झांसी (विशेष संवाददाता): उत्तर प्रदेश के झांसी स्थित महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज (Jhansi Medical College) एक बार फिर सुर्खियों में है। अभी आगजनी की घटना की टीस कम भी नहीं हुई थी कि अब प्रसूता वार्ड में Baby Swap (बच्चा बदलने) का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। एक पिता ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाया है कि स्टाफ ने उसे ‘चाय’ लाने के बहाने वार्ड से दूर भेजा और इसी दौरान उसके नवजात बेटे को बदलकर बेटी थमा दी गई।
ताज़ा अपडेट (Latest Update): DNA सैंपल जांच के लिए भेजे गए
Baby Swap के आरोपों की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने तुरंत जांच के आदेश दिए हैं। सीएमएस डॉ. सचिन माहुर के अनुसार, मां रीता और नवजात बच्ची का DNA सैंपल ले लिया गया है और उसे फॉरेंसिक लैब भेज दिया गया है। जब तक रिपोर्ट नहीं आती, बच्चा अस्पताल की देखरेख (NICU) में है। पुलिस का कहना है कि रिपोर्ट के आधार पर ही अगली कार्रवाई होगी।
बाथरूम डिलीवरी और ‘चाय’ वाली साजिश
मोठ के आजाद नगर निवासी रोहित रायकवार का आरोप है कि यह पूरा मामला एक सोची-समझी Baby Swap की साजिश है। रोहित ने बताया,
“मेरी पत्नी रीता 6 दिसंबर की रात वॉशरूम गई थी, जहाँ उसकी डिलीवरी हो गई। बच्चा टॉयलेट सीट में फंस गया था, जिसे नर्सों ने निकाला।
उस वक्त नर्स ने साफ कहा था- ‘बधाई हो, लड़का हुआ है।”
रीता के पति रोहित रायकवार का आरोप है कि पत्नी को बेटा हुआ है, पर उन्हें बेटी दे दी गई है।
विवाद तब गहराया जब स्टाफ ने रोहित को वार्ड से हटाने के लिए बहाना बनाया। रोहित का कहना है, “नर्स बच्चे को लेकर अंदर गई और स्टाफ ने मुझे जबरदस्ती चाय लेने बाहर भेज दिया। मुझे तब शक नहीं हुआ, लेकिन यह Baby Swap का खेल था। जब मैं चाय लेकर लौटा, तो उन्होंने मेरी गोद में एक लड़की डाल दी।”
रोहित ने जब विरोध किया और अपने बेटे की मांग की, तो स्टाफ का रवैया बदल गया। पीड़ित पिता का आरोप है कि उसे धमकाया गया- “लड़की ही हुई है, चुपचाप ले लो वरना पुलिस बुलाकर जेल भिजवा देंगे।” रोहित का दावा है कि Baby Swap करके उनका बेटा किसी और को दे दिया गया है। उन्होंने तुरंत थाने और एसडीएम से इसकी शिकायत की, जिसके बाद अस्पताल में हड़कंप मच गया।
अस्पताल प्रशासन की सफाई: ‘6 डिलीवरी, सभी लड़कियां’
मेडिकल कॉलेज के सीएमएस डॉ. सचिन माहुर ने Baby Swap के सभी आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कहा:
“उस रात (6-7 दिसंबर) लेबर रूम में कुल 6 डिलीवरी हुई हैं और संयोग से सभी को बेटियां ही पैदा हुई हैं।
कोई लड़का पैदा ही नहीं हुआ, तो Baby Swap का सवाल ही नहीं उठता। परिवार भ्रम का शिकार है।”
सीएमएस डॉ. सचिन माहुर का कहना है कि रीता को बेटी पैदा हुई है। उसके घरवाले झूठ बोल रहे।
बाथरूम में डिलीवरी के आरोप पर उन्होंने कहा कि डिलीवरी लेबर रूम में डॉक्टरों की निगरानी में हुई है और बच्चा प्री-मैच्योर होने के कारण एनआईसीयू में है।
अंधविश्वास या हकीकत?
इस Baby Swap केस में अंधविश्वास का पेंच भी फंसा है। रोहित और रीता के पहले से तीन बच्चे हैं। रोहित ने स्वीकार किया कि किसी ‘महाराज’ ने उन्हें आशीर्वाद दिया था कि इस बार ‘बेटा’ ही होगा। डॉक्टरों का मानना है कि इसी अंधविश्वास और शायद किसी गलत अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट के कारण परिवार बेटी को स्वीकार नहीं कर पा रहा है और इसे Baby Swap का नाम दे रहा है।
फिलहाल, सबकी नजरें डीएनए रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि यह वाक़ई Baby Swap का अपराध है या महज एक गलतफहमी।