Neemuch Health Crisis: शहर के नीचे बह रहा ‘बीमारियों का लावा’, जलकुंभी और प्रशासनिक लापरवाही से महामारी की आहट

Neemuch Health Crisis
नीमच न्यूज़: क्या आप जानते हैं कि आपकी थाली में परोसी जा रही हरी सब्जियां आपको सेहत नहीं, बल्कि धीमा जहर दे रही हैं? क्या आपको पता है कि शहर के नाले अब केवल गंदे पानी का स्रोत नहीं, बल्कि एक ‘टाइम बम’ बन चुके हैं? Neemuch Health Crisis अब एक सामान्य शब्द नहीं, बल्कि शहर की एक डरावनी हकीकत बन चुका है। नगरपालिका की लापरवाही और नालों में पसरती जलकुंभी (Water Hyacinth) ने शहर को बारूद के ढेर पर बैठा दिया है।
पूर्व स्वास्थ्य सभापति डॉ. पृथ्वीसिंह वर्मा ने जो खुलासे किए हैं, वे किसी भी शहरवासी की नींद उड़ाने के लिए काफी हैं। स्थिति यह है कि अगर अब भी नहीं संभले, तो इंदौर जैसा मंजर नीमच में भी देखने को मिल सकता है।
जलकुंभी नहीं, यह महामरी का ‘इन्विटेशन कार्ड‘ है
शहर के नालों का हाल यह है कि वहां पानी कम और जलकुंभी ज्यादा नजर आती है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो यह स्थिति बेहद खतरनाक है। डॉ. वर्मा ने स्पष्ट किया कि जलकुंभी पानी में ऑक्सीजन (Dissolved Oxygen) के स्तर को खत्म कर देती है।
जब पानी में ऑक्सीजन नहीं बचती, तो वह पानी ‘मृत’ हो जाता है। ऐसे पानी में मछलियाँ और अन्य जलीय जीव तड़प-तड़प कर मर जाते हैं, जिससे पर्यावरण का संतुलन पूरी तरह बिगड़ जाता है। लेकिन खतरा यहीं नहीं थमता। ऑक्सीजन की कमी से पानी में खतरनाक बैक्टीरिया और कीटाणुओं को पनपने का ‘गोल्डन चांस’ मिल जाता है।
7 जानलेवा बीमारियों का सीधा खतरा
Neemuch Health Crisis (नीमच स्वास्थ्य संकट) का सबसे बड़ा कारण यह रुका हुआ और सड़ता पानी है। डॉ. वर्मा के अनुसार, इस गंदे पानी से शहर में निम्नलिखित बीमारियों का विस्फोट कभी भी हो सकता है:
जलजनित रोग (Waterborne Diseases): हैजा, टाइफाइड, पेचिश और पीलिया जैसे रोग घर-घर पहुँच सकते हैं।
त्वचा रोग: दूषित पानी के संपर्क या हवा में नमी के कारण फंगल इन्फेक्शन और स्किन एलर्जी के मामले बढ़ रहे हैं।
वेक्टर बोर्न डिजीज: जलकुंभी मच्छरों के लिए सबसे सुरक्षित ‘प्रजनन केंद्र’ (Breeding Ground) है। इससे डेंगू और मलेरिया का खतरा कई गुना बढ़ गया है।
सावधान! आपकी थाली में भी पहुँच रहा है ‘नाले का जहर‘
इस पूरे मामले का सबसे खौफनाक पहलू यह है कि यह गंदा पानी केवल नालों तक सीमित नहीं है। डॉ. वर्मा ने एक गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि नालों से सटी कॉलोनियों और खेतों में इसी पानी का इस्तेमाल हो रहा है।
आसपास के खेतों में उगाई जा रही सब्जियों की सिंचाई इसी जहरीले पानी से की जा रही है। इन सब्जियों में नाले की गंदगी, केमिकल और बैक्टीरिया सीधे तौर पर समा रहे हैं। उपभोक्ता बाजार से ताजी सब्जी समझकर जो खरीद रहे हैं, वह असल में बीमारियों का बंडल है। इन सब्जियों से दुर्गंध आती है, लेकिन पकाने के बाद मसालों की खुशबू में वह जहर छिप जाता है। अनजाने में ही सही, लोग अपने बच्चों को Neemuch Health Crisis का शिकार बना रहे हैं।
इंदोर जैसी त्रासदी का इंतजार ?
डॉ. वर्मा ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए इंदौर की एक पुरानी घटना का जिक्र किया, जहाँ दूषित पानी पीने से सैकड़ों लोग बीमार पड़े थे और 20 से अधिक लोगों की जान चली गई थी। नीमच के विकास नगर, हुडको, जवाहर नगर, शास्त्री नगर, एकता कॉलोनी और स्कीम नंबर 9 के रहवासी इसी डर के साये में जी रहे हैं। यहाँ के नलकूपों (Tube wells) और कुओं का पानी भी नालों के रिसाव (Seepage) के कारण दूषित होने की आशंका है।
3 साल, खोखले दावे और ‘जीरो‘ सफाई
नगरपालिका की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए पूर्व स्वास्थ्य सभापति ने कहा कि पिछले तीन वर्षों से शहर में केवल ‘सफाई के दावे’ किए जा रहे हैं, सफाई नहीं। हकीकत यह है कि नालों की एक फीट भी सफाई नहीं हुई है।
“सफाई के नाम पर केवल खानापूर्ति हो रही है। उल्टा, प्रदूषण का स्तर हजार गुना बढ़ चुका है। नगरपालिका अध्यक्ष और जिम्मेदार अधिकारी कुंभकर्णी नींद सो रहे हैं, जबकि शहर महामारी के मुहाने पर खड़ा है।” – डॉ. पृथ्वीसिंह वर्मा
यह भी पढ़ें: Gold Price Today: निवेशकों के लिए झटका या मौका? सोना हुआ सस्ता और चांदी में ₹12,000 की ऐतिहासिक गिरावट

