Bengaluru Police का इंस्पेक्टर ₹4 लाख रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार, बीच सड़क पर किया भयंकर ड्रामा!

Bengaluru Police
बेंगलुरु: जब कानून के रखवाले ही कानून की धज्जियां उड़ाने लगें, तो समाज में न्याय की उम्मीद धुंधली पड़ने लगती है। कर्नाटक की राजधानी में Bengaluru Police का एक ऐसा चेहरा सामने आया है जिसने पूरे महकमे को शर्मसार कर दिया है। यहाँ के के.पी. अग्रहारा थाने में तैनात एक पुलिस इंस्पेक्टर को लोकायुक्त पुलिस ने ₹4 लाख की मोटी रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों दबोचा है। लेकिन कहानी सिर्फ रिश्वत तक सीमित नहीं रही; पकड़े जाने के बाद इस अधिकारी ने जो ‘हाई-वोल्टेज ड्रामा’ किया, उसने भ्रष्टाचार की इस घटना को और भी घिनौना बना दिया।
क्या है पूरा भ्रष्टाचार का मामला?
यह शर्मनाक Bengaluru Police घटना 29 जनवरी 2026 की है। आरोपी इंस्पेक्टर की पहचान गोविंदराजू के रूप में हुई है। Bengaluru Police के इस अधिकारी के खिलाफ एम.डी. अकबर नाम के व्यक्ति ने लोकायुक्त में शिकायत दर्ज कराई थी। अकबर ने आरोप लगाया था कि एक धोखाधड़ी के मामले में उसे राहत देने और जमानत दिलाने के बदले में इंस्पेक्टर गोविंदराजू ₹5 लाख की डिमांड कर रहा था।
शिकायतकर्ता के अनुसार, वह पहले ही ₹1 लाख की पहली किस्त दे चुका था। लेकिन इंस्पेक्टर का लालच यहीं खत्म नहीं हुआ। वह बाकी के ₹4 लाख के लिए लगातार दबाव बना रहा था। अकबर ने इस भ्रष्टाचार के आगे झुकने के बजाय लोकायुक्त पुलिस का दरवाजा खटखटाया, जिसके बाद जाल बिछाया गया।
बीच सड़क पर ‘भयंकर ड्रामा’ और गिरफ्तारी
बेंगलुरु के K P Agrahara स्टेशन का इंस्पेक्टर #गोविंदराजू को एंटी करप्शन टीम ने रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा… तो वह लोगों की हमदर्दी पाने के लिए चिल्लाने लगा।@TheTimesofMP #BengaluruPolice #BribeScandal #Lokayukta #KarnatakaPolice #ViralVideo #PoliceCorruption pic.twitter.com/ObxnMH5UHY
— Times of MP Media Network (@TheTimesofMP) January 31, 2026
लोकायुक्त पुलिस ने योजना के तहत अकबर को केमिकल लगे नोटों के साथ भेजा। जैसे ही Bengaluru Police के इस इंस्पेक्टर गोविंदराजू ने ₹4 लाख की नकदी हाथ में ली, सादे कपड़ों में छिपी लोकायुक्त की टीम ने उसे चारों तरफ से घेर लिया। खुद को फंसता देख Bengaluru Police के इस इंस्पेक्टर ने कानून का सम्मान करने के बजाय बीच सड़क पर चीखना-चिल्लाना शुरू कर दिया।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में साफ दिख रहा है कि गोविंदराजू किस तरह अधिकारियों से हाथापाई कर रहा है और खुद को बेगुनाह बताने के लिए जोर-जोर से शोर मचा रहा है। यह किसी फिल्म के विलेन जैसा सीन था, जहाँ एक वर्दीधारी अधिकारी गिरफ्तारी से बचने के लिए भयंकर ड्रामा कर रहा था। लोकायुक्त के जवानों को उसे गाड़ी में बैठाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी।
कमिश्नर की कड़ी फटकार: वर्दी पर लगा दाग
इस घटना ने Bengaluru Police की छवि को काफी नुकसान पहुँचाया है। पुलिस कमिश्नर भास्कर राव ने इस मामले पर बेहद सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि इस तरह के कृत्य से पूरी फोर्स की बदनामी होती है। कमिश्नर ने स्पष्ट शब्दों में लिखा, “पुलिस की वर्दी में यह एक और शर्मनाक कृत्य है। कर्नाटक में एक लाख से ज्यादा पुलिसकर्मी दिन-रात मेहनत करते हैं, लेकिन ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों की वजह से उन्हें निराशा और शर्मिंदगी झेलनी पड़ती है।”
उन्होंने आगे कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जाएगी और गोविंदराजू के खिलाफ सख्त से सख्त विभागीय और कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
रक्षक ही जब बन जाए भक्षक
यह घटना इस बात का प्रमाण है कि सिस्टम के भीतर भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं। Bengaluru Police के इस इंस्पेक्टर ने जमानत जैसी कानूनी प्रक्रिया को उगाही का जरिया बना लिया था। लोकायुक्त की इस कार्रवाई ने जहाँ एक तरफ जनता में विश्वास जगाया है, वहीं दूसरी तरफ यह भ्रष्ट अधिकारियों के लिए एक चेतावनी भी है।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। जांच टीम अब यह भी खंगाल रही है कि क्या इस वसूली रैकेट में थाने के कुछ और लोग भी शामिल थे। भ्रष्टाचार की यह लड़ाई लंबी है, लेकिन जब तक ऐसे अधिकारियों का पर्दाफाश होता रहेगा, तब तक न्याय की उम्मीद बनी रहेगी।
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