नीमच में 38 करोड़ की बेशकीमती जमीन पर High Court Stay: सुबह गरजता रहा बुलडोजर, शाम को कानूनी दांव-पेंच में उलझा प्रशासन

High Court Stay

High Court Stay

नीमच: मध्यप्रदेश के नीमच जिले में शुक्रवार को न्याय और प्रशासन के बीच एक हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला। जिला प्रशासन ने जिस भू-माफिया मुक्त अभियान के तहत करोड़ों की जमीन को आजाद कराया था, उस पर शाम ढलते-ढलते High Court Stay के आदेश ने फिलहाल विराम लगा दिया है। यह मामला अब शहर की सबसे चर्चित कानूनी लड़ाई में तब्दील हो गया है।

Shubham Solar Solution

सुबह का एक्शन: 38 करोड़ की जमीन और भारी पुलिस बल

शुक्रवार की सुबह नीमच के डाकबंगले के सामने का नजारा किसी युद्ध क्षेत्र जैसा था। कलेक्टर हिमांशु चंद्रा के सख्त रुख के बाद जिला प्रशासन और नगर पालिका की टीम ने एक गुप्त ऑपरेशन को अंजाम दिया। सुबह करीब 5:15 बजे, जब शहर पूरी तरह जागा भी नहीं था, जेसीबी और पोकलेन मशीनों के साथ भारी पुलिस बल ने बगीचा नंबर 38 और खेत नंबर 10 की घेराबंदी कर दी।

प्रशासन का दावा है कि यह जमीन करीब 4.80 हेक्टेयर (लगभग 12 एकड़) है, जिसका वर्तमान बाजार मूल्य 38 करोड़ रुपये से अधिक है। इस बेशकीमती जमीन पर वर्षों से ‘आंजना परिवार’ और अन्य रसूखदारों का कब्जा बताया जा रहा था। नगर पालिका सीएमओ दुर्गा बामनिया और अतिरिक्त कलेक्टर श्री कनेश की मौजूदगी में प्रशासन ने अवैध बाउंड्री वॉल, पक्के निर्माण और टीन शेड्स को जमींदोज करना शुरू कर दिया।

शाम का कानूनी धमाका: High Court Stay ने बदला मंजर

जैसे ही प्रशासन इस बड़ी कामयाबी का जश्न मनाने की तैयारी कर रहा था, इंदौर हाईकोर्ट से आए एक आदेश ने प्रशासनिक अधिकारियों के चेहरे की हवाइयां उड़ा दीं। याचिकाकर्ता बीना आंजना द्वारा दायर रिट याचिका पर त्वरित सुनवाई करते हुए माननीय उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने इस कार्रवाई पर High Court Stay लगा दिया।

न्यायालय ने 02 जनवरी 2026 और 09 जनवरी 2026 को प्रशासन द्वारा जारी किए गए नोटिसों के क्रियान्वयन पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। इसके साथ ही, अदालत ने शासन और संबंधित विभागों को नोटिस जारी कर 6 सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब पेश करने का आदेश दिया है। अब इस High Court Stay के बाद मौके पर यथास्थिति बनी रहेगी।

‘अज्ञात’ नोटिस: प्रशासन की वो चूक जो गले की फांस बनी?

इस पूरे मामले में कानूनी पेचीदगी प्रशासन द्वारा जारी किए गए नोटिस की प्रक्रिया को लेकर है। मामले की पैरवी कर रहे एडवोकेट अमित कुमार शर्मा ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि करोड़ों की जमीन का मामला होने के बावजूद नगरपालिका ने 09 जनवरी 2026 को “अज्ञात” व्यक्ति के नाम नोटिस जारी किया था।

एडवोकेट शर्मा का तर्क है कि जब जमीन पर रहने वाले और कब्जाधारी ज्ञात हैं, तो ‘अज्ञात’ के नाम नोटिस देना कानून की मूल भावना और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है। हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्टया इसी तकनीकी आधार और जल्दबाजी में की गई कार्रवाई को देखते हुए High Court Stay देना उचित समझा। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी को सुने बिना उसकी संपत्ति पर बुलडोजर चलाना न्यायिक कसौटी पर अक्सर कमजोर साबित होता है।

प्रशासन का पक्ष: जनहित और सरकारी स्वामित्व का दावा

दूसरी ओर, जिला प्रशासन अब भी अपने स्टैंड पर कायम है। प्रशासन का कहना है कि यह भूमि आधिकारिक रिकॉर्ड में नगरपालिका परिषद नीमच के स्वामित्व की है। पूर्व में तत्कालीन एसडीएम और व्यवस्थापन अधिकारी राजेंद्र सिंह ने भी इस जमीन का व्यवस्थापन खारिज कर इसे नगर पालिका के आधिपत्य में लेने के आदेश दिए थे।

प्रशासन का लक्ष्य इस जमीन को मुक्त कराकर यहाँ जनहित की योजनाएं और शहर विकास के प्रोजेक्ट्स शुरू करना था। गौरतलब है कि इससे पहले 30 दिसंबर 2025 को भी प्रशासन ने 42 करोड़ रुपये की जमीन मुक्त कराई थी, जिससे भू-माफियाओं में हड़कंप मचा हुआ था।

अब आगे क्या?

High Court Stay के बाद अब सारा दारोमदार शासन के जवाब पर टिका है। यदि 6 सप्ताह बाद होने वाली सुनवाई में शासन यह साबित कर पाता है कि उसकी प्रक्रिया पारदर्शी और वैधानिक थी, तो कार्रवाई दोबारा शुरू हो सकती है। लेकिन फिलहाल, यह 38 करोड़ की जमीन कानूनी लड़ाई के केंद्र में है।

नीमच की जनता इस बात को लेकर चर्चा में है कि क्या प्रशासन ने वास्तव में नियमों की अनदेखी की या फिर रसूखदारों ने कानून का सहारा लेकर अपनी जमीन बचाने की सफल कोशिश की है। आने वाले दिनों में यह मामला मध्यप्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में और भी गरमाने वाला है।


यह भी पढ़ें: 38 करोड़ की जमीन मुक्त: नीमच में चला अतिक्रमण हटाओ अभियान, 4.80 हेक्टेयर भूमि आजाद

हो सकता है आप चूक गए हों