नीमच में सोशल मीडिया और गतिविधियों पर प्रतिबंध, DM ने जारी किए आदेश

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नीमच: आगामी त्योहारों के मद्देनजर, जिला मजिस्ट्रेट श्री हिमांशु चंद्रा ने नीमच जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत कड़े प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए हैं। यह आदेश 6 नवंबर 2025 से 4 जनवरी 2026 तक प्रभावी रहेगा।

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जिला प्रशासन का मुख्य ध्यान सोशल मीडिया के दुरुपयोग को रोकने पर है, जहां धार्मिक, सामाजिक, या जातिगत भावनाओं को भड़काने वाले संदेश, फोटो, ऑडियो या वीडियो को लाइक, शेयर या फॉरवर्ड करने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है।

सोशल मीडिया पर सख़्त निगरानी

डीएम के आदेश के अनुसार, कोई भी व्यक्ति Facebook, WhatsApp, X (पूर्व में Twitter), Instagram, Hike, Telegram या किसी अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग विद्वेष फैलाने के लिए नहीं करेगा।

  • ग्रुप एडमिन की जिम्मेदारी: ग्रुप एडमिन को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके ग्रुप में इस प्रकार के आपत्तिजनक संदेशों का प्रसारण न हो।
  • पुष्टि के बाद ही शेयर करें: किसी भी पोस्ट या संदेश को आगे शेयर या फॉरवर्ड करने से पहले उसकी पुष्टि (verification) करना अनिवार्य होगा।
  • सामुदायिक, धार्मिक या जातिगत घृणा या वैमनस्यता पैदा करने के किसी भी प्रयास को सख्त अपराध माना जाएगा।

सुरक्षा के अन्य महत्वपूर्ण निर्देश

सोशल मीडिया के अलावा, जिले में सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए अन्य कई महत्वपूर्ण निर्देश भी दिए गए हैं:

  1. साइबर कैफे पर नियम: साइबर कैफे के मालिकों को अज्ञात व्यक्तियों को सेवा देने से पहले उनके विश्वसनीय प्रमाण पत्र (ID Proof) की जांच करनी होगी। सभी आगंतुकों का पूरा विवरण, जिसमें नाम, पता, फोन नंबर, और ID प्रूफ शामिल हो, रजिस्टर में दर्ज करना आवश्यक है। कैफे में वेब कैमरा होना और रिकॉर्ड को सुरक्षित रखना भी अनिवार्य है।
  2. किरायेदारों का सत्यापन: मकान मालिक और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के प्रबंधक अपने किरायेदार का पूरा विवरण संबंधित थाना प्रभारी को सौंपने के बाद ही किराए पर दे सकेंगे।
  3. हथियारों का प्रदर्शन वर्जित: त्योहारों के दौरान लाइसेंसधारी व्यक्ति भी सार्वजनिक रूप से बंदूक, पिस्तौल, भाला, खंजर, या किसी भी अन्य घातक हथियार का प्रदर्शन नहीं कर सकेंगे।
  4. ध्वनि विस्तारक: ध्वनि विस्तारक यंत्रों (लाउडस्पीकर) के उपयोग में सर्वोच्च न्यायालय के नियमों का सख्ती से पालन करना होगा।
  5. आयोजनों के लिए अनुमति: धार्मिक आयोजनों, जुलूसों और रैलियों के लिए संबंधित अनुविभागीय दण्डाधिकारी (SDM) से अनुमति लेना अनिवार्य होगा।

जिला मजिस्ट्रेट ने स्पष्ट किया है कि इन आदेशों का उल्लंघन भारतीय न्याय संहिता की धारा-223 के तहत एक दण्डनीय अपराध माना जाएगा।


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