मनासा विद्युत कर्मी मौत: लापरवाही का करंट, 15 लाख मुआवजा और नौकरी पर समझौता

मनासा विद्युत कर्मी मौत

मनासा विद्युत कर्मी मौत

मनासा (दिलीप बोराना): मध्य प्रदेश के मनासा क्षेत्र में विद्युत विभाग की कथित घोर लापरवाही के चलते एक बड़ा हादसा हो गया, जिसमें एक हंसता-खेलता परिवार उजड़ गया। यह पूरा मामला मनासा विद्युत कर्मी मौत से जुड़ा है। आंतरी माता गांव में 18 नवंबर को ग्रिड ऑपरेटर की चूक से हाई-टेंशन लाइन की चपेट में आए 43 वर्षीय विद्युत कर्मी बंशीदास बैरागी की उपचार के दौरान दर्दनाक मौत हो गई।

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उनकी मृत्यु के बाद आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों ने शव को विद्युत वितरण केंद्र महागढ़ पर रखकर करीब तीन घंटे तक धरना-प्रदर्शन किया। प्रशासनिक अधिकारियों की समझाइश और मुआवजे के ठोस आश्वासन के बाद ही यह गंभीर मामला शांत हुआ।

जिंदगी की जंग हार गए बंशीदास

गोपालपुरा निवासी बंशीदास पिता रामदास बैरागी (43) पिछले कई दिनों से मौत से संघर्ष कर रहे थे। विद्युत कर्मी मौत के इस दुखद मामले की शुरुआत 18 नवंबर को हुए हादसे से हुई थी, जब उनका शरीर बुरी तरह झुलस गया था।

उन्हें प्राथमिक उपचार के लिए पहले मनासा शासकीय अस्पताल ले जाया गया, फिर हालत गंभीर होने पर नीमच जिला अस्पताल रेफर किया गया। स्थिति में सुधार न होने पर उन्हें अहमदाबाद रेफर किया गया था। तमाम चिकित्सकीय प्रयासों के बावजूद, अहमदाबाद में इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया, जिससे पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।

फ्लैशबैक: 18 नवंबर की वह काली शाम

यह पूरा घटनाक्रम 18 नवंबर, मंगलवार देर शाम का है। बंशीदास अपने पिता रामदास और अन्य साथी कर्मचारियों के साथ आंतरी माता गांव में घरेलू लाइन की केबल खींचने और मीटर लगाने का काम कर रहे थे। इसी दौरान यह हादसा हुआ जो अंततः मनासा विद्युत कर्मी मौत का कारण बना।

सबसे बड़ा सवाल: परमिट था, तो लाइन चालू कैसे हुई?

इस दर्दनाक हादसे में सबसे बड़ी और अक्षम्य लापरवाही ग्रिड ऑपरेटर की सामने आई है। मृतक के पिता और प्रत्यक्षदर्शी रामदास बैरागी ने बताया कि कार्य शुरू करने से पहले विभाग द्वारा नियमानुसार आंतरी माता ग्रिड से ‘शटडाउन’ (परमिट) लिया गया था। इसका मतलब है कि उस दौरान लाइन पूरी तरह बंद रहनी चाहिए थी।

आरोप है कि परमिट जारी होने के बावजूद ग्रिड ऑपरेटर की जानलेवा लापरवाही के कारण अचानक 11 केवी (पूर्व में 33 केवी बताया गया था) हाई-टेंशन लाइन चालू कर दी गई। खंभे पर काम कर रहे बंशीदास सीधे इस शक्तिशाली करंट की चपेट में आ गए और बुरी तरह झुलसकर नीचे गिर पड़े। इस घोर लापरवाही ने एक परिवार का सहारा छीन लिया।

मनासा विद्युत कर्मी मौत के बाद शव रखकर प्रदर्शन

जैसे ही बंशीदास की मौत की खबर गांव पहुंची, वहां मातम और गुस्सा फैल गया। मंगलवार दोपहर करीब 2 बजे, न्याय की मांग को लेकर परिजनों और ग्रामीणों ने बंशीदास के शव को महागढ़ स्थित [यहाँ गूगल मैप का लिंक लगाएं] विद्युत विभाग के कार्यालय के सामने रखकर घेराव कर दिया।

ग्रामीणों का आक्रोश चरम पर था। उनकी मुख्य मांग थी कि जिस ऑपरेटर की गलती से यह जानलेवा हादसा हुआ, उस दोषी पर सख्त से सख्त कार्रवाई हो और पीड़ित परिवार को, जिसने अपना मुख्य कमाने वाला सदस्य खो दिया है, उचित मुआवजा मिले।

प्रशासन के हस्तक्षेप से बनी सहमति

धरने और तनावपूर्ण स्थिति की सूचना मिलते ही एसडीएम और तहसीलदार मौके पर पहुंचे। करीब तीन घंटे तक चले तनावपूर्ण माहौल, नारेबाजी और वार्ता के दौर के बाद प्रशासन और विभाग ने परिजनों की मांगों को गंभीरता से लिया और उन्हें स्वीकार किया, जिसके बाद धरना समाप्त हुआ।

समझौते के मुख्य बिंदु: प्रशासन और विद्युत विभाग द्वारा पीड़ित परिवार को निम्नलिखित लिखित आश्वासन दिए गए हैं:

  1. कुल आर्थिक सहायता: मनासा विद्युत कर्मी मौत मामले में पीड़ित परिवार को कुल 15 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। इसमें से 11 लाख रुपये विभागीय ठेकेदार द्वारा और 4 लाख रुपये विद्युत विभाग द्वारा देय होंगे।

  2. नौकरी का आश्वासन: परिवार के एक सदस्य को विभाग में दैनिक वेतन भोगी (Daily Wager) के रूप में नौकरी दी जाएगी, ताकि परिवार को आर्थिक सहारा मिल सके।

इस समझौते के बाद परिजन शव का अंतिम संस्कार करने के लिए राजी हुए। हालांकि, इस घटना ने एक बार फिर विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली, सुरक्षा मानकों और ग्रिड ऑपरेटरों की जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनकी एक चूक किसी की जान ले सकती है।


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