नीमच में ‘आस्था और उम्मीद’ का अनूठा प्रदर्शन: घर की आस में महिला ने भगवान-बर्तन संग कलेक्टर ऑफिस घेरा, 11 साल से आवास-पट्टा का इंतजार
नीमच। “घर नहीं तो क्या, उम्मीद और भगवान तो साथ हैं!” – इसी भावना के साथ नीमच की एक वर्षीय महिला ने मंगलवार को जिला कलेक्टर कार्यालय के बाहर एक ऐसा अनूठा विरोध प्रदर्शन किया, जिसने हर किसी का ध्यान खींचा। सुमित्रा खिंची नामक इस महिला ने प्रधानमंत्री आवास योजना और भूमि पट्टा वितरण में हो रही कथित अनदेखी के खिलाफ अपने घर के बर्तन और आराध्य देव की तस्वीरों को सामने रखकर एक घंटे तक धरना दिया। उनकी साल की लंबी लड़ाई अब प्रशासन के दरवाजे तक पहुंच गई है।
साल का इंतजार और एक अनकही व्यथा: सुमित्रा खिंची की कहानी हजारों उन बेघर लोगों की व्यथा को दर्शाती है, जो सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हैं। उन्होंने जनसुनवाई में अपनी पीड़ा साझा करते हुए बताया कि वह वर्ष से लगातार प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए आवेदन कर रही हैं। एक दशक से भी अधिक समय बीत चुका है, लेकिन न तो उन्हें आज तक अपना पक्का मकान मिल पाया है और न ही रहने के लिए जमीन का कोई पट्टा। उन्हें मजबूरन किराए के छोटे से मकान में जीवन गुजारना पड़ रहा है, और किसी भी सरकारी आवास योजना का लाभ उन तक नहीं पहुंच पा रहा है।
‘बर्तन और भगवान’: एक मूक संदेश: मंगलवार को जब सुमित्रा खिंची अपने सिर पर अपने रसोई के बर्तन और हाथों में भगवान की तस्वीरें लेकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचीं, तो वहां मौजूद हर शख्स ठिठक गया। उन्होंने जमीन पर अपने दैनिक जीवन के उन चंद सामानों को रखा और चुपचाप धरने पर बैठ गईं। यह न केवल उनकी बदहाली को दर्शाता था कि उनके पास घर नहीं, बल्कि यह प्रशासन को एक मूक संदेश भी था – “जब सरकार नहीं सुनती, तो भगवान ही आसरा हैं।”
सुमित्रा का आरोप है कि अधिकारी बार-बार आवेदन लेने के बाद भी उन्हें टालते रहे हैं। उनका कहना है कि कई ऐसे लोगों को भी आवास योजना का लाभ मिल चुका है, जिनके पास पहले से पक्के मकान हैं, जबकि वास्तविक जरूरतमंदों को दर-दर भटकना पड़ रहा है।
प्रशासन की सक्रियता और आश्वासन: इस अनोखे और भावनात्मक विरोध प्रदर्शन की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन तुरंत हरकत में आया। मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने सुमित्रा खिंची से बात की और उन्हें धैर्य रखने को कहा। बाद में, सुमित्रा ने अपनी विस्तृत शिकायत जनसुनवाई में लिखित रूप में प्रस्तुत की। बताया गया है कि कलेक्टर ने इस मामले की निष्पक्ष और त्वरित जांच का आश्वासन दिया है, जिसके बाद सुमित्रा ने अपना धरना समाप्त कर दिया।
सुमित्रा खिंची ने प्रशासन से पुरज़ोर अपील की है कि आवास योजना और पट्टा वितरण की पूरी प्रक्रिया की गंभीरता से जांच की जाए, ताकि सही मायने में जरूरतमंद लोगों को उनका हक मिल सके और किसी को भी साल तक अपने घर की आस में भटकना न पड़े।

