1st Khatu Shyam AI Movie: एक्टर नहीं, तकनीक बनेगी आधार; कन्हैया मित्तल ने साझा किया भक्ति और एआई का अनोखा सफर

Khatu Shyam AI Movie
खाटू: भक्ति और तकनीक के संगम से अक्सर नए प्रयोग जन्म लेते हैं, लेकिन इस बार आस्था को एक ऐसा डिजिटल स्वरूप मिलने जा रहा है जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। प्रसिद्ध भजन गायक कन्हैया मित्तल भगवान खाटू श्याम के जीवन और उनकी महिमा पर आधारित भारत की पहली एआई ड्रिवन फिल्म (Khatu Shyam AI Movie) लेकर आ रहे हैं। एक निजी समाचार पत्र (दैनिक भास्कर) को दिए गए इंटरव्यू में मित्तल ने इस प्रोजेक्ट से जुड़ी चुनौतियों और अपने आध्यात्मिक संघर्ष को विस्तार से साझा किया है।
भगवान की जगह किसी इंसान को नहीं देख सकते: मित्तल
अक्सर पौराणिक फिल्मों या सीरियल्स में कलाकारों को भगवान के रूप में कास्ट किया जाता है। लेकिन कन्हैया मित्तल का नजरिया यहाँ बिल्कुल स्पष्ट और सीधा है। उन्होंने बताया कि इस Khatu Shyam AI Movie को बनाने के पीछे सबसे बड़ा कारण यह था कि वे नहीं चाहते कि कोई आम इंसान (एक्टर) भगवान का किरदार निभाए और लोग बाद में उसी की पूजा करने लगें। मित्तल के अनुसार, किसी अभिनेता को भगवान का दर्जा देना उनके सिद्धांतों के खिलाफ है। इसीलिए उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का जोखिम भरा रास्ता चुना ताकि भगवान के स्वरूप को मानवीय चेहरे से अलग रखा जा सके।
बॉलीवुड में रणबीर कपूर जैसे बड़े सितारों को पौराणिक पात्रों के रूप में कास्ट किए जाने पर मित्तल ने बड़ी बेबाकी से कहा कि यह हर किसी का अपना क्रिएशन और अपनी श्रद्धा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कोई भगवान को लड्डू का भोग लगाता है तो कोई कचौड़ी का, वैसे ही यह फिल्म निर्माताओं की अपनी पसंद है, जिस पर वे टिप्पणी नहीं करना चाहते।
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क्या भक्ति और एआई का मेल संभव है?
आमतौर पर तकनीक और अध्यात्म को दो अलग ध्रुव माना जाता है, लेकिन मित्तल इसे एक पूरक के रूप में देखते हैं। इंटरव्यू के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि Khatu Shyam AI Movie के माध्यम से वे समाज को एआई का सकारात्मक उपयोग दिखाना चाहते हैं। वर्तमान में जहाँ डीपफेक और सोशल मीडिया ट्रोलिंग के लिए तकनीक का दुरुपयोग हो रहा है, वहीं यह फिल्म एक मिसाल पेश करेगी कि कैसे एआई का उपयोग इतिहास और सनातन संस्कृति को अगली पीढ़ी तक पहुँचाने के लिए किया जा सकता है।
फिल्म निर्माण का संघर्ष: डायलॉग से लेकर रियल लुक तक
इस Khatu Shyam AI Movie को बनाना कन्हैया मित्तल के लिए कोई आसान रास्ता नहीं था। उन्होंने बताया कि शुरुआती दौर में डायलॉग्स को किरदारों के साथ मैच करने में काफी दिक्कतें आईं। तकनीक के जरिए किसी इमोशन को स्क्रीन पर उतारने में लंबा समय लगा। लेकिन ‘बाबा’ की कृपा ऐसी रही कि जहाँ वे केवल एक गाने की उम्मीद कर रहे थे, वहाँ पूरी की पूरी Khatu Shyam AI Movie बनकर तैयार हो गई। मित्तल का दावा है कि फिल्म देखने के बाद 90 प्रतिशत लोगों को यकीन नहीं हुआ कि यह एआई द्वारा बनाई गई है; यह पूरी तरह से एक रियल शूट जैसा अनुभव देती है।
2016 का वो मोड़ जब छोड़ दिया था संगीत
आज लाखों दिलों पर राज करने वाले कन्हैया मित्तल का सफर हमेशा से इतना सुनहरा नहीं था। उन्होंने खुलासा किया कि 2016 में एक समय ऐसा आया था जब उन्होंने भजन गाना छोड़ दिया था और घर वालों के दबाव में बिजनेस करने लगे थे। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। 2017 में बाबा के आशीर्वाद से उन्होंने दोबारा वापसी की और उस साल 200 से ज्यादा कार्यक्रम किए। मित्तल कहते हैं, “चमत्कार केवल पैसा कमाना नहीं है, बल्कि चमत्कार वह है जब काम आपकी शर्तों पर होने लगे।”
भविष्य की योजनाएं: राजनीति नहीं, सिर्फ कला
राजनीति में सक्रियता के सवाल पर कन्हैया मित्तल ने स्पष्ट कर दिया कि वे अब इससे परे हैं। उनका लक्ष्य अब केवल संगीत और कला के माध्यम से सनातन धर्म की सेवा करना है। वे आने वाले समय में Khatu Shyam AI Movie जैसे और भी कई प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं, जो समाज के हर वर्ग (36 बिरादरियों) को जोड़कर उनके गौरवशाली इतिहास को बच्चों तक पहुँचाएंगे।
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