सीतामऊ (Sitamau News) | मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले के सीतामऊ कस्बे में शुक्रवार और शनिवार की दरमियानी रात एक ऐसा खौफनाक मंजर देखने को मिला, जिसने पूरे इलाके की नींद उड़ा दी। रात के सन्नाटे में जब लोग अपने घरों में सो रहे थे, तभी एक विशालकाय मगरमच्छ अचानक रिहायशी इलाके की सड़कों पर रेंगता हुआ नजर आया।
इस घटना के बाद पूरे वार्ड में दहशत का माहौल बन गया। गनीमत यह रही कि समय रहते प्रशासन और वन विभाग की टीम सक्रिय हो गई और एक बेहद चुनौतीपूर्ण मगरमच्छ बचाव (Crocodile Rescue) ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया।
आधी रात को सड़क पर दिखा ‘मौत का साया’
जानकारी के मुताबिक, यह खौफनाक घटना सीतामऊ में मंदसौर रोड स्थित भेरू नामक व्यक्ति की दुकान के आस-पास की है। रात के अंधेरे में कुछ राहगीरों और स्थानीय युवाओं ने सड़क पर एक भारी-भरकम जीव को रेंगते हुए देखा तो उनके होश उड़ गए। वह कोई आम जानवर नहीं, बल्कि एक विशाल और खतरनाक मगरमच्छ था।
प्रशासन और पुलिस का त्वरित एक्शन
रिहायशी इलाके में मगरमच्छ के घुसने की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन तुरंत हरकत में आ गया। बिना एक पल की देरी किए नगर परिषद अध्यक्ष मनोज शुक्ला और सीतामऊ पुलिस की एक विशेष टीम मौके पर पहुँच गई। पुलिस ने सबसे पहले सुरक्षा घेरा बनाया और घबराए हुए लोगों को मगरमच्छ से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की सख्त हिदायत दी। भीड़ को नियंत्रित करना एक बड़ी चुनौती थी, क्योंकि किसी भी तरह के शोर-शराबे से मगरमच्छ के उग्र होने का खतरा बना हुआ था।
रात 2 बजे तक चला चुनौतीपूर्ण मगरमच्छ बचाव अभियान (Crocodile Rescue)
हालात की गंभीरता को भांपते हुए तुरंत वन विभाग के अधिकारियों को अलर्ट किया गया। सूचना मिलते ही वन विभाग की एक एक्सपर्ट रेस्क्यू टीम आवश्यक साजो-सामान, रस्सियों और पिंजरे के साथ घटनास्थल पर पहुँची। घनी आबादी वाला क्षेत्र होने और रात के घने अंधेरे के कारण यह मगरमच्छ बचाव (Crocodile Rescue) अभियान बेहद मुश्किल और जोखिम भरा था। जिससे टीम को उसे काबू में करने में भारी मशक्कत करनी पड़ी।
वन विभाग के कर्मचारियों ने अपनी जान पर खेलकर और बेहद सूझबूझ का परिचय देते हुए करीब रात 2 बजे इस मगरमच्छ को पूरी तरह से सुरक्षित रूप से रस्सियों में जकड़ लिया। जब मगरमच्छ पूरी तरह से काबू में आ गया, तब जाकर स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली।
कहाँ से आया यह विशालकाय मेहमान?
स्थानीय रहवासियों और प्रत्यक्षदर्शियों का अनुमान है कि यह मगरमच्छ सीतामऊ के मुख्य तालाब से निकलकर आबादी वाले क्षेत्र में पहुँचा था। दरअसल, पिछले कई दिनों से मुख्य तालाब के किनारे इस मगरमच्छ को धूप सेंकते हुए देखा जा रहा था। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि अक्सर रात के समय भोजन की तलाश में या जलस्तर में बदलाव होने पर ऐसे जलीय जीव अपना सुरक्षित स्थान छोड़कर शहरी क्षेत्रों का रुख कर लेते हैं। तालाब से सड़क मार्ग होते हुए इसका रिहायशी इलाके तक पहुँचना किसी बड़ी अनहोनी को न्योता दे सकता था।
गांधीसागर जलाशय में किया गया शिफ्ट
रेस्क्यू टीम द्वारा मगरमच्छ को सुरक्षित पकड़ने के बाद उसे एक बड़े लोडिंग वाहन में सावधानीपूर्वक शिफ्ट किया गया। इसके बाद वन विभाग की टीम उसे मंदसौर के प्रसिद्ध गांधीसागर जलाशय ले गई। वहाँ पहुँचकर इस विशालकाय मगरमच्छ को उसके प्राकृतिक और सुरक्षित आवास (पानी) में छोड़ दिया गया, ताकि वह शहर से दूर अपना जीवन यापन कर सके।
वन विभाग और प्रशासन की खास अपील
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ी राहत की बात यह रही कि किसी भी तरह की जनहानि या पशुओं को नुकसान पहुँचने की कोई खबर सामने नहीं आई है। सफल रेस्क्यू के बाद वन विभाग और स्थानीय पुलिस प्रशासन ने नागरिकों के लिए एक विशेष एडवायजरी जारी की है:
दूरी बनाए रखें: वन्यजीवों के आबादी में आने पर बिल्कुल न घबराएं और स्वयं उन्हें पकड़ने या भगाने का कोई भी जोखिम भरा प्रयास न करें।
तत्काल सूचना दें: किसी भी प्रकार के जंगली जानवर के दिखने पर तुरंत पुलिस कंट्रोल रूम या वन विभाग के टोल-फ्री नंबर पर कॉल करें।
रात में सतर्कता: रात के समय मुख्य तालाब के किनारों, सुनसान और अंधेरे रास्तों पर जाने से बचें। यदि जाना जरूरी हो, तो पर्याप्त रोशनी (टॉर्च) साथ रखें।
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