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1 शानदार अचीवमेंट: KV 2 Neemuch के छात्र देवांश का 5वीं में कमाल, पढ़ाई और खेल का बनाया बेहतरीन संतुलन

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नीमच: आज के समय में जब स्कूली बच्चों का अधिकांश समय स्मार्टफोन की स्क्रीन पर स्क्रॉल करने में बीत रहा है, तब कुछ छात्र अपनी एकाग्रता और टाइम मैनेजमेंट से एक अलग ही लकीर खींच रहे हैं। नीमच स्थित केन्द्रीय विद्यालय क्रमांक 2 (KV 2 Neemuch) के ऐसे ही एक होनहार छात्र हैं देवांश शर्मा। हाल ही में घोषित कक्षा 5वीं के वार्षिक परीक्षा परिणामों में देवांश ने 84 प्रतिशत अंक हासिल कर न केवल अपने परिवार का, बल्कि पूरे विद्यालय का नाम रोशन किया है।

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सफलता का आधार: निरंतरता और कड़ा अनुशासन

किसी भी परीक्षा में एक बार अच्छे अंक लाना संयोग हो सकता है, लेकिन हर साल अपने प्रदर्शन को बेहतर बनाए रखना एक प्रक्रिया का हिस्सा होता है। विद्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, देवांश की यह सफलता कोई रातो-रात किया गया चमत्कार नहीं है। वह अपनी पढ़ाई को लेकर बेहद अनुशासित दिनचर्या का पालन करते हैं।

कक्षा 5वीं जैसे महत्वपूर्ण आधारभूत वर्ष में 84% अंक अर्जित करना यह दर्शाता है कि छात्र के बुनियादी कॉन्सेप्ट स्पष्ट हैं। उन्होंने सभी प्रमुख विषयों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। KV 2 Neemuch के शिक्षकों का भी मानना है कि देवांश की यह निरंतरता कक्षा के अन्य बच्चों को भी सकारात्मक रूप से प्रेरित करती है।

सिर्फ किताबी कीड़ा नहीं, मैदान के भी ‘चैंपियन’

आमतौर पर देखा जाता है कि जो बच्चे पढ़ाई में अव्वल होते हैं, वे खेल के मैदान से दूरी बना लेते हैं। लेकिन देवांश का प्रोफाइल इससे बिल्कुल अलग है। वह एक सच्चे ‘ऑलराउंडर’ की परिभाषा को सार्थक कर रहे हैं।

KV 2 Neemuch के खेल प्रशिक्षकों और शिक्षकों के अनुसार, देवांश केवल शैक्षणिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रहते। वह विद्यालय (KV 2 Neemuch) में होने वाली खेलकूद और अन्य पाठ्येतर (Extracurricular) गतिविधियों में भी निरंतर और सक्रिय रूप से भाग लेते हैं। मैदान पर उनका प्रदर्शन उतना ही शानदार होता है, जितना कक्षा के भीतर। शारीरिक और मानसिक विकास का यह समन्वय ही उन्हें एक मेधावी छात्र की श्रेणी में खड़ा करता है।

डिजिटल युग में बेहतरीन टाइम मैनेजमेंट की मिसाल

वर्तमान शिक्षा प्रणाली में अक्सर यह माना जाता है कि इंटरनेट और स्मार्टफोन बच्चों की पढ़ाई के सबसे बड़े दुश्मन हैं। लेकिन देवांश ने इस धारणा को गलत साबित किया है। आज के समय में जब अधिकांश बच्चे मोबाइल स्क्रीन पर सिर्फ समय बर्बाद कर रहे हैं, देवांश ने डिजिटल माध्यमों का रचनात्मक उपयोग करना सीखा है।

पढ़ाई और खेलों में अव्वल रहने के साथ-साथ देवांश यूट्यूब पर व्लॉगिंग (Vlogging) भी करते हैं और डिजिटल स्पेस में काफी सक्रिय हैं। उनका यह प्रोफाइल साबित करता है कि समस्या स्मार्टफोन या इंटरनेट में नहीं, बल्कि उनके इस्तेमाल के तरीके में है। देवांश का टाइम मैनेजमेंट इतना सटीक है कि वे अपने व्लॉगिंग के शौक को पूरा करते हुए भी अपनी पढ़ाई और खेलकूद के लिए पूरा समय निकालते हैं। स्क्रीन टाइम को प्रोडक्टिविटी में कैसे बदला जाए, देवांश इसका एक जीता-जागता उदाहरण हैं।

KV 2 Neemuch के शिक्षकों का सटीक मार्गदर्शन

किसी भी छात्र की प्रतिभा को निखारने में विद्यालय की भूमिका अहम होती है। देवांश के मामले में यह भूमिका केन्द्रीय विद्यालय (KV 2 Neemuch) के अनुभवी शिक्षकों ने निभाई है। विद्यालय (KV 2 Neemuch) के प्रबंधन ने देवांश की इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त किया है।

KV 2 Neemuch के शिक्षकों ने स्पष्ट किया कि:

  • देवांश कक्षा में हमेशा एक सक्रिय श्रोता (Active Listener) रहते हैं।

  • विषय से जुड़े प्रश्न पूछने में वह कभी संकोच नहीं करते।

  • शिक्षकों द्वारा दिए गए मार्गदर्शन और फीडबैक को वह अपनी दैनिक पढ़ाई में तुरंत लागू करते हैं।

देवांश की सफलता से मिलने वाली 3 प्रमुख सीखें:

  1. संतुलन है जरूरी: पढ़ाई के साथ-साथ खेलों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। इससे मानसिक तनाव कम होता है और शारीरिक विकास होता है।

  2. निरंतरता का महत्व: परीक्षा से ठीक पहले रटने के बजाय, साल भर नियमित रूप से थोड़ा-थोड़ा पढ़ना ज्यादा प्रभावी होता है।

  3. रचनात्मकता और टाइम मैनेजमेंट: इंटरनेट और गैजेट्स से पूरी तरह कटने के बजाय, उनका उपयोग अपने शौक (जैसे व्लॉगिंग) को निखारने के लिए करें। स्मार्ट टाइम मैनेजमेंट के जरिए डिजिटल लाइफ और स्कूल लाइफ दोनों में शानदार प्रदर्शन किया जा सकता है।

सीधे शब्दों में कहा जाए, तो देवांश शर्मा का यह प्रदर्शन बताता है कि सही दिशा, पारिवारिक सपोर्ट और खुद के अनुशासन से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। नीमच के इस युवा टैलेंट से भविष्य में भी ऐसे ही शानदार प्रदर्शन की उम्मीद है।


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