रतलाम न्यूज। मध्य प्रदेश के रतलाम जिले के आदिवासी क्षेत्र में खसरा (khasara) का गंभीर मामला सामने आया है, जिसने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। रावटी क्षेत्र के देथला गांव में 9 वर्षीय बच्ची की मौत के बाद अब प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। सोमवार को आई रिपोर्ट में खसरा (khasara) की पुष्टि होने के बाद मंगलवार को गांव में विशेष सर्वे अभियान चलाने की तैयारी की गई है।
मौत के बाद सामने आई खसरा (khasara) रिपोर्ट
जानकारी के अनुसार, देथला गांव निवासी 9 वर्षीय कविता की 12 मार्च को मौत हो गई थी। बच्ची को पहले बुखार और कमजोरी की शिकायत हुई थी, जिसके बाद उसे रावटी स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। वहां से हालत गंभीर होने पर उसे मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई।
सोमवार को जब जांच रिपोर्ट आई, तो यह स्पष्ट हुआ कि बच्ची की मौत खसरा (khasara) संक्रमण के कारण हुई है। इस खुलासे के बाद पूरे स्वास्थ्य महकमे में हलचल मच गई है।
बीमारी की शुरुआत और हालात
परिजनों ने बताया कि बच्ची को करीब 20 दिन पहले बुखार आया था। शुरुआती दिनों में उसे सामान्य बीमारी समझा गया। इसी दौरान उसके माता-पिता मजदूरी के लिए राजस्थान चले गए थे और बच्ची अपनी दादी के पास रह रही थी।
स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव पहुंची थी और दवा भी दी गई थी, जिससे बच्ची कुछ समय के लिए ठीक हो गई थी। लेकिन बाद में उसकी हालत अचानक बिगड़ गई।
यह पूरा मामला खसरा (khasara) के प्रति जागरूकता और समय पर इलाज की जरूरत को उजागर करता है।
स्वास्थ्य विभाग की प्रतिक्रिया और जांच
जिला अस्पताल के प्रभारी सीएमएचओ डॉ. एपी सिंह ने बताया कि बच्ची की रिपोर्ट खसरा (khasara) पॉजिटिव आई है। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले की विस्तृत जांच की जाएगी, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इलाज में कहीं कोई लापरवाही तो नहीं हुई।
उन्होंने यह भी कहा कि गांव में स्वास्थ्य टीम भेजी जा रही है, जो हर घर जाकर बच्चों की जांच करेगी और संभावित खसरा (khasara) मामलों की पहचान करेगी।
गांव में विशेष स्वास्थ्य सर्वे अभियान
बच्ची की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने गांव में विशेष सर्वे अभियान शुरू करने का फैसला किया है। इस अभियान के तहत बच्चों के स्वास्थ्य की जांच, टीकाकरण की स्थिति और खसरा (khasara) के लक्षणों की पहचान की जाएगी।
टीम यह सुनिश्चित करेगी कि किसी भी अन्य बच्चे में खसरा (khasara) के लक्षण नजर आएं तो तुरंत इलाज शुरू किया जाए। इससे भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
टीकाकरण पर उठे सवाल
इस घटना से पहले भी क्षेत्र में टीकाकरण से जुड़ा एक मामला सामने आया था। करीब 20 दिन पहले नयाखेड़ा गांव में बच्चों को टीके लगाए गए थे, जिसके बाद दो बच्चों की तबीयत बिगड़ गई थी।
इनमें से एक 10 महीने के बच्चे की मौत हो गई थी। हालांकि इस मामले में जांच की बात कही गई थी, लेकिन अब तक कोई स्पष्ट रिपोर्ट सामने नहीं आई है।
लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने स्वास्थ्य सेवाओं और निगरानी प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
लगातार बढ़ते खसरा (khasara) मामलों ने प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। खासकर आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच और जागरूकता की कमी एक बड़ा कारण बन रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि खसरा (khasara) जैसी संक्रामक बीमारी से बचाव के लिए समय पर टीकाकरण और शुरुआती लक्षणों की पहचान बेहद जरूरी है।
यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो ऐसे मामलों में बढ़ोतरी हो सकती है, जो गंभीर स्थिति पैदा कर सकती है।
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