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5 लाख की फिरौती और पक्की रजिस्ट्री के बावजूद अवैध कब्ज़ा बरकरार: चीताखेड़ा में कानून व्यवस्था को खुली चुनौती देते जमीन माफिया

avaidh kabja

नीमच (Neemuch News): अपना खुद का घर और अपनी एक छोटी सी जमीन—यह हर इंसान का एक ऐसा खूबसूरत सपना होता है, जिसके लिए वह अपनी जिंदगी भर की खून-पसीने की गाढ़ी कमाई लगा देता है। मध्य प्रदेश के नीमच जिले में एक ऐसा ही मामला सामने आया है, जहाँ एक आम नागरिक ने अपने परिवार के भविष्य के लिए जमीन खरीदी, लेकिन उसे एक बड़ी धोखाधड़ी का शिकार होना पड़ा।

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पक्की रजिस्ट्री होने के बावजूद चीताखेड़ा गांव में एक जमीन पर अवैध कब्ज़ा (avaidh kabja) का हैरान कर देने वाला मामला तूल पकड़ रहा है। हालांकि, इस अंधकार के बीच एक सकारात्मक पहलू यह है कि पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय में शिकायत दर्ज होने के बाद अब पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की एक बहुत ही मजबूत उम्मीद जगी है।

सपनों की जमीन और एक पक्की कानूनी रजिस्ट्री

कनावटी के रहने वाले राजेश बैरागी ने अपने परिवार के सुरक्षित और सुखद भविष्य के लिए चीताखेड़ा गांव में एक जमीन का चुनाव किया था। काफी विचार-विमर्श के बाद, साल 2023 में उन्होंने गांव के ही निवासी चांदमल साल्वी से यह सौदा पूरी तरह से पारदर्शी और कानूनी रूप से तय किया।

प्रशासन के सभी नियमों का पालन करते हुए, सरकारी खजाने में स्टाम्प ड्यूटी चुकाकर राजेश ने उस जमीन की पक्की रजिस्ट्री बाकायदा अपने नाम करवा ली। भारतीय कानून के अनुसार, रजिस्ट्री के दिन से ही राजेश बैरागी उस संपत्ति के पूर्ण और वैध मालिक बन चुके थे।

दबंगों की एंट्री और विवाद की शुरुआत

कागजों पर सब कुछ सही था, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही निकली। जब राजेश पूरे उत्साह के साथ अपनी खरीदी हुई जमीन पर पहुंचे, तो उन्हें एक बड़े झटके का सामना करना पड़ा। जमीन बेचने वाले चांदमल साल्वी के भाइयों—चतरभूज, राजेश और ओमप्रकाश साल्वी—ने उस जमीन पर पूरी तरह से अपना अवैध कब्ज़ा (avaidh kabja) जमा रखा था।

उन्होंने सरेआम कानून को ताक पर रखते हुए कह दिया कि भले ही रजिस्ट्री राजेश बैरागी के नाम हो गई हो, लेकिन वे इस जमीन को किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ेंगे।

शांति का प्रयास: पंचायत और 5 लाख रुपये का लेन-देन

राजेश बैरागी एक बेहद शांतिप्रिय इंसान हैं और वे कोर्ट-कचहरी या पुलिस के विवादों से बचना चाहते थे। इस अवैध कब्ज़ा (avaidh kabja) को शांतिपूर्ण तरीके से हटाने के लिए उन्होंने गांव के गणमान्य लोगों और पंचों की मौजूदगी में एक पंचायत बुलाई।

इस पंचायत में दबंगों ने एक अनुचित शर्त रखी कि अगर उन्हें 5 लाख रुपये अतिरिक्त नकद दे दिए जाएं, तो वे शांति से वह जमीन खाली कर देंगे। राजेश ने अपनी ही जमीन का कब्जा पाने की आस में यह भारी रकम भी उन्हें सौंप दी। पैसे लेने के बाद आरोपियों ने दिखावे के लिए अपना जानवरों का बाड़ा वहां से हटाकर दूसरी जगह बना भी लिया।

वादे से मुकरे आरोपी: गालियां और जान से मारने की धमकियां

राजेश को लगा कि अब उनकी परेशानियां खत्म हो गई हैं। लेकिन यह राहत चंद दिनों की ही मेहमान थी। कुछ ही समय बाद, साल्वी भाइयों की नीयत फिर से खराब हो गई और उन्होंने वापस उसी जमीन पर आकर अपना डेरा जमा लिया।

जब राजेश ने इस खुली धोखाधड़ी और वादाखिलाफी का विरोध किया, तो आरोपियों ने उनके साथ बुरी तरह गाली-गलौज की। इतना ही नहीं, उन्होंने राजेश को खुलेआम जान से मारने की धमकियां देनी शुरू कर दीं, जिससे पूरा परिवार खौफ के साये में आ गया।

साल्वी परिवार पर पहले से दर्ज हैं फर्जीवाड़े के कई आरोप

इस मामले की पड़ताल में यह भी सामने आया है कि साल्वी परिवार के इन सदस्यों पर फर्जीवाड़े के और भी कई गंभीर आरोप हैं। चीताखेड़ा गांव के ही रजनीश शर्मा का साफ कहना है कि इन लोगों ने उन्हें कोई और अच्छी जमीन दिखाकर, किसी दूसरी विवादित जमीन की फर्जी रजिस्ट्री कर दी थी।

यहां तक कि जमीन बेचने वाले चांदमल साल्वी के एक सगे भाई ने भी अपने इन्हीं भाइयों पर प्रताड़ित करने और पारिवारिक संपत्ति पर जबरन अवैध कब्ज़ा (avaidh kabja) करने का गंभीर आरोप लगाया है। इससे स्पष्ट होता है कि यह परिवार आदतन इस तरह के अपराधों में लिप्त है।

एसपी कार्यालय में शिकायत: न्याय की जगी मजबूत उम्मीद

लगातार मिल रही धमकियों और धोखे के बाद, राजेश बैरागी ने हिम्मत जुटाई। वे अपने ओरिजिनल रजिस्ट्री के कागजात और 5 लाख रुपये के समझौते के सभी पक्के सबूत लेकर सीधे नीमच के पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय पहुंचे। उन्होंने पुलिस से सुरक्षा और अपनी जमीन वापस दिलाने की गुहार लगाई है।

इस पूरे मामले में सबसे सकारात्मक बात यह है कि एसपी कार्यालय ने इस शिकायत को बेहद गंभीरता से लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार पूरे प्रदेश में भू-माफियाओं और अवैध कब्ज़ा (avaidh kabja) करने वालों के खिलाफ जिस तरह से ‘जीरो टॉलरेंस’ (Zero Tolerance) की सख्त नीति अपना रही है, उसे देखते हुए राजेश बैरागी को अब पूरी उम्मीद है।

नीमच पुलिस प्रशासन की सक्रियता से यह तय माना जा रहा है कि दबंगों का यह अतिक्रमण जल्द ही हटेगा। पुलिस की यह संभावित और त्वरित कार्रवाई न केवल राजेश बैरागी को उनका हक दिलाएगी, बल्कि समाज में यह कड़ा संदेश भी देगी कि मध्य प्रदेश में कानून का राज है, किसी माफिया का नहीं।


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