नीमच में ‘बुलडोजर’ का दोहरा चरित्र: गरीबों और मैदानों पर ‘सिंघम’ बना प्रशासन, Gayatri Mandir Road के रसूखदारों के आगे क्यों हुआ ढेर?

Gayatri Mandir Road
नीमच (Gayatri Mandir Road)। नीमच शहर में मंगलवार का दिन प्रशासनिक सक्रियता के नाम रहा। जिला प्रशासन ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए अंबेडकर कॉलोनी और एकता कॉलोनी में करोड़ों रुपये की सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया। प्रशासन की इस ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति की जहां एक तरफ प्रशंसा हो रही है, वहीं दूसरी तरफ शहर का प्रबुद्ध वर्ग और आम जनता एक कड़वा सवाल भी पूछ रही है—“प्रशासन का यह ‘पीला पंजा’ सिर्फ खाली मैदानों और कमजोरों पर ही क्यों चलता है? Gayatri Mandir Road के उन आलीशान अतिक्रमणकारियों पर हाथ डालने में अधिकारियों के पसीने क्यों छूट रहे हैं?”
आज की कार्रवाई: एक तरफा वाहवाही या अधूरा सच?
मंगलवार को एसडीएम संजीव साहू और नगरपालिका सीएमओ दुर्गा बामनिया के नेतृत्व में अंबेडकर कॉलोनी के ‘खेत नंबर 5’ से करीब 4.80 करोड़ रुपये की 5 हजार वर्ग मीटर जमीन मुक्त कराई गई। इसके तुरंत बाद एकता कॉलोनी में भी पक्के मकान और खड़ी फसल को रौंदकर प्रशासन ने अपनी ताकत का प्रदर्शन किया। जनता देख रही है कि प्रशासन के पास संसाधन भी हैं और शक्ति भी, लेकिन जब बात Gayatri Mandir Road की आती है, तो यही शक्ति ‘बेबसी’ में बदल जाती है।
Gayatri Mandir Road: जहाँ कानून रसूखदारों की चौखट पर दम तोड़ देता है

शहर के मुख्य मार्ग Gayatri Mandir Road पर सालों से रसूखदार दुकानदारों ने पक्का अतिक्रमण कर रखा है। यहाँ दुकानदारों ने न केवल नालियों को ढका है, बल्कि फुटपाथ को निगलते हुए सड़क के बीचों-बीच तक अपनी दुकानें फैला ली हैं। आज जब प्रशासन ने एकता कॉलोनी में पक्का मकान ढहाया, तो गायत्री मंदिर रोड के राहगीरों के मन में एक ही सवाल था—क्या प्रशासन कभी इस रोड पर भी इसी ‘तेवर’ के साथ उतरेगा?
हकीकत यह है कि Gayatri Mandir Road पर जब भी कार्रवाई की बात आती है, तो तथाकथित सफेदपोश नेताओं और रसूखदार पार्षदों के फोन घनघनाने लगते हैं। पिछले महीने जब टीम कार्रवाई के लिए पहुँची थी, तो इन्हीं ‘ऊपर वाले’ संपर्कों के कारण टीम को उल्टे पांव लौटना पड़ा था।
15 दिन का वादा और महीने भर का धोखा
Gayatri Mandir Road के अतिक्रमणकारियों ने प्रशासन को लिखित और मौखिक आश्वासन दिया था कि वे 10-15 दिनों में खुद कब्जा हटा लेंगे। आज एक महीने से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन स्थिति सुधरने के बजाय और विकराल हो गई है। अतिक्रमणकारियों को अब यह समझ आ गया है कि यदि उनके सिर पर राजनीतिक हाथ है, तो वे शहर की छाती पर मूंग दल सकते हैं। प्रशासन की चुप्पी ने इन कब्जाधारियों के हौसले इतने बुलंद कर दिए हैं कि अब यहाँ से पैदल गुजरना भी मौत को दावत देने जैसा है।
क्या नगरपालिका का बुलडोजर सिर्फ ‘सॉफ्ट टारगेट’ ढूंढता है?
आज की कार्रवाई ने एक बात साफ कर दी है कि प्रशासन के पास इच्छाशक्ति की कमी नहीं है, बल्कि नीयत में खोट है। अंबेडकर कॉलोनी और एकता कॉलोनी में कार्रवाई करना आसान था क्योंकि वहां ‘आम आदमी’ और ‘मैदानी कब्जा’ था। लेकिन Gayatri Mandir Road पर बैठे व्यापारी प्रशासन के लिए ‘हॉट पोटैटो’ (गर्म आलू) बने हुए हैं।
जनता पूछ रही है—
आखिर कब तक नगरपालिका और जिम्मेदार अधिकारी सिर्फ कमजोर वर्ग के खिलाफ अपनी ताकत का प्रदर्शन करते रहेंगे? क्या Gayatri Mandir Road का अतिक्रमण इसलिए वैध है क्योंकि वहां बड़े वोट बैंक और बड़े चंदे का प्रभाव है? यदि प्रशासन वास्तव में शहर को अतिक्रमण मुक्त करना चाहता है, तो उसे ‘पिक एंड चूज’ (चुनिंदा कार्रवाई) की नीति त्यागनी होगी।
बढ़ता आक्रोश: कभी भी फूट सकता है जनता का गुस्सा
Gayatri Mandir Road पर रोजाना होने वाले ट्रैफिक जाम और दुकानदारों की गुंडागर्दी से आम नागरिक त्रस्त हैं। सड़क संकरी होने के कारण यहाँ विवाद अब आम बात हो गई है। एक तरफ प्रशासन 4.80 करोड़ की जमीन मुक्त कराकर अपनी पीठ थपथपा रहा है, वहीं दूसरी तरफ Gayatri Mandir Road की अव्यवस्था प्रशासन के दावों का मजाक उड़ा रही है।
अगर सीएमओ दुर्गा बामनिया के दावों में दम है कि उन्होंने ‘5-6 अन्य स्थान’ चिन्हित किए हैं, तो क्या उन स्थानों की सूची में Gayatri Mandir Road का नाम सबसे ऊपर है? या फिर इस सड़क को हमेशा की तरह ‘राजनीतिक संरक्षण’ के नाम पर छोड़ दिया जाएगा? नीमच की जनता अब केवल ‘बयानबाजी’ नहीं, बल्कि गायत्री मंदिर रोड पर भी वही ‘बुलडोजर एक्शन’ देखना चाहती है जो आज अंबेडकर कॉलोनी में देखा गया।
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