नीमच | मध्य प्रदेश के नीमच जिले में स्थित दसिया गाँव (Dasia Village) इस समय सुलग रहा है। दो गुटों के बीच शुरू हुआ मामूली विवाद अब पुलिस प्रशासन की साख और न्याय प्रणाली पर सवालिया निशान खड़ा कर चुका है।
गुरुवार को करणी सेना परिवार के नेतृत्व में दसिया गाँव (Dasia Village) के सैकड़ों ग्रामीणों ने जिला मुख्यालय पहुंचकर पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय का घेराव किया। ग्रामीणों का आक्रोश इस बात को लेकर है कि पुलिस ने बिना किसी जमीनी जांच के निर्दोष लोगों पर गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज किए हैं।
विवाद की शुरुआत: चने की बालियां और अमानवीयता
घटना की शुरुआत 26 फरवरी को हुई थी, जिसे प्रशासन ने शुरुआत में हल्के में लिया। दसिया गाँव (Dasia Village) के निवासियों के अनुसार, गांव का एक युवक जसवंत सिंह, जो मानसिक रूप से अस्वस्थ बताया जा रहा है, अपने खेत से लौट रहा था।
भूख लगने पर उसने रास्ते में एक खेत से खाने के लिए चने की कुछ बालियां उखाड़ ली थीं। आरोप है कि इसी छोटी सी बात पर दूसरे पक्ष के कुछ लोगों ने उसे बेरहमी से पीटा। ग्रामीणों का तर्क है कि एक विक्षिप्त व्यक्ति के साथ ऐसा व्यवहार न केवल अपराध है बल्कि अमानवीय भी है।
पुलिस की एकतरफा कार्रवाई पर उठे सवाल
15 मार्च को इस विवाद ने तब हिंसक रूप ले लिया जब दोनों पक्ष पुनः आमने-सामने आ गए। ग्रामीणों ने एसपी को सौंपे ज्ञापन में आरोप लगाया है कि नीमच पुलिस ने इस मामले में निष्पक्षता को ताक पर रख दिया। दसिया गाँव (Dasia Village) के प्रदर्शनकारियों का दावा है कि पुलिस ने राजनीतिक दबाव या रसूख के चलते एक पक्ष की बात सुनी और दूसरे पक्ष (ग्रामीणों) पर एससी-एसटी (SC/ST) एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर दिया।
बेड रेस्ट पर मौजूद शख्स को बना दिया ‘दंगाई’?
इस पूरे प्रकरण में सबसे चौंकाने वाला तथ्य एक आरोपी की शारीरिक स्थिति को लेकर है। दसिया गाँव (Dasia Village) के ग्रामीणों ने साक्ष्य पेश करते हुए बताया कि पुलिस ने जिस व्यक्ति पर मारपीट और दंगा करने का आरोप लगाया है, वह वास्तव में गंभीर रूप से बीमार था और डॉक्टर की सलाह पर ‘बेड रेस्ट’ पर था।
सवाल यह उठता है कि जो व्यक्ति अपने बिस्तर से उठने में असमर्थ है, वह दंगे में शामिल कैसे हो सकता है? यह तथ्य पुलिस की विवेचना को संदिग्ध बनाता है।
ग्रामीणों और पुलिस के बीच दावों का टकराव
| विवरण | ग्रामीणों का दावा | पुलिस की प्रारंभिक कार्रवाई |
| घटना का कारण | चने उखाड़ने पर मानसिक विक्षिप्त युवक की पिटाई | आपसी रंजिश और मारपीट |
| आरोपियों की सूची | बीमार और अनुपस्थित लोगों के नाम शामिल | शिकायत के आधार पर नामजद FIR |
| कानून का उपयोग | SC/ST एक्ट का दुरुपयोग | कानून के दायरे में कार्रवाई का दावा |
| अवैध गतिविधियां | विपक्षी परिवार पर अवैध कार्यों का आरोप | जांच का विषय |
करणी सेना परिवार का अल्टीमेटम
प्रदर्शन के दौरान करणी सेना परिवार के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि दसिया गाँव (Dasia Village) में कानून का शासन होना चाहिए, न कि किसी विशेष वर्ग का आतंक। उन्होंने चेतावनी दी है
कि यदि पुलिस ने सात दिनों के भीतर निष्पक्ष जांच कर निर्दोषों के नाम एफआईआर से नहीं हटाए, तो पूरे जिले में उग्र आंदोलन छेड़ा जाएगा। ग्रामीणों ने मांग की है कि घटना स्थल के मोबाइल लोकेशन और सीसीटीवी फुटेज खंगाले जाएं ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया और आगे की राह
एसपी कार्यालय के अधिकारियों ने ज्ञापन लेते हुए आश्वासन दिया है कि मामले की सूक्ष्मता से जांच की जाएगी। हालांकि, दसिया गाँव (Dasia Village) में तनाव अभी भी बरकरार है। ग्रामीण अब मुख्यमंत्री और गृह मंत्री तक अपनी बात पहुँचाने की तैयारी कर रहे हैं।
यह मामला अब केवल दो परिवारों का नहीं, बल्कि दसिया गाँव (Dasia Village) की एकता और पुलिस की कार्यशैली के बीच की जंग बन चुका है।
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