Neemuch 4 lane Project के रडार पर 200 साल पुरानी आस्था: क्या 106 करोड़ की सड़क के लिए टूटेगा बालाजी मंदिर?

Neemuch 4 lane Project

Neemuch 4 lane Project

नीमच। मध्यप्रदेश के नीमच जिले में विकास की रफ्तार और जन-आस्था के बीच एक बड़ा टकराव पैदा हो गया है। शहर के बहुप्रतीक्षित Neemuch 4 lane Project को लेकर अब विरोध के स्वर मुखर होने लगे हैं। मामला मऊ रोड पर स्थित करीब 200 साल पुराने प्राचीन माधोपुरा बालाजी मंदिर के अस्तित्व से जुड़ा है। 106 करोड़ रुपए की भारी-भरकम लागत से बन रहे इस प्रोजेक्ट के कारण मंदिर के एक बड़े हिस्से के टूटने की आशंका जताई जा रही है, जिसने स्थानीय प्रशासन और भक्तों के बीच तनाव की स्थिति पैदा कर दी है।

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विकास की राह में ‘प्राचीन धरोहर’ का संकट

नीमच में भाटखेड़ा फंटे से लेकर डुंगलावदा तक के मार्ग को सुगम बनाने के लिए Neemuch 4 lane Project पर काम तेजी से चल रहा है। यह 106 करोड़ रुपए का सीसी रोड प्रोजेक्ट शहर की यातायात व्यवस्था को सुधारने के लिए मास्टर प्लान का हिस्सा है। लेकिन जैसे ही निर्माण की मशीनें मऊ रोड स्थित माधोपुरा बालाजी मंदिर के समीप पहुँची, विवाद की स्थिति बन गई।

सड़क चौड़ीकरण के वर्तमान नक्शे के अनुसार, यह आशंका जताई जा रही है कि मंदिर का करीब 10 से 15 फीट का हिस्सा इस निर्माण की जद में आ सकता है। श्रद्धालुओं का कहना है कि यह केवल एक मंदिर नहीं बल्कि सदियों पुरानी विरासत है, जिसके साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

पुलिया निर्माण से बढ़ी घबराहट

वर्तमान में टू-लेन सड़क को फोरलेन में बदलने के लिए पुलिया चौड़ीकरण का कार्य प्रगति पर है। पिछले दो-तीन दिनों से मंदिर की उत्तर दिशा में पुलिया पर निर्माण कार्य शुरू किया गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह मंदिर पहले से ही मुख्य सड़क के लेवल से करीब 8 फीट नीचे स्थित है। अब Neemuch 4 lane Project के तहत हो रहा निर्माण सीधे मंदिर की बाउंड्री वॉल से सटाकर किया जा रहा है। भक्तों को डर है कि यदि निर्माण नहीं रुका, तो मंदिर का मुख्य ढांचा क्षतिग्रस्त हो सकता है।

एकजुट हुआ हिंदू समाज: विधायक को सौंपा ज्ञापन

Neemuch 4 lane Project
लोगों ने विधायक को ज्ञापन सौंपा है।

इस Neemuch 4 lane Project निर्माण कार्य के विरोध में सर्व हिंदू समाज के साथ मऊ रोड, सरदार पटेल बस्ती, तिलक बस्ती और टैगोर बस्ती के हजारों निवासी लामबंद हो गए हैं। अपनी मांगों को लेकर बड़ी संख्या में लोग नीमच विधायक के पास पहुँचे और उन्हें ज्ञापन सौंपा। श्रद्धालुओं ने स्पष्ट किया कि यह मंदिर केवल बालाजी महाराज का ही नहीं, बल्कि यहाँ भगवान भोलेनाथ, माता संतोषी, गणपति और साईं बाबा के भी प्राचीन स्थान हैं। Neemuch 4 lane Project के कारण इन सभी देव स्थानों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

प्रशासनिक बुद्धिमत्ता पर सवाल: वैकल्पिक मार्ग का सुझाव

क्षेत्रवासियों और भक्तों ने प्रशासन को एक बेहद व्यावहारिक विकल्प भी सुझाया है। उनका तर्क है कि जिस दिशा में फिलहाल पुलिया का विस्तार किया जा रहा है, उसके ठीक सामने काफी खाली सरकारी भूमि उपलब्ध है। यदि Neemuch 4 lane Project के तहत सड़क और पुलिया का निर्माण उस खाली स्थान की ओर थोड़ा शिफ्ट कर दिया जाए, तो मंदिर पूरी तरह सुरक्षित रह सकता है। भक्तों का कहना है कि तकनीकी रूप से यह संभव है, बस इसके लिए प्रशासन की इच्छाशक्ति की जरूरत है।

“आस्था से खिलवाड़ हुआ तो होगा उग्र आंदोलन”

भक्तों ने प्रशासन को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि मंदिर की ओर हो रहे Neemuch 4 lane Project निर्माण को तुरंत प्रभाव से रोका जाए। यदि प्राचीन मंदिर के अस्तित्व के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ किया गया, तो हिंदू समाज चुप नहीं बैठेगा। ज्ञापन के माध्यम से साफ कर दिया गया है कि प्रशासन विकास के नाम पर विनाश न करे। अगर समय रहते निर्माण की दिशा नहीं बदली गई, तो शहर में उग्र आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

क्या निकलेगा बीच का रास्ता?

किसी भी शहर के विकास के लिए Neemuch 4 lane Project जैसे बुनियादी ढांचे की जरूरत होती है, लेकिन यह विकास सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहरों की कीमत पर नहीं होना चाहिए। माधोपुरा बालाजी मंदिर की ऐतिहासिकता और उससे जुड़ी लाखों लोगों की भावनाओं को देखते हुए, प्रशासन को इंजीनियरिंग और आस्था के बीच संतुलन बिठाना होगा। अब देखना यह है कि नीमच विधायक और जिला प्रशासन इस तकनीकी समस्या का क्या समाधान निकालते हैं।


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