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Dalit Family पर जानलेवा हमला: नीमच में पुलिस की सुस्ती और दबंगों का कहर, न्याय की गुहार लेकर एसपी ऑफिस पहुंचे पीड़ित

Dalit Family

नीमच (Neemuch Crime News)। मध्य प्रदेश के नीमच जिले से एक झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जहाँ एक Dalit Family को इंसाफ पाने के लिए खुद के खून से सने कपड़ों में जिला पुलिस अधीक्षक (SP) के दरवाजे पर दस्तक देनी पड़ी। यह मामला जिले के ग्राम डासिया का है, जहाँ एक Dalit Family पर दबंगों ने न केवल जानलेवा हमला किया, बल्कि आरोप है कि स्थानीय पुलिस ने शिकायतों को नज़रअंदाज़ कर आरोपियों को बढ़ावा दिया।

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विवाद की जड़: खेत से शुरू हुआ रंजिश का सिलसिला

इस खौफनाक वारदात की शुरुआत 26 फरवरी 2024 को हुई थी। पीड़ित Dalit Family के सदस्य भैरूलाल मोगिया ने बताया कि विवाद की असली वजह खेत से चने उखाड़ने जैसी मामूली बात थी। उस दिन आरोपी मोहनसिंह और बाबुसिंह ने घर में घुसकर गाली-गलौज की और परिवार की बेटी नीतू के साथ मारपीट करते हुए जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया।

पीड़ितों का कहना है कि उन्होंने उसी समय अजाक (AJAK) और सिटी थाने में गुहार लगाई थी, लेकिन पुलिस ने Dalit Family की सुरक्षा सुनिश्चित करने के बजाय मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया। पुलिस की इसी लापरवाही ने आरोपियों के हौसले इतने बुलंद कर दिए कि उन्होंने 15 मार्च को पूरे परिवार को खत्म करने की साजिश रच डाली।

15 मार्च का खूनी मंजर: लाठियों और सरियों से हमला

रविवार, 15 मार्च को जब गाँव में शांति थी, तभी मोहनसिंह, बाबुसिंह और उनके अन्य साथियों ने हथियारों से लैस होकर Dalit Family पर हमला कर दिया। इस हमले में प्रेमचंद, उनकी पत्नी मोहन बाई और उनकी पुत्री नीतू को निशाना बनाया गया। आरोपियों ने लाठियों और डंडों से उन पर तब तक वार किए जब तक वे लहूलुहान होकर गिर नहीं गए।

ग्रामीणों ने बताया कि हमला इतना अचानक था कि परिवार को संभलने का मौका भी नहीं मिला। लहूलुहान हालत में तीनों घायलों को नीमच जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। Dalit Family पर हुए इस हमले के बाद पूरे गाँव में तनाव व्याप्त है और दलित समुदाय में पुलिस प्रशासन के प्रति भारी रोष देखा जा रहा है।

पुलिस अधीक्षक कार्यालय में न्याय की गुहार

स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली से असंतुष्ट होकर सोमवार को पीड़ित Dalit Family के सदस्य और उनके समर्थक पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुँचे। उन्होंने एसपी को एक शिकायती आवेदन सौंपकर आरोपियों के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट (SC/ST Act) के तहत कड़ी कार्रवाई की मांग की। पीड़ितों ने सीधे तौर पर अजाक थाना प्रभारी पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि यदि पहली शिकायत पर ही एफआईआर दर्ज हो जाती, तो आज यह Dalit Family अस्पताल के बिस्तर पर नहीं होती।

पीड़ित परिवार ने अब जिला प्रशासन से अपनी सुरक्षा की गारंटी मांगी है, क्योंकि उन्हें डर है कि अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद आरोपी उन पर दोबारा हमला कर सकते हैं।

प्रशासन का पक्ष: अब जागी सिटी थाना पुलिस

मामले के तूल पकड़ने और एसपी ऑफिस तक पहुँचने के बाद सिटी थाना पुलिस हरकत में आई है। सिटी थाना प्रभारी पुष्पा चौहान ने पुष्टि की है कि प्रेमचंद पिता दौलतराम बावरी की शिकायत पर आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने मोहन सिंह और उनके पुत्र अर्जित सिंह के खिलाफ मारपीट, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने की धाराओं में केस दर्ज किया है।

हालांकि, Dalit Family का कहना है कि पुलिस अभी भी केवल साधारण धाराओं में केस दर्ज कर खानापूर्ति कर रही है, जबकि यह स्पष्ट रूप से एक जानलेवा हमला और जातिगत हिंसा का मामला है।

व्यवस्था पर सवाल: क्या गरीब के लिए कानून अलग है?

नीमच की यह घटना Dalit Family की उस बेबसी को बयां करती है जहाँ आज भी जातिगत भेदभाव और दबंगई के आगे कानून लाचार नज़र आता है। एक Dalit Family को अपनी फरियाद सुनाने के लिए लहूलुहान हालत में सड़कों पर उतरना पड़े, यह प्रशासन के लिए शर्म की बात है। क्या पुलिस केवल रसूखदारों के दबाव में काम कर रही थी? इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की आवश्यकता है ताकि दोषियों के साथ-साथ लापरवाह अधिकारियों पर भी गाज गिरे।

फिलहाल, Dalit Family के घायल सदस्य अस्पताल में उपचाराधीन हैं और उनकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है। समाज के विभिन्न संगठनों ने इस घटना की निंदा की है और जल्द ही बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है।


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