नीमच जनसुनवाई में दिखी इंसानियत: 1 बेबस माँ को बेटी के इलाज के लिए कलेक्टर ने तुरंत दिए ₹1 लाख

Jansunwai

नीमच (रिपोर्टर डेस्क): मध्य प्रदेश के नीमच जिले में सुशासन और प्रशासनिक संवेदनशीलता की एक बेहद ही मार्मिक और सुखद तस्वीर सामने आई है। आमतौर पर सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटते आम लोगों की शिकायतें सुनने को मिलती हैं, लेकिन मंगलवार को आयोजित नीमच जनसुनवाई (Jansunwai) में जो हुआ, उसने यह साबित कर दिया कि जब एक अधिकारी के भीतर इंसानियत और जिम्मेदारी का भाव हो, तो किसी भी जरूरतमंद की पुकार खाली नहीं जाती।
नीमच के कलेक्टर श्री हिमांशु चंद्रा ने एक बेसहारा विधवा माँ की गुहार पर त्वरित फैसला लेते हुए उसकी बीमार बेटी के इलाज के लिए एक लाख रुपये की भारी-भरकम आर्थिक सहायता मंजूर की है।

Shubham Solar Solution

विधवा माँ का संघर्ष और आर्थिक तंगी की मार

यह पूरी कहानी मनासा क्षेत्र के अयोध्या बस्ती की रहने वाली ममता की है। ममता के पति शंकरलाल का पहले ही देहांत हो चुका है, जिसके बाद से परिवार के भरण-पोषण की पूरी जिम्मेदारी इस अकेली महिला के कंधों पर आ गई थी। जिंदगी पहले ही मुश्किलों के दौर से गुजर रही थी कि इसी बीच ममता की बेटी निशा गंभीर रूप से बीमार पड़ गई।

डॉक्टरों ने निशा के इलाज के लिए एक बड़ी रकम खर्च होने की बात कही। पति के साये से महरूम और गरीबी की मार झेल रही ममता के लिए यह किसी पहाड़ टूटने से कम नहीं था। उसने अपनी बेटी को बचाने के लिए हर संभव कोशिश की, रिश्तेदारों और जान-पहचान वालों से मदद मांगी, लेकिन इतने बड़े खर्च का इंतजाम करना उसके बस की बात नहीं थी। जब सारे दरवाजे बंद नजर आने लगे, तब ममता को प्रशासन की नीमच जनसुनवाई (Jansunwai) से एक आखिरी उम्मीद की किरण दिखाई दी।

आंसुओं के साथ बयां किया अपना दर्द

20 फरवरी 2026 को नीमच कलेक्ट्रेट में आम जनता की समस्याओं के निराकरण के लिए नीमच जनसुनवाई (Jansunwai) का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में दूर-दराज से लोग अपनी फरियाद लेकर पहुंचे थे। उन्हीं कतारों में एक बेबस माँ ममता भी अपनी बीमार बेटी की रिपोर्ट और एक आवेदन पत्र लेकर खड़ी थी।

जब ममता की बारी आई और वह कलेक्टर श्री हिमांशु चंद्रा के सामने पहुंची, तो अपनी बेटी की तकलीफ और अपनी बेबसी बताते हुए फूट-फूट कर रो पड़ी। उसने कलेक्टर को बताया कि यदि जल्द ही उसकी बेटी निशा को सही इलाज नहीं मिला, तो कुछ भी अनर्थ हो सकता है। ममता ने हाथ जोड़कर अपनी आर्थिक लाचारी का हवाला देते हुए शासन से मदद की भीख मांगी।

कलेक्टर का त्वरित और मानवीय फैसला

एक कुशल और संवेदनशील प्रशासक का परिचय देते हुए कलेक्टर हिमांशु चंद्रा ने सबसे पहले उस रोती हुई माँ को ढांढस बंधाया। उन्होंने पूरी तसल्ली से ममता का आवेदन पढ़ा और निशा की मेडिकल रिपोर्ट्स देखीं। मामले की गंभीरता और परिवार की दयनीय स्थिति को भांपते हुए कलेक्टर ने बिना एक भी दिन की देरी किए, वहीं नीमच जनसुनवाई (Jansunwai) में ही ऑन-द-स्पॉट एक ऐतिहासिक फैसला लिया।

उन्होंने भारतीय रेडक्रॉस सोसाइटी (नीमच) के फंड से बेटी निशा के इलाज के लिए तत्काल एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत कर दी। कलेक्टर के इस एक फैसले ने ममता की बुझती हुई उम्मीदों में मानो फिर से जान फूंक दी हो।

सीधे खाते में पहुंचा पैसा, नहीं करनी पड़ी भागदौड़

अक्सर ऐसा होता है कि सरकारी मदद मंजूर तो हो जाती है, लेकिन उसका पैसा खाते तक पहुंचने में हफ्तों या महीनों लग जाते हैं। लेकिन इस नीमच जनसुनवाई (Jansunwai) की सबसे खास बात यह रही कि सहायता राशि सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रही।

नीमच के डिप्टी कलेक्टर श्री पराग जैन ने इस पूरी प्रक्रिया पर जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि प्रशासन का मुख्य उद्देश्य सिर्फ स्वीकृति देना नहीं, बल्कि समय पर बच्ची का इलाज शुरू करवाना था। उन्होंने बताया कि रेडक्रॉस द्वारा स्वीकृत की गई एक लाख रुपये की यह पूरी रकम बिना किसी विलंब के ममता के बैंक खाते में आर.टी.जी.एस. (RTGS) के माध्यम से ट्रांसफर कर दी गई है। अब ममता को किसी भी दफ्तर के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और वह सारा ध्यान अपनी बेटी के इलाज पर लगा सकेगी।

प्रशासनिक संवेदनशीलता की हो रही है चारों ओर तारीफ

नीमच जिले में हुई इस नीमच जनसुनवाई (Jansunwai) की चर्चा अब पूरे प्रदेश में हो रही है। यह घटना सिर्फ एक आर्थिक मदद की कहानी नहीं है, बल्कि यह दिखाती है कि सरकार की व्यवस्थाएं और रेडक्रॉस जैसी संस्थाएं असल में कैसे जीवन रक्षक बन सकती हैं।

कलेक्टर हिमांशु चंद्रा की इस शानदार पहल से न केवल अयोध्या बस्ती बल्कि पूरे नीमच जिले के लोगों में प्रशासन के प्रति एक गहरा विश्वास पैदा हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि हर जिले में ऐसे ही तत्परता से काम हो, तो कोई भी गरीब इलाज के अभाव में दम नहीं तोड़ेगा। फिलहाल, सभी लोग निशा के जल्द से जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं, ताकि वह अपनी माँ के साथ एक सामान्य और खुशहाल जीवन जी सके।


यह भी पढ़ें: 38 दिनों का सुनहरा अवसर: नीमच में निशुल्क टैली प्रशिक्षण शुरू, रहना और खाना बिल्कुल मुफ्त

हो सकता है आप चूक गए हों