकती थी सांसों की डोर

आमतौर पर इतने गंभीर और क्रिटिकल मामलों में, छोटे शहरों के अस्पतालों से मरीजों को तुरंत बड़े मेडिकल सेंटर्स या महानगरों के लिए रेफर कर दिया जाता है। लेकिन नीमच अस्पताल (Neemuch Hospital) की डॉ. लाड धाकड़ ने स्थिति की नजाकत को गहराई से समझा।
नीमच अस्पताल (Neemuch Hospital) की डॉ. धाकड़ ने बताया कि मरीज की हालत इतनी नाजुक थी कि अगर उन्हें किसी अन्य बड़े अस्पताल के लिए रेफर किया जाता, तो रास्ते में ही एंबुलेंस में उनकी जान जा सकती थी। समय बहुत कम था और चुनौती पहाड़ जैसी बड़ी। ऐसे में मेडिकल टीम ने जोखिम उठाते हुए खुद ही इस जटिल ऑपरेशन को करने का साहसिक और ऐतिहासिक फैसला लिया।
2 घंटे तक चला नीमच अस्पताल (Neemuch Hospital) में मौत से संघर्ष
नीमच अस्पताल (Neemuch Hospital) के ऑपरेशन थियेटर में डॉक्टरों की टीम ने तुरंत मोर्चा संभाला। करीब दो घंटे तक यह बेहद जटिल और तनावपूर्ण ऑपरेशन चला। इस दौरान गेंदाबाई के शरीर में खून की भारी कमी को पूरा करने के लिए उन्हें 4 बोतल खून और 6 बोतल प्लाज्मा चढ़ाया गया। एक-एक पल कीमती था, लेकिन डॉक्टरों की अटूट मेहनत और विशेषज्ञता आखिरकार रंग लाई। फटी हुई नली को सुरक्षित तरीके से हटाकर रक्तस्राव को रोका गया और मरीज की जान बचा ली गई।
इन ‘रियल लाइफ हीरोज’ ने निभाया अहम किरदार
इस मेडिकल चमत्कार को अंजाम देने में नीमच अस्पताल (Neemuch Hospital) के डॉक्टरों की पूरी टीम का महत्वपूर्ण योगदान रहा। डॉ. लाड धाकड़ के कुशल नेतृत्व में डॉ. रुखसिन खान, डॉ. दिनेश, डॉ. कुणाल और पूरे नर्सिंग स्टाफ ने बेहतरीन टीम वर्क का प्रदर्शन किया। यह सफलता दिखाती है कि अगर सरकारी अस्पतालों में सही समय पर सही फैसले लिए जाएं, तो बड़े से बड़े खतरे को आसानी से टाला जा सकता है।
क्या होती है इक्टोपिक प्रेगनेंसी?
सामान्य गर्भावस्था में अंडा गर्भाशय में जाकर फर्टिलाइज होता है। लेकिन इक्टोपिक प्रेगनेंसी में यह प्रक्रिया गर्भाशय के बाहर, आमतौर पर फैलोपियन ट्यूब में होने लगती है। नली में भ्रूण के विकास के लिए जगह नहीं होती, इसलिए वह फट जाती है। इसके लक्षण पेट में तेज दर्द, चक्कर आना और अचानक ब्लीडिंग होना है। महिलाओं को शुरुआती दौर में ही अपनी सोनोग्राफी जरूर करानी चाहिए।
परिवार ने नम आंखों से कहा- “हमें नया जीवन मिल गया”
नीमच अस्पताल (Neemuch Hospital) में सफल ऑपरेशन के बाद गेंदाबाई को सघन निगरानी के लिए वेंटिलेटर और आईसीयू (ICU) में रखा गया था। अब उनकी हालत पूरी तरह से खतरे से बाहर है और वह तेजी से रिकवर कर रही हैं। गेंदाबाई और उनके परिजनों की आंखों में खुशी के आंसू हैं। उन्होंने अस्पताल के सभी डॉक्टरों और स्टाफ का हाथ जोड़कर आभार व्यक्त किया है और इसे गेंदाबाई के लिए एक ‘नया जीवन’ मिलना बताया है। पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद, आज शाम उन्हें डिस्चार्ज कर दिया जाएगा।
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