मंदसौर में सनसनी: क्या दीवान में दम घुटने से मरा तस्कर Bhayyu Lala (भय्यू लाला)? परिजनों ने पुलिस पर मढ़ा हत्या का आरोप

मंदसौर। मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले का सुरजनी गांव बुधवार रात एक ऐसी घटना का गवाह बना, जिसने पूरे प्रदेश की कानून व्यवस्था और पुलिसिया कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। तीन राज्यों की पुलिस के लिए सिरदर्द बना कुख्यात ड्रग तस्कर और हिस्ट्रीशीटर वाहिद उर्फ Bhayyu Lala (भय्यू लाला) की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। एक तरफ पुलिस इसे गिरफ्तारी से बचने के लिए बेड में छिपने के दौरान हुआ हादसा बता रही है, तो दूसरी तरफ परिजनों का आक्रोश चीख-चीख कर इसे ‘कस्टोडियल मर्डर’ करार दे रहा है।
दबिश के दौरान खौफनाक मंजर
घटनाक्रम बुधवार देर रात का है जब सीतामऊ पुलिस को पुख्ता जानकारी मिली कि 5 हजार का इनामी Bhayyu Lala (भय्यू लाला) अपने घर आया हुआ है। पुलिस की एक विशेष टीम ने गांव की घेराबंदी की और Bhayyu Lala (भय्यू लाला) के मकान पर छापा मारा। पुलिस सूत्रों का दावा है कि पुलिस को देखते ही वह घबरा गया और बेडरूम में रखे एक बॉक्स वाले दीवान (बेड) के अंदर घुस गया। पुलिस ने पूरे घर की तलाशी ली, लेकिन वह नहीं मिला और टीम वापस लौट गई।
परिजनों की कहानी इससे बिल्कुल उलट है। उनका कहना है कि पुलिस घर में घुसी और सीधा बेडरूम की तरफ गई। काफी देर बाद जब परिजन वहां पहुंचे और दीवान खोला, तो Bhayyu Lala (भय्यू लाला) अचेत अवस्था में मिला। उसे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।
ताजा अपडेट: लदुना चौराहे पर चक्काजाम और धरना

बुधवार शाम को हुई घटना के बाद गुरुवार सुबह से ही सुरजनी गांव और आसपास के क्षेत्र में तनाव का माहौल है। मृतक Bhayyu Lala (भय्यू लाला) के परिजन और बड़ी संख्या में समाजजन सीतामऊ के लदुना चौराहे पर जमा हो गए और धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। परिजनों की साफ मांग है कि मृतक का पोस्टमार्टम स्थानीय स्तर पर न कराकर मंदसौर जिला चिकित्सालय में मेडिकल बोर्ड से कराया जाए। इसके अलावा, वे घटना की निष्पक्ष न्यायिक जांच की मांग कर रहे हैं। खबर लिखे जाने तक मौके पर कोई वरिष्ठ जिम्मेदार प्रशासनिक या पुलिस अधिकारी नहीं पहुंचा था, जिससे प्रदर्शनकारियों का आक्रोश और बढ़ गया। उनका कहना है कि जब तक निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई का ठोस आश्वासन नहीं मिलता, आंदोलन जारी रहेगा।
पुलिस पर गंभीर आरोप: गायब हुआ DVR?
इस मामले में सबसे बड़ा विवाद पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर खड़ा हुआ है। परिजनों का सीधा आरोप है कि Bhayyu Lala (भय्यू लाला) के साथ पुलिस ने घर के अंदर ही बेरहमी से मारपीट की। उसके कान और नाक से खून बह रहा था, जिसके वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। परिजनों का सवाल है कि अगर दम घुटने से मौत हुई, तो शरीर पर चोट के निशान और नाक-कान से खून कैसे आया?
हैरानी की बात यह है कि घर में सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे लगे थे, लेकिन परिजनों का दावा है कि पुलिस जाते समय सीसीटीवी का डीवीआर (DVR) अपने साथ उखाड़ ले गई। यह आरोप बेहद गंभीर है, क्योंकि यदि पुलिस ने कुछ गलत नहीं किया था, तो सबूत (फुटेज) को हटाने की जरूरत क्यों पड़ी? क्या पुलिस अपनी बर्बरता को छिपाना चाहती थी?
कौन था तस्कर Bhayyu Lala (भय्यू लाला)?
मृतक का आपराधिक रिकॉर्ड किसी डरावनी फिल्म की स्क्रिप्ट जैसा है। वह केवल मंदसौर ही नहीं, बल्कि राजस्थान और महाराष्ट्र पुलिस के लिए भी मोस्ट वांटेड था। उस पर एनडीपीएस (तस्करी), हत्या का प्रयास, डकैती और आर्म्स एक्ट जैसे करीब 19 गंभीर मामले दर्ज थे। हाल ही में मुंबई और जावरा में पकड़ी गई करोड़ों की एमडी (MD) ड्रग्स मामले में भी Bhayyu Lala (भय्यू लाला) मुख्य कड़ी बताया जा रहा था। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की कई टीमें उसे तलाश रही थीं।
क्या कहती है हकीकत?
इस मामले में दोनों ही पक्ष संदेह के घेरे में हैं। एक अपराधी का खुद को दीवान में बंद कर लेना और दम घुट जाना संभव है, लेकिन एक पेशेवर अपराधी जो सालों से पुलिस को चकमा दे रहा हो, क्या वह इतनी बड़ी गलती करेगा? दूसरी तरफ, परिजनों का आरोप और गायब हुआ डीवीआर पुलिस की नीयत पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
मंदसौर एसपी विनोद कुमार मीना ने सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी मिलने की बात कही है, जो खुद में थोड़ा अजीब लगता है कि इतनी बड़ी रेड के बाद पुलिस को घटना की खबर सोशल मीडिया से मिल रही है। फिलहाल, गांव में भारी पुलिस बल तैनात है और तनाव को देखते हुए प्रशासन अलर्ट मोड पर है।
पीएम रिपोर्ट पर टिकी सबकी निगाहें
गुरुवार को मेडिकल बोर्ड के माध्यम से Bhayyu Lala (भय्यू लाला) का पोस्टमार्टम किया जाएगा। इसकी वीडियोग्राफी भी की जा सकती है ताकि पारदर्शिता बनी रहे। बिसरा जांच और पीएम रिपोर्ट ही यह स्पष्ट करेगी कि मौत की असली वजह क्या थी। क्या यह वास्तव में दीवान में ऑक्सीजन की कमी थी या फिर पुलिस की लाठियों का प्रहार?
इस पूरी घटना ने मंदसौर पुलिस को एक ऐसी स्थिति में ला खड़ा किया है, जहां उसे अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए ठोस सबूत पेश करने होंगे। यदि डीवीआर गायब होने की बात सच साबित होती है, तो यह मानवाधिकारों के उल्लंघन का एक बड़ा मामला बन सकता है।

